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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:45 PM IST
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बुरहानपुर: स्वामित्व योजना में पटवारियों ने रजिस्ट्री कार्य से किया इनकार, संघ जिलाध्यक्ष ने न्यायिक सुरक्षा की उठाई मांग

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बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पटवारी संघ ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष तोमर ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि जब तक पटवारियों को न्यायिक सुरक्षा नहीं मिलती और उन्हें कानूनी पचड़ों से बचाने का कोई ठोस प्रावधान नहीं किया जाता, तब तक वे इस योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री का कार्य नहीं करेंगे। यह फैसला पटवारियों को भविष्य में उत्पन्न हो सकने वाली कानूनी समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।

स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घरों और संपत्तियों का वैध स्वामित्व अधिकार प्रदान करना है। इस योजना के तहत गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी माध्यमों से आबादी क्षेत्रों का सीमांकन किया जाता है और पात्र लाभार्थियों को संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड) दिए जाते हैं। इसके बाद इन संपत्तियों की रजिस्ट्री का कार्य भी प्रस्तावित होता है, ताकि ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त हो सके और वे बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण आदि सुविधाएं ले सकें।

हालांकि, इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा राजस्व विभाग के सबसे निचले स्तर के अधिकारी यानी पटवारियों पर निर्भर करता है। पटवारी संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का कार्य बेहद संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि और संपत्तियों को लेकर अक्सर आपसी विवाद, परिवारिक झगड़े और दावे-आपत्तियां सामने आती हैं। ऐसे में यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री में कोई त्रुटि रह जाती है या भविष्य में उस संपत्ति को लेकर कोई कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर पटवारी पर आ जाती है।

संघ के जिलाध्यक्ष तोमर ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पटवारियों को इस कार्य से इसलिए नहीं रोका जा रहा है क्योंकि वे काम नहीं करना चाहते, बल्कि इसलिए क्योंकि वर्तमान कानूनी व्यवस्था में उन्हें कोई न्यायिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि कई बार देखा गया है कि रजिस्ट्री के दौरान हुई किसी छोटी सी चूक या दस्तावेजी त्रुटि के कारण पटवारियों को भारी कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ता है। उन पर मुकदमे दर्ज होते हैं और उन्हें मानसिक तथा व्यावसायिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बिना किसी कानूनी सुरक्षा कवच के रजिस्ट्री जैसे गंभीर कार्य को अंजाम देना पटवारियों के लिए जोखिम भरा है।

तोमर ने आगे कहा कि पटवारी संघ ने यह निर्णय बहुत सोच-समझकर और संगठन के सदस्यों से विचार-विमर्श करने के बाद लिया है। संघ की प्रमुख मांग है कि राज्य सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का कार्य करने वाले पटवारियों के लिए विशेष न्यायिक सुरक्षा का प्रावधान करें। यदि किसी पटवारी ने नियमानुसार अपना कार्य किया है और उसके बावजूद कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई से बचाने का स्पष्ट दिशा-निर्देश होना चाहिए। जब तक ऐसा कोई सुरक्षा कवच नहीं दिया जाता, तब तक बुरहानपुर जिले के पटवारी इस योजना के तहत रजिस्ट्री के कार्य से दूर रहेंगे।

इस मामले में पटवारी संघ का रुख स्पष्ट है कि वे कानून में फंसने का जोखिम नहीं उठा सकते। राजस्व विभाग के कर्मचारियों के अनुसार, पटवारी पहले से ही भू-अभिलेखों के रखरखाव, फसल सर्वेक्षण, राहत वितरण और अन्य कई प्रकार के सरकारी कार्यों का बोझ उठाते हैं। स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री का अतिरिक्त और जोखिमपूर्ण कार्य बिना किसी कानूनी सुरक्षा के उन पर लादना उचित नहीं है। संघ ने प्रशासन से अपील की है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और पटवारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए उचित नीतिगत बदलाव किए जाएं।

बुरहानपुर जिले में पटवारी संघ के इस फैसले से स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन पर असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। यदि पटवारी रजिस्ट्री का कार्य नहीं करते हैं, तो योजना के तहत लाभार्थियों को संपत्ति कार्ड के आधार पर रजिस्ट्री मिलने में देरी हो सकती है। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त करने में समय लगेगा। हालांकि, संघ ने यह स्पष्ट किया है कि उनका विरोध योजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे केवल अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि स्वामित्व योजना को लेकर देश भर के कई हिस्सों में राजस्व कर्मचारियों द्वारा इसी तरह की चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। पटवारी संघ ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि वे इस विषय पर जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान निकालें, ताकि पटवारी बिना किसी भय के अपना कार्य कर सकें और जनता को भी योजना का लाभ समय पर मिल सके। फिलहाल, बुरहानपुर में पटवारियों के इस फैसले के बाद प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।