छतरपुर: जिला अधिवक्ता संघ ने दो वकीलों को किया निष्कासित, एक पर दुष्कर्म का आरोप तो दूसरी पर लिव-इन एग्रीमेंट नोटरी करने पर कार्रवाई

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जिला अधिवक्ता संघ ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए दो अधिवक्ताओं को जिला न्यायालय से निष्कासित कर दिया है। संघ द्वारा यह कदम दोनों वकीलों पर लगे गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है। निष्कासित किए गए अधिवक्ताओं में वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज सिद्दीकी और अधिवक्ता शकुंतला अहिरवार शामिल हैं। इनमें से एक अधिवक्ता पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने की बात सामने आई है, जिसके आधार पर संघ ने यह निर्णय लिया है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिला अधिवक्ता संघ ने आधिकारिक तौर पर इस कार्रवाई की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि दोनों ही अधिवक्ताओं को अब जिला न्यायालय छतरपुर की कार्यवाही और परिसर से बाहर रखा जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज सिद्दीकी के खिलाफ यह कार्रवाई उनके ऊपर लगे बेहद गंभीर आरोपों के मद्देनजर की गई है। सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इम्तियाज सिद्दीकी पर दुष्कर्म का मामला सामने आया है। यह मामला उनकी जूनियर अधिवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित बताया जा रहा है। एक जूनियर द्वारा अपने ही सीनियर वकील पर इस तरह के संगीन आरोप लगाना कानूनी पेशे और बार एसोसिएशन के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अधिवक्ता संघ ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए जांच और विचार-विमर्श के बाद इम्तियाज सिद्दीकी को संघ की सदस्यता और न्यायालय परिसर से निष्कासित करने का फैसला सुनाया है। संघ का मानना है कि ऐसे आरोपों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि समूचे वकील समाज और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचती है, इसलिए ऐसी स्थिति में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अपरिहार्य थी।
इसके अलावा, दूसरी कार्रवाई अधिवक्ता शकुंतला अहिरवार के खिलाफ की गई है। शकुंतला अहिरवार को जिला न्यायालय से निष्कासित करने का कारण उनका एक विवादास्पद कदम बताया गया है। जानकारी के अनुसार, शकुंतला अहिरवार पर लिव-इन एग्रीमेंट (सहजीवन समझौता) को नोटरी करने का आरोप है। भारतीय समाज और विशेषकर मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लिव-इन रिलेशनशिप और उससे जुड़े कानूनी दस्तावेजों को लेकर हमेशा से संवेदनशीलता रही है। हालांकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कुछ कानूनी मान्यताएं दी हैं, लेकिन इसके समझौते को नोटरी करने का मामला जब स्थानीय अधिवक्ता संघ के संज्ञान में आया, तो इसे पेशेवर आचरण और सामाजिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए कार्रवाई की गई। संघ ने इस मामले में भी बिना किसी देरी के शकुंतला अहिरवार को न्यायालय परिसर से निष्कासित करने का निर्णय लिया, ताकि अधिवक्ताओं की मर्यादा और पेशे की शुचिता बनी रहे।
मंगलवार को बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी और दोनों निष्कासन के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया। संघ ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता समाज कानून का पालन करने वाला और समाज को न्याय दिलाने वाला वर्ग है। यदि इसी वर्ग के सदस्यों पर दुष्कर्म जैसे आपराधिक आरोप लगें या वे ऐसे दस्तावेजों का नोटरीकरण करें जो पेशेवर नैतिकता और स्थानीय संवेदनाओं के विरुद्ध हों, तो संघ चुप नहीं बैठ सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी रेखांकित किया गया कि यह कार्रवाई संघ के नियमों और अधिवक्ताओं के आचरण संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत की गई है।
छतरपुर जिला न्यायालय में इस कार्रवाई की खबर फैलते ही वकीलों और अन्य लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया है। आमतौर पर बार एसोसिएशन अपने सदस्यों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई तभी करती है, जब आरोप बहुत गंभीर हों और पेशे की छवि को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा हो। इम्तियाज सिद्दीकी पर जूनियर द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों ने जहां पूरे बार को स्तब्ध कर दिया है, वहीं शकुंतला अहिरवार द्वारा लिव-इन एग्रीमेंट नोटरी करने का मामला भी अधिवक्ताओं के कर्तव्यों और सीमाओं पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिला अधिवक्ता संघ द्वारा किया गया यह निष्कासन मुख्य रूप से न्यायालय परिसर और संघ की गतिविधियों तक सीमित है। कानूनी प्रक्रियाओं और पुलिस जांच का अपना अलग दायरा होता है। दुष्कर्म के मामले में कानूनी कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रणाली के अनुसार आगे बढ़ेगी, जबकि लिव-इन एग्रीमेंट नोटरी करने के मामले में भी यदि कोई कानूनी प्रावधान लागू होता है, तो वह अलग से देखा जाएगा। फिलहाल, जिला अधिवक्ता संघ छतरपुर ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अपने सदस्यों के आचरण और पेशेवर नैतिकता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया जाएगा।

