CM मोहन यादव ने बुंदेली समागम में कहा- लाड़ली बहना योजना बहुत महंगी पड़ गई, मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ेगी क्या पता था

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की प्रमुख कल्याणकारी योजना ‘लाड़ली बहना’ को लेकर एक बड़ा और चर्चित बयान दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यह योजना सरकार पर आर्थिक रूप से काफी भारी पड़ी है। मुख्यमंत्री ने यह बात राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित एक विशिष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बुंदेली समागम’ के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। उनका यह बयान राज्य की वित्तीय स्थिति और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौतियों की ओर सीधा इशारा माना जा रहा है।
रवीन्द्र भवन में आयोजित इस भव्य ‘बुंदेली समागम’ कार्यक्रम का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं, परंपराओं और भाषा को एक बड़े मंच पर प्रस्तुत करना और उसे बढ़ावा देना था। इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उनके साथ बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा के जाने-माने फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी भी मंच पर उपस्थित रहे। मुकेश तिवारी स्वयं बुंदेलखंड क्षेत्र से गहरा लगाव रखते हैं और वे अक्सर अपनी जड़ों और संस्कृति को लेकर मुखर रहते हैं। दोनों ही हस्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा और महत्व को कई गुना बढ़ा दिया।
इस समागम की सबसे खास बात यह रही कि बुंदेली संस्कृति और भाषा को डिजिटल माध्यम से लोकप्रिय बनाने वाले बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स (प्रभावशाली व्यक्तियों) ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। आज के समय में जब सोशल मीडिया किसी भी संस्कृति या भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है, ऐसे में इन इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी ने कार्यक्रम को युवाओं और आम जनता से सीधे जोड़ने का काम किया। ये सभी क्रिएटर्स अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर बुंदेली बोली, वहां के लोक गीतों, खान-पान और जीवनशैली को निरंतर प्रचारित करते रहे हैं। सरकार द्वारा ऐसे डिजिटल क्रिएटर्स को एक मंच पर सम्मानित करना और उनसे जुड़ना इस बात का संकेत है कि प्रदेश सरकार पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और नए माध्यमों का भरपूर उपयोग करने की दिशा में सक्रिय है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन के दौरान जिस ‘लाड़ली बहना’ योजना का जिक्र किया, वह मध्य प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चित महिला केंद्रित योजनाओं में से एक है। इस योजना की शुरुआत पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रदेश की महिलाओं को हर महीने सीधे उनके बैंक खातों में आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। चुनावी वादों और बाद में इसे लागू करने के बाद यह योजना लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन का जरिया बन गई। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं को सीधी आर्थिक मदद पहुंचाने से राज्य के राजकोष पर निश्चित तौर पर एक बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है। मुख्यमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने की प्रतिबद्धता और राज्य के वित्तीय अनुशासन के बीच एक व्यावहारिक संतुलन बनाने के प्रयासों में जुटी हुई है।
कार्यक्रम में बुंदेलखंड के विकास और सांस्कृतिक गौरव पर भी जोर दिया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पिछड़ापन, सूखे और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझता रहा है। बीते कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, सिंचाई परियोजनाओं और औद्योगिक निवेश के माध्यम से इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने के ठोस प्रयास किए हैं। ‘बुंदेली समागम’ जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ये उस क्षेत्र के लोगों में आत्मविश्वास, अस्मिता और गर्व की भावना को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त माध्यम होते हैं। मुख्यमंत्री की इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत उपस्थिति ने बुंदेलखंड वासियों को यह संदेश दिया कि राज्य सरकार उनके सांस्कृतिक अधिकारों और क्षेत्रीय विकास को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।
फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी की इस समागम में भागीदारी ने कला और संस्कृति के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया। सिनेमा जगत से जुड़ी हस्तियों का इस प्रकार के क्षेत्रीय आयोजनों में शामिल होना स्थानीय कलाकारों और संस्कृति कर्मियों के लिए हमेशा से एक बड़ा प्रेरणा स्रोत होता है। माना जा रहा है कि इस मंच से बुंदेली कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित यह ‘बुंदेली समागम’ सांस्कृतिक उत्सव के साथ-साथ प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं का भी एक अहम केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लाड़ली बहना योजना की आर्थिक चुनौतियों पर दिया गया यह खुला बयान अब प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बड़ी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि बुंदेली संस्कृति अब केवल गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी अपनी मजबूत और प्रभावी जगह बना चुकी है।

