वृंदावन आकर रह रहीं हरियाणा की ज्योति बताती हैं- मायके में मेरे ताऊ के लड़के की शादी थी। अपने बेटे कार्तिक के साथ वहां जाने की तैयारी में लगी थी, लेकिन पति चाहते थे कि न जाऊं। जाने से एक दिन पहले वो रात में मेरे कमरे में आए और मुझे पीटने लगे। इतना मारा कि अधमरा कर दिया। कपड़े फाड़ दिए। गर्दन से पकड़ा और मुंह बेड में लड़ा दिया। मेरा एक दांत टूट गया और होंठ कट गए। खून से सारा कपड़ा भीग गया। वो पीरियड्स में भी मेरे साथ सेक्स करता था। आखिरकार मेरा तलाक हो गया।
बाद में मायके के दबाव में आकर दूसरी शादी की। दूसरा पति भी मुझे दहेज के लिए ताने मारने लगा। वो मेरे साथ अननेचुरल सेक्स करता था। शादी के 9 दिन बाद ही मैंने उसे तलाक दे दिया और वृंदावन में कृष्ण की शरण में आ गई। ये कहते हुए ज्योति रोने लगती हैं।
ब्लैकबोर्ड में इस बार उन महिलाओं की स्याह कहानी, जिन्होंने अच्छी पढ़ाई-लिखाई और नौकरी के बावजूद पतियों, ससुराल वालों और रिश्तेदारों से तंग आकर घर छोड़ दिया और वृंदावन आकर रहने लगीं। यहां ये कृष्ण भक्ति में लगी हैं।
33 साल की ज्योति, हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं। उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की और एक अस्पताल में नौकरी भी, लेकिन अब वृंदावन में आकर एक किराए के मकान में रहती हैं। घर का एक कमरा भगवान कृष्ण को समर्पित कर रखा है। वहां बेड पर कृष्ण व राधा की मूर्ति है और साथ में लड्डू गोपाल विराजमान हैं।
बातचीत शुरू करने से पहले ज्योति गाती हैं, ‘राधे मेरी स्वामिनी, मैं राधे की दास, जनम जनम मोहे दीजिए राधे, वृन्दावन में वास।’
वो बताती हैं 2012 में शादी हुई। मेरे पति मुझसे मर्चेंट नेवी में नौकरी का झूठ बोलकर शादी की। ससुराल पहुंची तो सच पता चला, लेकिन मम्मी-पापा की इज्जत का ख्याल रखते हुए ये रिश्ता मैंने स्वीकार कर लिया। शादी के कुछ महीनों बाद ही पति मुझे ताने मारने लगे। कहते- ‘तुम्हें कुछ नहीं आता, न अच्छा खाना बना पाती हो और न ही घर की साफ-सफाई कर पाती हो।’
मेरा जन्मदिन आया, उस दिन उन्होंने मुझे बधाई तक नहीं दी। एक साल बीता। शादी की सालगिरह आई, तो उस दिन भी मुंह फुलाए रहे। एक चॉकलेट तक लेकर नहीं आए। फिर भी सब नजरअंदाज करती रही, लेकिन जरूरी चीजें तक लाकर कभी नहीं देते। साबुन, तेल, शैम्पू तक मेरी छोटी बहन लाकर देती थी। ससुराल के लोगों को भी इसकी फिक्र नहीं होती। मेरे कपड़े मायके से मम्मी-पापा भिजवाते थे।
जब प्रेग्नेंट हुई, तब भी पति को मेरी कोई परवाह नहीं थी। प्रेग्नेंसी के दौरान एक दिन उनकी बुआ और मैं हंसी-मजाक कर रहे थे। उन्हें पता नहीं क्या हुआ आकर मुझे जोर का थप्पड़ मारा और घर से निकल गए। मैं तो उस दिन सन्न रह गई थी। सोच रही थी आखिर मेरी कोख में उनका बच्चा पल रहा है, लेकिन उन्हें इसका कोई ख्याल नहीं।
उसके बाद जब बेटा पैदा हुआ, तो भी उन्हें न मुझसे और न ही बेटे से कोई लेना-देना रहता। हमेशा घर से बाहर रहते। कोई काम करने को कहूं तो मुझे पीटते थे। एक दिन तंग आकर मायके चली गई। मम्मी-पापा से कहकर नर्सिंग कोर्स में दाखिला ले लिया। एक साल बीतने पर ससुराल वाले मुझे लेने आए, लेकिन वापस जाना नहीं चाहती थी। मेरे पति आए। उन्होंने पगड़ी रखकर कसम खाई कि अब वो मुझे नहीं मारेंगे और पूरा ख्याल करेंगे। फिर भी मेरी हिम्मत न हुई, मैंने मना कर दिया।
उसके बाद पंचायत बैठी। पंचायत में बुजुर्गों ने बहुत दबाव बनाया। आखिरकार अपने बच्चे के भविष्य के लिए ससुराल जाने को तैयार हो गई। पंचायत ने शर्त रखी- अब से न मोबाइल रखूंगी, न किसी से बात करूंगी, बिना पूछे घर से बाहर नहीं जाऊंगी और न ही टीवी देखूंगी। लेकिन कुछ दिन में ही पति की पहले जैसे हरकतें शुरू हो गईं। मम्मी-पापा से भी बात करने पर भी पाबंदी लगा दी। उनसे तभी बात करती जब वो साथ में खड़े रहते, ताकि मैं कोई शिकायत न कर पाऊं। ऐसे लगने लगा जैसे जिंदगी जेल हो गई है।
शुरू में जब आई थी तब घर के बाहर का काम नहीं करती थी। लेकिन अब खेत में काम करने और गोबर उठाने का दबाव डाला गया। मम्मी-पापा की बात रखने के लिए वो भी करने लगी। रोज सुबह 5 बजे गोबर साफ करती, घर की साफ-सफाई और फिर खाना बनाती। तबीयत खराब होने पर दवाई खाकर काम करती। ससुराल के लोग कहते- चाहे ज्योति मर जाए, लेकिन काम नहीं रुकना चाहिए। इन सबके बावजूद पति खुश नहीं रहते। कुछ मांगती तो कहते- ‘मायके से मांग लो। यहां रोटी मिल रही है, वही बहुत है।’
जब मायके से पैसा मंगाती तो वो उसे चुरा लेते और मौज-मस्ती में उड़ाते। पीरियड्स यानी माहवारी में भी मेरे साथ सेक्स करते थे। उन्हें मेरे दर्द से कोई लेना-देना नहीं होता। बस हवस पूरी करते।
इस बीच मेरा बेटा बीमार हुआ। वो उस समय मायके में था। मम्मी-पापा उसे अस्पताल ले गए। मैं भी पहुंची। वहां उसका हाथ पकड़कर रो रही थी, लेकिन पति उसे देखने तक नहीं आए। उन्हें उसकी कोई फिक्र नहीं थी। इतना कहते ही ज्योति फिर से रोने लगती हैं।
‘पति की हरकतों से इतना परेशान हो गई कि एक दिन नींद की 18-20 गोलियां खा ली। मम्मी-पाप अस्पताल लेकर भागे। हालत खराब थी। मुंह से झाग निकल रहा था, लेकिन इलाज के बाद बच गई। उस दिन मम्मी-पापा को लगा गया कि अब मैं बहुत परेशान हो गई हूं। ठीक हुई तो उन्होंने नौकरी कर अपने पैर पर खड़े होने को कहा। उसके बाद गुड़गांव के एक अस्पताल में नर्सिंग की नौकरी शुरू की। उस दौरान ससुराल वालों मुझे कई बार लेने आए, लेकिन नहीं गई। फिर 2016 में मेरा तलाक हो गया।
गुड़गांव में नौकरी करते 4 साल हो गए थे। मम्मी-पापा मेरे भविष्य को लेकर चिंतित थे। वे अक्सर कहते- दूसरी शादी कर लो। एक दिन हम भी नहीं होंगे, तब तुम्हारा क्या होगा, लव मैरिज ही कर लो, लेकिन मेरी दूसरी शादी करने की इच्छा नहीं रह गई थी। उस दौरान कृष्ण भक्ति में मन लगने लगा था। मम्मी-पापा नहीं माने। 2020 में एक लड़के से शादी करा दी।
वहां शुरू के 5 दिन तो ठीक रहे, लेकिन छठे दिन फिर पहले पति वाली कहानी शुरू हो गई है। वो भी मुझे ताने मारने लगे। कहते- शादी में तेरे घर वालों ने कुछ नहीं दिया। तू भी कुछ लेकर नहीं आई। वगैरह-वगैरह। ये बातें जब मम्मी-पापा को बताना चाहती तो मेरा फोन छीन लेते। जिद करने पर मारपीट करने लगे। पांच दिन में ही इतना प्रताड़ित किया कि मन हुआ कि सुसाइड कर लूं। इस दौरान मेरे पति ने अननेचुरल सेक्स के लिए भी मजबूर किया। परेशान होकर पुलिस थाने पहुंची। पति के खिलाफ FIR दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
उस दौरान मोहल्ले की औरतों कह रही थीं- हम तो सास-ससुर, जेठ से मार खा लेते हैं, तू तो पति की मार से ही परेशान हो गई, लेकिन मैं पिटने के लिए नहीं पैदा हुई थी। शादी के 9 दिन बाद ही पति को छोड़ दिया। अपनी ज्वैलरी उठाई और ले जाकर गिरवी रख दिया। जो पैसा मिला उसे लेकर वृंदावन आ गई। अब यहां मन पूरी तरह कृष्ण में लग गया है। कृष्ण ही अब मेरे लिए बेटा, पति, मां-बाप, सब हैं। मैंने कृष्ण जी के नाम का सिंदूर लग लिया है। अब बृजवासी मुझे ज्योति नहीं, इंदुलेखा नाम से जानते हैं। दूसरे पति से तलाक का केस अब भी चल रहा।
















