Deepak Tijori Questions CBFC Decisions

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32 मिनट पहले

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फिल्म धुरंधर 2 की सेंसरशिप पर एक्टर-डायरेक्टर दीपक तिजोरी ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

गुरुवार को इंस्टाग्राम पोस्ट में दीपक तिजोरी ने लिखा कि वह CBFC की सोच समझ नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि फिल्म में कुछ गालियां आधी म्यूट हैं, जबकि कुछ पूरी तरह रहने दी गई हैं। उनके मुताबिक, एक जैसे डायलॉग्स के साथ अलग-अलग ट्रीटमेंट समझ से परे है।

तिजोरी ने पूछा कि 18+ सर्टिफिकेट मिलने के बाद, जब फिल्म केवल एडल्ट्स के लिए है, तो हाफ सेंसरशिप का क्या मतलब है। उन्होंने कहा, “आधे शब्द से किसकी सेफ्टी हो रही है?”

दीपक तिजोरी की इंस्टाग्राम पोस्ट।

दीपक तिजोरी की इंस्टाग्राम पोस्ट।

अपने पोस्ट में उन्होंने OTT रिलीज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यही फिल्म बाद में OTT पर बिना कट या म्यूट के आती है, जहां बच्चे भी इसे देख सकते हैं। ऐसे में थिएटर सेंसरशिप का लॉजिक सवालों में आता है।

अंत में तिजोरी ने लिखा कि वह समझना चाहते हैं कि एडल्ट्स के लिए बनी फिल्म में थिएटर में हाफ म्यूट का क्या मतलब है, जब वही कंटेंट घरों में पूरा सुनाई देता है। उन्होंने इशारा किया कि शायद हम गलत चीजों पर जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं।

दीपक तिजोरी ने ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘खिलाड़ी’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसी फिल्मों में काम किया है।

दीपक तिजोरी ने ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘खिलाड़ी’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसी फिल्मों में काम किया है।

फिल्म के लिए सेंसर बोर्ड ने 21 बदलाव सुझाए थे

‘वैरायटी इंडिया’ के मुताबिक, धुरंधर 2 को रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड के कई कट्स से गुजरना पड़ा। कुल 21 बदलाव सुझाए गए, जिनमें वायलेंट सीन्स जैसे आंख निकालने, सिर काटने और इंटेंस अटैक वाले सीन कम किए गए।

इसके अलावा माइक्रो-चेंजेज भी हुए, जैसे सबटाइटल में नोटबंदी की तारीख सही करना और एक जगह ‘लाहौर’ की जगह ‘दिल्ली’ लिखना। फिल्म को भारत में ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है और इसकी अवधि करीब 3 घंटे 49 मिनट है। कट्स के बाद इंडियन वर्जन ओवरसीज वर्जन से लगभग 6 मिनट छोटा हो गया।

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