BJP Assembly Election 2026 Political Scenario; West Bengal Assam | Tamil Nadu

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अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा।

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अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है…

  • 2015 में मध्यप्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय को बीजेपी ने महासचिव बनाया और जिम्मेदारी दी पश्चिम बंगाल की। उस वक्त बंगाल में बीजेपी के सिर्फ 2 सांसद थे और विधायक जीरो।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोटों के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें जीती। TMC को 48% वोटों के साथ 215 सीटें मिलीं। बीजेपी विपक्ष में बैठी।
  • 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने के सबसे करीब है। पश्चिम बंगाल में मुकाबला दो पार्टियों के बीच है। अगर बीजेपी ने TMC का 5% वोट भी अपने पाले में कर लिया, तो वह नंबर-1 बन सकती है।
  • 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 38 सीटें 5% के मार्जिन से और 75 सीटें 10% के मार्जिन से हारी थीं। ऐसे में बीजेपी इन्हीं सीटों पर टारगेट करेगी।
  • अगर बीजेपी ने TMC के 5% वोट खींच लिया तो उसकी कुल सीटें 75+77 यानी करीब 152 हो जाएंगी और इसी के साथ नंबर-1 पार्टी बन जाएगी।
  • इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ममता बनर्जी को चुनौती दे सकती है। एंटी-इनकम्बेंसी, बेरोजगारी और स्थानीय असंतोष से ममता की TMC के लिए मुकाबला और कठिन बन सकता है।
  • 2015 में कांग्रेस के पॉपुलर लीडर हिमंता बिस्व सरमा ने बीजेपी जॉइन की। अगले साल हुए असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद से गठबंधन किया। नतीजे आए तो NDA को 126 में से 86 सीटें मिलीं।
  • बीजेपी ने अकेले 60 सीटें जीतीं। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। वरिष्ठता के हिसाब से सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने।
  • बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में पैर जमाने और बाहरी पार्टी का टैग हटाने के लिए मई 2016 में रीजनल पार्टियों के साथ नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी NEDA बनाया। हिमंता इसके संयोजक बने।
  • 2021 में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। इस बार हिमंता सीएम बने। आज हिमंता नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और पार्टी आलाकमान के नजदीकी माने जाते हैं।
  • 2026 के चुनाव में बीजेपी हिमंता के चेहरे पर हैट्रिक की तैयारी में है। यहां हार का मतलब होगा- नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की पकड़ ढीली पड़ना। क्योंकि असम ही नॉर्थ-ईस्ट का प्रवेश द्वार और सबसे बड़ा राज्य है। यहीं बीजेपी सबसे ज्यादा मजबूत है।
  • 2011 की जनगणना के मुताबिक असम में 34% मुस्लिम हैं। अगर मुस्लिमों का वोट कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF की पार्टी में बंट गया, तो इससे बीजेपी को फायदा होगा। लेकिन अगर ये वोटर्स एकजुट होकर कांग्रेस के साथ चले गए तो मुकाबला कड़ा हो जाएगा।
  • इसके लिए बीजेपी बांग्लादेश घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है। हिमंता ने भी एग्रेसिव हिंदू लीडर की छवि बनाई है।
  • तमिलनाडु की राजनीति दशकों से दो द्रविड़ ध्रुवों- DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ‘हिंदी भाषी’ और ‘उत्तर भारतीय पार्टी’ की छवि के कारण बीजेपी की राह हमेशा कठिन रही।
  • बीजेपी ने 2001 में DMK के साथ चुनाव लड़ा, तो 4 सीटें जीतीं। लेकिन सरकार AIADMK की जे. जयललिता ने बनाई।
  • कुछ साल बाद बीजेपी और AIADMK का गठजोड़ हुआ। इसके चलते 2021 में बीजेपी को फिर से 4 सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता DMK के एमके स्टालिन ने संभाली।
  • चुनाव के बाद बीजेपी ने पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उन्होंने एग्रेसिव स्ट्रैटजी अपनाई। कुछ समय बाद बीजेपी और AIADMK अलग हो गए।
  • वहीं अन्नामलाई ने ‘एन मन, एन मक्कल’ यानी ‘मेरी भूमि, मेरे लोग’ पदयात्रा से हर जिले में बीजेपी का झंडा पहुंचाया। द्रविण पार्टियों को भ्रष्टाचार और परिवारवाद के मुद्दे पर घेरा।
  • 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने छोटे क्षेत्रीय दलों से अलायंस किया और 19 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन खाता तक नहीं खुला। अन्नामलाई खुद कोयंबटूर की सीट हार गए।
  • हालांकि बीजेपी को 11.2% वोट मिले, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में 2.6% वोट मिले थे। 9 सीट पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही। इसने बीजेपी को द्रविण पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश किया।
  • 2026 के चुनाव में बीजेपी ने AIADMK और छोटे क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किया है। बीजेपी 27 और AIADMK 178 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
  • बीजेपी का लक्ष्य केवल सीटें जीतना नहीं, बल्कि खुद को पॉलिटिकल ऑप्शन के तौर पर पेश करना है। बीजेपी द्रविण पार्टियों से नाराज वोटर्स को साधना चाहती है।
  • प्रोफेसर और इलेक्शन एनालिस्ट संजय कुमार मानते हैं कि बीजेपी ने धीरे-धीरे उन राज्यों में जड़े जमाई हैं, जहां उसकी मौजूदगी पहले काफी कम थी। खास कर उन राज्यों में जहां क्षेत्रीय पार्टियां हावी हैं। अगर तमिलनाडु में अच्छी साझेदारी हुई तो बीजेपी अपना परफॉर्मेंस सुधार सकती है और मजबूत हो सकती है।
  • केरलम को बीजेपी के लिए ‘फाइनल फ्रंट’ माना जाता है। क्योंकि दशकों से बीजेपी और संघ यहां जमीन तैयार कर रहे हैं, लेकिन चुनावी सफलता से कोसों दूर हैं।
  • बीते कुछ दशकों में सत्ता की बागडोर या तो CPIM के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने संभाली या फिर कांग्रेस के यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने।
  • 2016 के चुनाव में बीजेपी की बोहनी हुई। तिरुवनंतपुरम की नेमोम विधानसभा सीट जीती। दशकों से संघ-बीजेपी के लिए जमीन बना रहे 86 साल के ओ. राजगोपाल ने यहां कमल खिलाया।
  • 2021 में बीजेपी अपनी इस इकलौती सीट को बचा नहीं पाई और फिर से शून्य पर पहुंच गई। हालांकि पलक्कड़ सीट बीजेपी जीतते-जीतते रह गई। यहां मेट्रो मैन ई. श्रीधरन करीब 4 हजार वोट से हार गए।
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की फिर किस्मत खुली। मलयालम सुपरस्टार सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर कमल खिलाया। सुरेश केरलम से बीजेपी के पहले और इकलौते सांसद हैं।
  • वहीं बीजेपी का वोट शेयर 16.8% हो गया, जो 2019 में 13% था। इस चुनाव से माना जाने लगा कि बीजेपी केरलम में तीसरा ऑप्शन बन सकती है।
  • फिर दिसंबर 2025 में निकाय चुनाव हुए। बीजेपी ने चार दशकों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर काबिज लेफ्ट को हरा दिया। इस जीत से पार्टी को उम्मीद है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगी।
  • लेफ्ट के गढ़ में इन कामयाबियों के बावजूद बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है यहां का सामाजिक ढांचा। केरलम की करीब 45% आबादी मुस्लिम और ईसाई है, जो पारंपरिक तौर पर बीजेपी के वोटर नहीं माने जाते। वहीं केवल हिंदू वोटर्स को एकजुट कर उनके सहारे सत्ता पाना बीजेपी के लिए मुश्किल है।
  • ऐसे में 2026 के चुनाव में बीजेपी ईसाइयों को लामबंद करना चाहती है। इसके लिए उसने 7 ईसाई उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं ट्वेंटी-20 पार्टी समेत कुछ स्थानीय दलों के साथ अलायंस किया। 19 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली ट्वेंटी-20 को ईसाई समुदाय का समर्थन है।
  • इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश है कि कुछ सीट जीतने के साथ वह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए और वोट काटने वाली पार्टी से ऊपर उठाकर ‘किंगमेकर’ बने। साथ ही अपना मजबूत वोटबेस तैयार करे।
  • अमिताभ तिवारी कहते हैं, केरलम में राजनीति पर लंबे समय से UDF और LDF का वर्चस्व रहा है, जिससे तीसरे मोर्चे की गुंजाइश कम बची है। ऐसे में बीजेपी तुरंत सत्ता हासिल करने के बजाय अपने वोट शेयर और सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगी।
  • दक्षिण भारत के छोटे से केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की राजनीति एक दौर में द्रविण पार्टियों और कांग्रेस के इर्द-गिर्द थी। लेकिन हाल में बीजेपी ने साबित किया है कि वह दक्षिण में भी बेहतर तरीके से गठबंधन सरकार चला सकती है।
  • 2014 में बीजेपी ने पूर्व सीएम एन. रंगास्वामी की पार्टी AINRC के साथ गठजोड़ किया। हालांकि दो चुनावों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला।
  • आखिरकार 2021 में बीजेपी ने 9 सीटों पर लड़कर 6 पर जीत दर्ज की। वहीं AINRC को 10 सीटें मिलीं। एन. रंगास्वामी सीएम बने।
  • यहां 3 विधायक केंद्र सरकार नॉमिनेट करती है। इस प्रावधान का फायदा बीजेपी को मिला और उसके पास कुल 6 विधायक हो गए। इसी के साथ बीजेपी, AINRC के लगभग बराबर हो गई।
  • 2026 के चुनाव में पुडुचेरी में बीजेपी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी। साथ ही नई सीट जीतना चाहेगी। दक्षिण भारत में एक मैसेज भी देना चाहेगी कि हम AINRC जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर लंबे समय तक सरकार चला सकते हैं।

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