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‘अंग्रेजों की सरकार हमारे फ्रीडम फाइटर्स को टेररिस्ट कहती थी, लेकिन फिर भी उन्हें जेल में साथ रखती थी। देश आजाद होने के 70-80 साल बाद एक पॉलिटकल पार्टी की सरकार आई। उसने अपने राजनीतिक विरोधियों को ही जेल में डाल दिया। ये भी इंश्योर किया कि हम जेल में भी एक दूसरे से न मिल सकें।‘ ये आरोप दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया लगा रहे हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया है। शराब घोटाले के आरोप में सिसोदिया को करीब 17 महीने जेल में रहना पड़ा था। इस दौरान कई उतार-चढ़ाव भी देखे। जेल में बिताए दिनों को याद कर वे आज भी भावुक हो जाते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मनीष सिसोदिया ने जेल में गुजारे दिन, कोर्ट से मिली क्लीनचिट और पार्टी की आगे की स्ट्रैटजी को लेकर बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आप करीब 17 महीने या कहें 550 दिन से भी ज्यादा जेल में रहे। इस बीच आपकी पत्नी बीमार थीं, कई बार एडमिट भी हुईं। सब कैसे संभाला?
जवाब: आप दिन गिन रही हैं, मैं तो घंटे गिनता था। डेढ़ साल बहुत तकलीफ भरे थे। पत्नी बीमार थीं। बेटा विदेश (टोरंटो) पढ़ने गया ही था और मैं जेल चला गया। पर्सनल लाइफ तो फुल ऑफ पेन थी ही। इन सबके बीच एक बड़ा दर्द ये था कि हम राजनीति में एक सपना लेकर आए थे, उस पर ब्रेक लग गया। हमने काफी मेहनत करके अपने विचार जमीन पर लाने का काम शुरू किया। मेरा सपना था कि देश की राजनीति में एजुकेशन के बीज डालूं। जेल गया तो लगा जैसे किसी किसान ने जमीन में बीज डालें हो, उसमें अंकुर आए ही हों और कोई मॉन्स्टर (शैतान) आकर उसे तहस-नहस कर दे। पिछले 8-10 साल में हमने एजुकेशन के लिए बहुत काम किया था। हैप्पीनेस प्रोग्राम और देशभक्ति के प्रोग्राम चलाए। टीचर्स को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजा। सरकारी स्कूलों की एजुकेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने का सपना देखा। हम उसे पूरा करने के बहुत करीब थे, लेकिन पहले ये आरोप लगे और फिर जेल जाना पड़ा। लगा कि सबकुछ एक झटके में तहस-नहस हो गया। सवाल: आरोप लगाने वाले सरकार में थे, कभी तो डर लगा होगा कि छूटेंगे या नहीं?
जवाब: मैं जेल में एजुकेशन से जुड़ी कुछ किताबें लेकर गया था। उन्हें पढ़ता तो लगता कि पढ़ तो रहा हूं, लेकिन क्या कभी इसकी जानकारी इस्तेमाल भी कर पाऊंगा। शुरू में तो लगा था कि 2-3 महीने में वापस आ जाऊंगा, लेकिन बेल रिजेक्ट होने लगी, तो भरोसा कमजोर होने लगा। जांच एजेंसियां कोर्ट में कहती थीं कि बस 2-3 महीने में ट्रायल खत्म हो जाएगा, लेकिन कुछ हो ही नहीं रहा था। जाहिर है कि ये सब BJP अपने वकीलों से कहलवा और करवा रही थी। हालांकि कोर्ट और संविधान पर भरोसा था, क्योंकि जानता था कि जब ये केस कोर्ट में जाएगा तो जिरह होगी। जज सबूत मांगेंगे, तो इनके पास कोई जवाब नहीं होगा। फिर भी उस वक्त अनिश्चितता तो थी। सवाल: पत्नी से बात होती थी, तो वे क्या कहती थीं?
जवाब: उन्हें किसी वक्त तो लगा ही होगा कि कहीं फंस तो नहीं गए। एक सामान्य घर की महिला होने के नाते, पत्नी होने के नाते, वो कभी तो सोचती होगी कि पति जेल में है। वो खुद बीमार भी थी। उलझन तो रही होगी, लेकिन उन्होंने कभी जाहिर नहीं किया। कई लोग हमें सलाह देते थे कि उन लोगों से समझौता कर लो, जेल में कब तक सड़ोगे। आपको एक किस्सा सुनाता हूं। मैंने एक बार पत्नी से कहा कि मान लो मैं सलाह मानकर BJP जॉइन कर लूं तो वो वॉलियंटियर्स क्या सोचेंगे, जो अपना कामकाज छोड़कर दिन-रात हमारे साथ लगे रहे। उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगा। मेरी पत्नी ने फौरन कहा, ‘उन्हें छोड़िए आप मुझे क्या मुंह दिखाएंगे।’ उनकी इस बात से मुझे लगा मैं गलत रास्ते पर नहीं हूं। बेटा विदेश गया तो मैंने उसे एक खत लिखा कि तेरे लिए परेशान हूं। इस वक्त मुझे तेरे साथ होना चाहिए था। दुनियाभर के बच्चे वहां होंगे, हिम्मत रखना। मैंने वो सब लिखा, जैसा एक पिता महसूस करता है। उसने भी लिखकर ही जवाब दिया, अगर आप मेरे लिए परेशान हैं तो ये मेरी देशभक्ति पर सवाल है। आप मेरी चिंता मत करो। आप जिस मिशन पर हो, उसकी फिक्र करो। तब मुझे पहली बार लगा कि बेटा बड़ा हो गया है। सवाल: आप, अरविंद केजरीवाल, सत्येंद्र जैन तीनों एक ही वक्त एक ही जेल में थे। तीनों कितना मिल पाते थे, क्या बातें होती थीं?
जवाब: हम कभी नहीं मिले। इन लोगों ने इंश्योर किया था कि हम कभी एक दूसरे से न मिलें। आप सोचिए अंग्रेज हमारे फ्रीडम फाइटर्स को टेररिस्ट कहते थे। तब भी उन्हें एक साथ जेल में रखते थे। हमें तिहाड़ में भी अलग-अलग जेलों में रखा गया था। जेल के अंदर कई जेले हैं। फिर वार्ड, बैरक और सेल हैं। जैसे मैं अपनी सेल में हूं, तो सिर्फ अपनी बैरक में ही घूम सकता हूं। एक बैरक में कई सेल होती हैं। मैं अपनी सेल में अकेला था, जबकि बाकी सेलों में कई लोग थे। ऐसे समझिए कि तिहाड़ के अंदर की सभी जेलें इंडिपेंडेंट हैं। यहां तक कि बैरक भी एक अलग जेल ही हैं। इसलिए हम एक-दूसरे को देख भी नहीं सकते थे। आपको बताऊं तो अंग्रेजों ने जैसा सलूक हमारे फ्रीडम फाइटर्स के साथ किया था, उससे भी बुरा सलूक हमारे साथ हुआ। सवाल: सुना है आप जेल में भगवद्गीता और उपनिषद पढ़ते थे?
जवाब: मुझे किसी ने सलाह दी कि आप राजनीतिक कैदी हैं। ये वक्त बर्बाद मत करिएगा और न ही मेंटल लेवल डाउन होने देना। इसलिए जेल में मैंने भगवद्गीता के डिफरेंट वर्जन पढ़े। ओशो की किताबें, उपनिषद, बुद्ध का इंटरनेशनल लिटरेचर और गांधी सबको पढ़ा। मेडिटेशन भी किया। इसमें सबसे अच्छे उपनिषद लगे। इसे पढ़कर मुझे हिंदू नॉलेज पर बहुत गर्व हुआ। अफसोस भी हुआ कि हमने इसे गलत कर्मकांडों और व्याख्यायों में बर्बाद कर दिया। अब क्वांटम साइंस हमारे हिंदू दर्शन को प्रूफ कर रही है। आप यकीन नहीं मानेंगी अब कभी-कभी सोचता हूं कि अगर जेल नहीं जाता, तो शायद उपनिषद नहीं पढ़ पाता। सवाल: जब कोर्ट ने बरी करने का फैसला सुनाया तो पहला रिएक्शन क्या था?
जवाब: जब फैसला आया तो मैंने कोर्ट के बाहर से ही सबसे पहले पत्नी को फोन किया और फिर बेटे को। वो बहुत इमोशनल पल था। सवाल: 2000 करोड़ से ज्यादा के इस स्कैम के केंद्र में आप थे। केजरीवाल तो इसलिए फंसे क्योंकि वो दिल्ली के CM थे। अगर सजा होती तो भी आप ही केंद्र में होते?
जवाब: इस मनोहर कहानी के केंद्र में… देखिए, पॉलिटिकल एजेंडा के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल करके आप किसी को गिरफ्तार कर सकते हैं। ट्रिक लगाकर तारीख ले सकते हैं, बेल रिजेक्ट करा सकते हैं, लेकिन प्रूफ नहीं दे सकते। अपराधी नहीं साबित कर सकते। सुप्रीम कोर्ट में मेरी बेल एप्लीकेशन सुनी जा रही थी, तब जस्टिस संजीव खन्ना जी ने कहा था कि हम अभी बेल सुन रहे हैं, ट्रायल नहीं कर रहे। अगर ये केस ट्रायल में जाएगा, तो दो लाइन में फ्लैट हो जाएगा। मुझे पता था कि ये केस नहीं टिकेगा। ये सारा खेल बस बेल होने तक था। सवाल: जांच एजेंसी ने इस केस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, 9 मार्च को सुनवाई है, आपकी क्या तैयारी है?
जवाब: लीगल टीम की अपनी तैयारी है, लेकिन अभी कोर्ट ने बिल्कुल क्लियर लिखा है कि आपने पहले अपनी कहानी लिख ली। फिर जब आप छापा मारने गए तो आपको उस कहानी का भी कोई सबूत नहीं मिला। तब आपने कुछ लोगों को अरेस्ट किया और उनसे ये कहानी नैरेट करवा ली। आपने अरेस्ट हुए बिजनेसमैन में से दो को पहले आरोपी बनाया, फिर उन्हें ही सरकारी गवाह बना लिया। फिर उनसे ये कहानी नैरेट करवा दी। जांच एजेंसी को न कोई मनीट्रेल मिली, न पैसा मांगने का सबूत मिला और न किसी से मिलने का सबूत मिला। ये कहानी पहले आरोपी फिर सरकारी गवाह बने व्यक्ति के बयान के इर्द-गिर्द है, तो ये किसी कोर्ट में नहीं टिकेगी। सवाल: दिल्ली की CM रेखा गुप्ता कह रही हैं कि जनता चुनाव में न्याय का फैसला सुना चुकी है, अब हाईकोर्ट भी सुनाएगा?
जवाब: दिल्ली की जनता को एक साल में सरकार ने जितना प्रताड़ित कर दिया है, उतनी प्रताड़ित वो कभी नहीं रही। जेल में रखकर हमें और हमारे परिवारों को तो सजा दिला दी, लेकिन दिल्ली की जनता को क्यों सजा दे रहे हैं। स्कूल बंद कर रहे हैं, मोहल्ला क्लिनिक बंद हो रही हैं। कॉन्ट्रैक्ट की जॉब कर रहे लोगों को निकाला जा रहा है। आखिर क्यों हजारों लड़के-लड़कियां, DTC के कर्मचारी, मार्शल्स और मोहल्ला क्लिनिक के कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। सवाल: दिल्ली चुनाव में लिकर स्कैम सबसे बड़ा मुद्दा था, क्या पार्टी ने कुछ आकलन किया कि इस आरोप की वजह से कितनी सीटें गईं?
जवाब: लाइफ और राजनीति ऐसे मैथमैटिक्स से नहीं हो सकती। हम जिस काम के लिए निकले हैं, उसमें ये सब पहले भी हुआ है और आगे भी होता रहेगा। हम इससे घबराने वाले नहीं। इसी देश में देश के लिए काम करने वालों को आतंकवादी तक कहा गया। हमें तो बस इन्होंने कट्टर बेईमान ही कहा है। हम जिस मिशन को लेकर निकले हैं, वो पूरा करके रहेंगे। सवाल: करप्शन के आरोप की वजह से दिल्ली की सत्ता हाथ से निकल गई। अब आगे की क्या स्ट्रैटजी है?
जवाब: हम लोगों तक जाएंगे, उन्हें बताएंगे कि क्या हुआ। फिर अपने काम पर लगेंगे। बताएंगे कि इस देश को मोदी से बचाना होगा। उनके झूठ और साजिशें सबके पास लेकर जाएंगे। सवाल: पंजाब भी इस वक्त भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा है। वहां चुनाव करीब हैं ऐसे में पंजाब कहीं दिल्ली न बन जाए, इसके लिए क्या कर रहे?
जवाब: ये सब दिल्ली की तरह ही बनाया गया प्रोपेगैंडा है। हमने नशे के खिलाफ अभियान चलाया, अपने किसी व्यक्ति को नहीं बचाया। गिरफ्तारी करवाई, जेल में डलवाया। अब नशे के तस्कर, व्यापारी हरियाणा आ गए हैं। यहां खुलेआम अंधाधुंध नशा बिक रहा है। मैंने अभी एक वीडियो देखा था, जिसमें कैसे एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुझ पर नशा न रोकने का दबाव था। सवाल: आप दिल्ली हारे और इसे छोड़कर पंजाब में बस गए। BJP और जनता ने भगोड़े का टैग लगाया, आखिर क्यों भागे?
जवाब: हम कहीं नहीं भागे। पंजाब में चुनाव होने थे तो मुझे प्रभार सौंपा गया था। मैंने वहां कोई स्थायी घर नहीं लिया। कभी इस जिले तो कभी उस जिले जाता रहता हूं। चुनाव वहां पर हैं, तो वहीं लगना पड़ेगा। सवाल: अरविंद केजरीवाल, सत्येंद्र जैन और AAP के नामीगिरामी नेताओं ने पंजाब में सरकारी बंगले ले लिए, ऐसा क्यों?
जवाब: ये बिल्कुल झूठ है। किसी को कोई बंगला नहीं मिला। ये सब प्रोपेगैंडा है। सवाल: अब अरविंद केजरीवाल के फोकस में दिल्ली होगी या पूरा देश, क्योंकि गुजरात, गोवा, पंजाब में चुनाव हैं, क्या स्ट्रैटजी है?
जवाब: देखिए पूरा देश ही फोकस में है। अरविंद केजरीवाल जी पार्टी के संयोजक हैं, तो पूरे देश में रहेंगे। दिल्ली तो हमारी थी तो यहां से फोकस कभी नहीं हट सकता।
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ये खबर भी पढ़ें… शराब घोटाले से रिहाई, अब क्या करेंगे केजरीवाल दिल्ली में BJP सरकार का एक साल पूरा होने पर आम आदमी पार्टी ने कैंपेन शुरू किया है। इसका नारा है- एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल। एक मार्च को जंतर-मंतर पर पार्टी BJP के खिलाफ रैली करने वाली थी। इससे दो दिन पहले 27 फरवरी को AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को शराब घोटाले से डिस्चार्ज यानी आरोप तय होने से पहले आरोपमुक्त कर दिया गया। पढ़िए पूरी खबर…
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'BJP ने अंग्रेजों से ज्यादा बुरा सुलूक किया':मनीष सिसोदिया बोले, पत्नी से कहा- BJP जॉइन कर लूं, जवाब मिला- मुझे कैसे मुंह दिखाओगे
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