बड़वानी: महाराणा प्रताप प्रतिमा स्थल पर सौंदर्यीकरण कार्य की गुणवत्ता को लेकर विवाद, नेता प्रतिपक्ष ने लगाया महापुरुषों के अपमान का आरोप

बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थल पर नगर पालिका द्वारा कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। शहर के मोटी माता मंदिर के ठीक सामने स्थित इस प्रतिमा स्थल पर करीब तीन महीने पहले उक्त कार्य पूरा किया गया था, लेकिन अब काम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष और राजपूत समाज से जुड़े राकेश सिंह जाधव ने इस निर्माण कार्य को घटिया करार देते हुए सीधे तौर पर आरोप लगाए हैं कि यह महापुरुषों का अपमान है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर इस मामले में षड्यंत्र रच रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़वानी शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार मोटी माता मंदिर के सामने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित है। इस स्थल को और अधिक सुंदर तथा आकर्षक बनाने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद द्वारा लगभग तीन महीने पूर्व सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू कराया गया था। यह कार्य हाल ही में पूरा हुआ है, लेकिन इसके पूर्ण होने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर इसे लेकर असंतोष की आवाजें उठने लगी थीं। अब यह मामला खुले तौर पर राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे राकेश सिंह जाधव ने प्रतिमा स्थल का निरीक्षण किया और वहां किए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। राजपूत समाज से ताल्लुक रखने वाले जाधव ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धा और ऐतिहासिक महापुरुष के प्रतिमा स्थल पर जिस प्रकार का काम कराया गया है, वह अत्यंत घटिया स्तर का है। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों की स्मृति स्थलों पर इस तरह का निम्न स्तरीय निर्माण कार्य कराया जाना उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ है और यह सीधे तौर पर महापुरुषों का अपमान करने जैसा कृत्य है।
राकेश सिंह जाधव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसों से नगर पालिका जो भी विकास या सौंदर्यीकरण का कार्य कराती है, उसमें पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता होना अनिवार्य है। विशेषकर जब मामला किसी ऐतिहासिक महापुरुष की प्रतिमा से जुड़ा हो, तो और भी अधिक सावधानी बरती जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि तीन महीने का समय लगने के बावजूद काम की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए।
दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों का कड़ा विरोध किया है। नपा अध्यक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सौंदर्यीकरण का कार्य नियमानुसार और मानकों के अनुरूप ही कराया गया है। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए स्पष्ट किया कि कुछ लोग जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं और इसके पीछे एक सोचा-समझा षड्यंत्र है। नपा अध्यक्ष का कहना है कि विकास कार्यों में बाधा डालने और जनता को भ्रमित करने के लिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि नगर पालिका द्वारा कराए गए सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है।
यह विवाद केवल प्रशासनिक या राजनीतिक स्तर तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें राजपूत समाज की भावनाएं भी जुड़ गई हैं। चूंकि राकेश सिंह जाधव स्वयं राजपूत समाज से आते हैं और महाराणा प्रताप राजपूत समाज के सबसे पूजनीय और सम्मानित ऐतिहासिक नायकों में से एक हैं, इसलिए इस मुद्दे ने सामाजिक संगठनों का भी ध्यान आकर्षित किया है। समाज के कई लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक महापुरुषों के स्मारकों और प्रतिमा स्थलों के रखरखाव तथा निर्माण में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
बड़वानी शहर में मोटी माता मंदिर का क्षेत्र हमेशा से आस्था और जन-आवागमन का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में मंदिर के ठीक सामने स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थल का सौंदर्यीकरण शहर की छवि और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही थी। लेकिन अब गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने इस परियोजना की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
फिलहाल, नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष और नपा अध्यक्ष के बीच चल रही इस बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर से यह विवाद और गर्मा गया है। देखना यह होगा कि इस मामले में जिला प्रशासन या संबंधित उच्च अधिकारी कोई संज्ञान लेते हैं या नहीं, और क्या प्रतिमा स्थल पर कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य की स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी जांच कराई जाती है। जब तक इस विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक बड़वानी की स्थानीय राजनीति और सामाजिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहेगा।

