छठ महापर्व पर दिल्ली-पटना फ्लाइट टिकट 25 हजार तक पहुंचा, रेलवे में सीट न मिलने से हवाई किराया तीन गुना महंगा

नई दिल्ली/पटना। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का महापर्व छठ पूजा इस वर्ष 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। इस पर्व के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख महानगरों में कार्यरत लोग त्योहार मनाने अपने गृह राज्य जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने टिकट उपलब्धता और बढ़ते किराये की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। भारतीय रेलवे में टिकटों की उपलब्धता अत्यंत सीमित होने के कारण यात्री वायु मार्ग की ओर रुख करने को विवश हैं, जिसके परिणामस्वरूप हवाई किराये में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, छठ पूजा के दौरान दिल्ली से पटना के बीच हवाई यात्रा का टिकट मूल्य सामान्य दिनों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हो गया है। वर्तमान स्थिति में इस रूट पर एक तरफ के किराये की कीमत 25,000 रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति में भारी असंतुलन के कारण हुई है। रेलवे में तत्काल और सामान्य कोटे की सीटें पहले ही भर चुकी हैं, जिससे उन यात्रियों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है जो निर्धारित तिथियों में ही यात्रा करना चाहते हैं। एयरलाइन कंपनियों ने इस उच्च मांग को देखते हुए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल के तहत किराये बढ़ाए हैं, जिसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है।
दिल्ली-पटना रूट के अलावा अन्य प्रमुख मार्गों पर भी किराये में समान तेजी देखी जा रही है। मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई से पटना तथा बिहार के अन्य हवाई अड्डों जैसे गया और दरभंगा के लिए भी टिकटों की मांग बहुत अधिक है। इन सभी रूटों पर फेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और यात्रियों को बुकिंग के समय वास्तविक कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। स्रोत सामग्री में स्पष्ट किया गया है कि किस रूट पर क्या फेयर है, यह जानना यात्रियों के लिए आवश्यक है ताकि वे अपनी यात्रा योजना बना सकें। हालांकि, कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे बुकिंग से पहले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर मौजूदा दरों की पुष्टि करें।
यात्रा संबंधी इस संकट का मुख्य कारण रेलवे में क्षमता से अधिक मांग है। छठ पूजा बिहार का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है और इसके लिए प्रवासियों का पलायन बड़े पैमाने पर होता है। रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनें चलाने और अतिरिक्त कोच लगाने के बावजूद, टिकटों की कमी बनी हुई है। जब रेल मार्ग पूरी तरह से संतृप्त हो जाता है, तो मांग स्वाभाविक रूप से हवाई क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो जाती है। चूंकि हवाई सेवाओं की सीटें सीमित होती हैं और विमानों की संख्या में अचानक वृद्धि करना तकनीकी और नियामक बाधाओं के कारण संभव नहीं होता, इसलिए सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और किराये आसमान छूने लगते हैं।
इस वर्ष 13 से 16 नवंबर तक छठ पूजा की तिथियां निर्धारित हैं, जिससे यात्रा की खिड़की बहुत छोटी हो गई है। अधिकांश यात्री नहाय-खाय और खरना के दिन से पहले ही घर पहुंचना चाहते हैं, जिससे 11 और 12 नवंबर को यात्रा का शिखर दिवस बन जाता है। इसी प्रकार, पूजा समाप्ति के बाद वापसी की यात्रा 17 और 18 नवंबर को केंद्रित होगी। इन विशिष्ट तिथियों पर मांग केंद्रित होने से एयरलाइंस के पास किराया बढ़ाने का अवसर बनता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यदि संभव हो तो वे अपनी यात्रा तिथियों में थोड़ा लचीलापन रखें, क्योंकि शिखर दिनों से एक-दो दिन पहले या बाद में यात्रा करने पर किराये में कुछ राहत मिल सकती है।
वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि छठ पूजा के दौरान घर जाने की इच्छा रखने वाले प्रवासियों के लिए यह यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक व्ययसाध्य हो गई है। 25,000 रुपये तक का टिकट मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा बोझ है। फिर भी, त्योहार की अनिवार्यता और सांस्कृतिक महत्व के कारण लोग उच्च किराया वहन करने को तैयार दिखाई दे रहे हैं। यात्रियों को सतर्क रहने और आधिकारिक स्रोतों से ही टिकट बुक करने की आवश्यकता है, क्योंकि उच्च मांग के दौरान धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ सकते हैं। साथ ही, एयरपोर्ट पर भीड़भाड़ और सुरक्षा जांच में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए यात्रियों को निर्धारित समय से काफी पहले हवाई अड्डे पहुंचने की सलाह दी जाती है ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

