Mon, 05 Oct 202611:29 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 11:29 PM IST
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दमोह: चुनावी रंजिश में जंगल से लौट रहे युवक के सिर पर कुल्हाड़ी से हमला, परिजनों ने लगाया गोली चलाने और हत्या के प्रयास का आरोप

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मध्य प्रदेश के दमोह जिले में चुनावी रंजिश को लेकर हुई हिंसा की एक गंभीर घटना सामने आई है। जमुनिया गांव के निकट जंगल से भैंस लेकर लौट रहे 32 वर्षीय युवक गोलू यादव पर अज्ञात हमलावरों ने पीछे से घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने युवक के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है और पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण को पूर्व चुनावी प्रतिस्पर्धा से जुड़ी रंजिश का परिणाम बताया है। परिजनों का आरोप है कि हमलावरों ने न केवल धारदार हथियार से हमला किया, बल्कि फायरिंग भी की गई और यह हमला सुनियोजित तरीके से हत्या करने के इरादे से किया गया था।

घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस और स्थानीय सूत्रों ने बताया कि गोलू यादव अपनी दिनचर्या के अनुसार जंगल से भैंस चराकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान 10 से 15 लोगों की एक भीड़ ने उसे रास्ते में रोका और बिना किसी पूर्व चेतावनी के पीछे से उस पर टूट पड़ी। हमला इतना अचानक और तीव्र था कि युवक को आत्मरक्षा का कोई अवसर नहीं मिल सका। भीड़ में शामिल व्यक्तियों ने उसके सिर पर कुल्हाड़ी से सीधा वार किया, जिससे उसे गहरी चोटें आईं और वह मौके पर ही लहुलुहान होकर गिर पड़ा। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि ग्रामीणों और परिजनों ने घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए दमोह जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों द्वारा उसका उपचार जारी है।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं। गोलू यादव के परिजनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह हमला किसी मामूली विवाद या लूटपाट की घटना नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे चुनावी रंजिश से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि हमलावरों में शामिल कुछ लोग पहले भी चुनावी प्रतिस्पर्धा के दौरान उनके परिवार के प्रति दुश्मनी रखते थे और अब उन्होंने इस दुश्मनी को खून-खराबे तक पहुंचा दिया है। परिजनों ने पुलिस को दिए अपने बयान में यह भी आरोप लगाया है कि हमले के दौरान आरोपियों ने गोली भी चलाई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी मंशा केवल डराने या चोट पहुंचाने की नहीं, बल्कि गोलू यादव की हत्या करने की थी। हालांकि, गोली चलने की पुष्टि और फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलना अभी पुलिस जांच का विषय है, लेकिन परिजनों का यह आरोप मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक-सामाजिक पृष्ठभूमि की ओर इशारा करता है।

दमोह पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अज्ञात हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और पीड़ित तथा उसके परिजनों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। चुनावी रंजिश के आरोपों को देखते हुए पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हालिया या पिछले किसी स्थानीय निकाय या पंचायत चुनावों में दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद हुआ था। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या हमलावरों में शामिल कोई व्यक्ति पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड वाला है या किसी अन्य मामले में वांछित है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और कानून व्यवस्था को हाथ में न लें, क्योंकि दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में चुनावी रंजिश और ग्रामीण अपराध के बढ़ते खतरों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। जमुनिया जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां पुलिस की उपस्थिति सीमित होती है और जंगलों का क्षेत्रफल अधिक है, वहां ऐसे हमलों को अंजाम देना और फरार हो जाना अपराधियों के लिए तुलनात्मक रूप से सरल हो जाता है। गोलू यादव पर हुए इस हमले ने स्थानीय समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चुनावी रंजिश को लेकर ऐसे खूनी हमले होने लगें, तो आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय प्रशासन से मांग की जा रही है कि न केवल इस मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाए, बल्कि क्षेत्र में शांति समितियों की बैठकें आयोजित कर सामुदायिक सद्भाव बहाल करने के उपाय भी किए जाएं।

फिलहाल, गोलू यादव का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है। पुलिस टीमों ने घटनास्थल का दौरा किया है और संभावित गवाहों से पूछताछ की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है और जांच की नियमित समीक्षा की जा रही है। परिजनों और ग्रामीणों की मांग है कि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति चुनावी या व्यक्तिगत रंजिश को लेकर इस प्रकार की हिंसा करने का साहस न कर सके। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने की मजबूती की परीक्षा बन गया है।