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दुबई फ्लाइट हाईजैक अलर्ट: 9/11 जैसा हमला रोकने के लिए इजराइल ने भेजे थे फाइटर जेट्स, हमलावर से बातचीत की थी तैयारी

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वांदे भारत न्यूज़ डेस्क। दुबई से उड़ान भरने वाले एक विमान को लेकर जब हाईजैकिंग का अलर्ट मिला, तो इजराइल ने बेहद तेजी से कार्रवाई करते हुए अपने फाइटर जेट्स को आसमान में उड़ा दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि 11 सितंबर 2001 (9/11) जैसे किसी बड़े और विनाशकारी आतंकी हमले को दोहराए जाने से रोका जा सके। इस पूरी घटना को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक इजराइली सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे की गंभीरता को भांपते हुए बिना किसी देरी के अपनी वायुसेना को सक्रिय कर दिया था।

टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली सरकार को इस बात की गहरी आशंका थी कि यदि हाईजैक किए गए विमान का नियंत्रण वापस नहीं मिल पाता है, तो वह विमान इजराइल की सीमाओं तक पहुंच सकता है। ऐसे में आतंकवादी इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करके 9/11 जैसे भयंकर हमले को अंजाम दे सकते थे। इसी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए इजराइल ने पहले ही अपने लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर रख दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले हाईजैक अलर्ट के तुरंत बाद उन्हें इंटरसेप्शन के लिए रवाना कर दिया गया।

सुरक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इजराइल की रणनीति केवल लड़ाकू विमानों को भेजने तक सीमित नहीं थी। सरकार और सुरक्षा बलों ने इस स्थिति से निपटने के लिए कई स्तरों पर योजनाएं तैयार कर रखी थीं। इन योजनाओं में विमान को हाईजैक करने वाले हमलावरों से बातचीत करने की भी पूरी तैयारी शामिल थी। इजराइली अधिकारियों का मानना था कि अगर बातचीत के जरिए माहौल को शांत किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, तो यह सबसे बेहतर विकल्प होगा। इसके लिए विशेष वार्ताकारों की टीम को भी स्टैंडबाय मोड पर रखा गया था, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे तुरंत हाईजैकर्स से संवाद स्थापित कर सकें।

हालांकि, बातचीत के विकल्प के साथ-साथ इजराइल ने सबसे कठोर कदम उठाने की भी तैयारी कर रखी थी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि विमान इजराइल की ओर बढ़ता और उसे हाईजैकर्स के चंगुल से छुड़ाने का कोई अन्य रास्ता नहीं बचता, तो लड़ाकू विमानों को उस विमान को मार गिराने के निर्देश दिए जा सकते थे। 9/11 के हमले के बाद से पूरी दुनिया की सुरक्षा नीतियों में भारी बदलाव आया है, और इजराइल जैसे देश जो लगातार सुरक्षा खतरों का सामना करते हैं, उनके लिए ऐसी स्थितियों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाना अनिवार्य हो जाता है। इजराइली वायुसेना के फाइटर जेट्स ने विमान को इंटरसेप्ट करने की प्रक्रिया को अत्यंत सटीकता के साथ अंजाम दिया, ताकि आसपास के क्षेत्रों में किसी भी तरह का नुकसान न हो।

गौरतलब है कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया की विमानन सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। उस दिन आतंकवादियों ने यात्री विमानों को हाईजैक करके उन्हें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन जैसी महत्वपूर्ण इमारतों से टकरा दिया था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी। इसी त्रासदी को ध्यान में रखते हुए, जब भी किसी विमान के हाईजैक होने का अलर्ट मिलता है, तो वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां इसे अत्यंत गंभीरता से लेती हैं। इजराइल द्वारा दुबई फ्लाइट के मामले में दिखाई गई तत्परता इसी वैश्विक सुरक्षा मानकों और पिछले अनुभवों का परिणाम है।

टाइम्स ऑफ इजराइल ने अपनी रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया है कि इजराइली सुरक्षा तंत्र ने इस पूरे अभियान के दौरान अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और विमानन प्राधिकरणों के साथ भी समन्वय बनाए रखा। दुबई से जुड़ी इस उड़ान के मार्ग और उसकी स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही थी। फाइटर जेट्स को इस तरह से तैनात किया गया था कि वे विमान की हर गतिविधि पर नजर रख सकें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कोई भी फैसला ले सकें।

इजराइल की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में वह किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करता। यद्यपि विमान को मार गिराने का अंतिम निर्णय एक अत्यंत संवेदनशील और कठिन कदम होता है, क्योंकि इसमें विमान में मौजूद सभी निर्दोष यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान को खतरा होता है, लेकिन 9/11 जैसी तबाही को रोकने के लिए इजराइली प्रशासन ने यह विकल्प भी खुला रखा था।

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा और हाईजैकिंग की स्थितियों में देशों द्वारा अपनाई जाने वाली आपातकालीन प्रोटोकॉल पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है। इजराइल की त्वरित कार्रवाई, फाइटर जेट्स की तैनाती और हमलावरों से बातचीत की तैयारी जैसे कदम दर्शाते हैं कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति कितनी आवश्यक है। हालांकि, इस विशिष्ट घटना के अंतिम परिणाम और विमान की सुरक्षित स्थिति को लेकर प्राप्त स्रोत में आगे की पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन इजराइल द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदमों की गंभीरता और तत्परता स्पष्ट रूप से सामने आती है।