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Tue, Oct 6, 2026Updated 12:39 PM IST
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चंबल नदी से 8 किलोमीटर दूर सलामपुर गांव में पहुंचा मगरमच्छ, ग्रामीणों ने रस्सी से बांधा बिजली के खंभे से; वन विभाग ने रेस्क्यू से किया इनकार

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वंदे भारत न्यूज़, भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में चंबल नदी से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में मगरमच्छ के पहुंच जाने से हड़कंप मच गया। यह घटना भिंड जिले के सलामपुर गांव की बताई जा रही है, जहां अचानक एक विशालकाय मगरमच्छ के प्रवेश से ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा हो गया। हालांकि, गांव वालों ने सूझबूझ और एकजुटता का परिचय देते हुए काफी मशक्कत के बाद इस खतरनाक जीव को काबू कर लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मगरमच्छ को रस्सी की मदद से गांव के ही एक बिजली के खंभे से बांध दिया, ताकि वह किसी भी व्यक्ति या पशु को कोई नुकसान न पहुंचा सके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मगरमच्छ चंबल नदी से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सलामपुर गांव तक कैसे पहुंचा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है। चंबल नदी अपने मगरमच्छों और अन्य जलीय जीवों के लिए जानी जाती है, लेकिन इतनी लंबी दूरी तय करके किसी मगरमच्छ का सीधे आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश करना ग्रामीणों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। जैसे ही ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में मगरमच्छ होने की भनक लगी, पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित दूरी बनाकर मगरमच्छ पर नजर रखने लगे।

ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए एकजुट होकर मगरमच्छ को घेर लिया। यह काम बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि मगरमच्छ कभी भी हमलावर हो सकता था। लेकिन गांव वालों ने हिम्मत नहीं हारी और रस्सियों तथा अन्य उपकरणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद उसे काबू करने में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने मगरमच्छ को रस्सी से कसकर बांधा और उसे गांव के एक बिजली के खंभे से टिका दिया। ग्रामीणों की इस पहल ने जहां एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मगरमच्छ को काबू में करने के तुरंत बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग को दी। उम्मीद थी कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू करेगी और उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी में छोड़ आएगी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को सूचित करने के बावजूद तत्काल कोई रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। इतना ही नहीं, मौके पर पहुंचे स्थानीय फॉरेस्ट अधिकारी ने भी मगरमच्छ के रेस्क्यू से सीधे तौर पर इनकार कर दिया। अधिकारी द्वारा रेस्क्यू से इनकार किए जाने के पीछे क्या कारण था, इसकी पुष्टि तो नहीं हो सकी है, लेकिन माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर मगरमच्छ जैसे खतरनाक जीव को संभालने के लिए आवश्यक उपकरण या प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी हो सकती है।

वन विभाग के अधिकारी द्वारा रेस्क्यू करने से मना किए जाने के बाद अब यह जिम्मेदारी मुरैना से आने वाले विशेष रेस्क्यू दल पर आ गई है। बताया जा रहा है कि सलामपुर गांव में फंसे इस मगरमच्छ को सुरक्षित निकालने के लिए मुरैना से एक प्रशिक्षित रेस्क्यू दल को बुलाया गया है। यह दल कब तक गांव पहुंचेगा और मगरमच्छ को कब तक सुरक्षित रूप से चंबल नदी में वापस छोड़ा जाएगा, इस बारे में अभी कोई निश्चित समय सीमा सामने नहीं आई है। जब तक रेस्क्यू दल नहीं पहुंचता, तब तक मगरमच्छ उसी बिजली के खंभे से बंधा रहेगा और ग्रामीणों को सतर्क रहना होगा।

इस घटना ने एक बार फिर चंबल नदी के आसपास बसे गांवों में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश की समस्या को उजागर किया है। चंबल नदी के किनारे बसे कई गांवों में समय-समय पर मगरमच्छ या अन्य वन्यजीवों के भटक कर आ जाने की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की तत्परता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते रेस्क्यू नहीं किया जाता है, तो न केवल वन्यजीव को नुकसान हो सकता है, बल्कि ग्रामीणों की जान को भी खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने अपनी जान पर खेलकर जिस प्रकार से मगरमच्छ को काबू किया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है, लेकिन साथ ही वन विभाग की देरी और अधिकारी द्वारा रेस्क्यू से इनकार किए जाने पर लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वन विभाग को सबसे पहले सक्रिय होना चाहिए था। फिलहाल, पूरे गांव की नजरें अब मुरैना से आने वाले रेस्क्यू दल पर टिकी हुई हैं। जब तक मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से यहां से नहीं ले जाया जाता, तब तक सलामपुर गांव के लोगों में डर का माहौल बना रहेगा। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और रेस्क्यू दल के पहुंचने के बाद की अपडेट्स प्रदान करेगा।