Wed, 07 Oct 20262:03 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 2:03 PM IST
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बठिंडा: फर्जी कॉल सेंटर के जरिए नौकरी का झांसा देकर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहे थे आरोपी, युवतियां करती थीं कॉलिंग; किराए के बैंक खातों और सिम कार्ड का होता था इस्तेमाल

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बठिंडा। पंजाब के बठिंडा जिले में पुलिस ने नौकरी का झांसा देकर युवाओं से रकम वसूलने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह मामला सामान्य ठगी का नहीं, बल्कि एक बेहद सुनियोजित और व्यवस्थित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा पाया गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने ठगी की रकम मंगवाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग बैंक खातों तथा कई सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था। इस पूरे फर्जीवाड़े में युवतियों को कॉलिंग का काम सौंपा गया था, ताकि पीड़ितों को आसानी से झांसे में लिया जा सके। बठिंडा पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई ने नौकरी तलाश रहे युवाओं को निशाना बनाने वाले ऐसे गिरोहों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने का लालच देकर उनसे विभिन्न मदों में पैसे ऐंठता था। आरोपी सिर्फ फर्जी वेबसाइट और फोन कॉल के सहारे ही ठगी नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने अपने पूरे नेटवर्क को इस तरह से डिजाइन किया था कि पीड़ितों से वसूली गई रकम का लेन-देन सुरक्षित तरीके से हो सके और उनकी असली पहचान किसी भी हालत में सामने न आ सके। इसके लिए गिरोह के सदस्यों ने तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। फर्जी कॉल सेंटर से लगातार युवाओं को कॉल किए जाते थे और उन्हें प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया जाता था।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि गिरोह ने कॉलिंग के काम के लिए युवतियों को शामिल किया था। जांच में पता चला है कि युवतियां ही फोन कॉल करके पीड़ितों से बातचीत करती थीं और उन्हें नौकरी का झांसा देती थीं। माना जा रहा है कि युवतियों की आवाज सुनकर पीड़ित युवा जल्दी भरोसे में आ जाते थे और बिना पूरी जांच-पड़ताल किए ठगों की बातों में फंस जाते थे। यह तरीका गिरोह की कार्यप्रणाली का एक अहम हिस्सा था, जिसका उपयोग वे लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए करते थे।

ठगी की रकम को सुरक्षित रखने और उसके लेन-देन को ट्रैक होने से बचाने के लिए आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, ये बैंक खाते कमीशन के आधार पर लिए जाते थे। यानी गिरोह कुछ स्थानीय या बाहरी लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर खुले बैंक खातों का उपयोग अपनी अवैध गतिविधियों के लिए करता था। जब कोई पीड़ित नौकरी के नाम पर पैसा जमा करता था, तो वह सीधे इन किराए के खातों में ट्रांसफर हो जाता था। इससे ठगी का पैसा कई अलग-अलग खातों में बंट जाता था और उसे ट्रैस करना कठिन हो जाता था।

इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि जब भी किसी बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन की वजह से वह खाता फ्रीज हो जाता था, तो आरोपी तुरंत अपना रास्ता बदल लेते थे। खाता फ्रीज होते ही वे उस खाते का इस्तेमाल बंद कर देते थे और ठगी की रकम मंगवाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के नए बैंक खाते का उपयोग शुरू कर देते थे। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती थी, जिससे पुलिस और बैंकिंग सिस्टम के लिए उनके लेन-देन को रोकना या पकड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। खातों के इस तेजी से बदलाव ने साबित किया कि गिरोह पूरी तरह से सक्रिय और संगठित था।

बैंक खातों के अलावा, अपनी पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखने के लिए गिरोह ने कई सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। कॉलिंग के लिए जिन नंबरों का उपयोग किया जाता था, वे सभी अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए सिम कार्ड थे। एक बार जब कोई नंबर संदिग्ध पाया जाता या उसकी शिकायत मिलती, तो आरोपी उसे तुरंत बंद करके दूसरे सिम कार्ड का इस्तेमाल करने लगते थे। फर्जी वेबसाइट और इन अनगिनत सिम कार्ड के सहारे यह गिरोह अपना जाल पूरे देश में फैलाए हुए था।

बठिंडा पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे गिरोह बेरोजगारी का फायदा उठाकर मासूम युवाओं की मेहनत की कमाई को लूट रहे हैं। जांच एजेंसियां अब उन सभी लोगों की तलाश में जुटी हैं जिन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और सिम कार्ड इस गिरोह को उपलब्ध कराए थे। किराए के खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

पुलिस ने आम जनता और विशेषकर नौकरी तलाश रहे युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या फर्जी वेबसाइट के जरिए मिलने वाले नौकरी के प्रस्तावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की नौकरी के लिए पहले पैसे मांगना ठगी का सबसे बड़ा संकेत होता है। यदि किसी के साथ ऐसा कोई धोखाधड़ी का प्रयास होता है, तो उसे तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। बठिंडा पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे अन्य गिरोहों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है।