Vande Bharat News
होम› देश› समाचार

ED ने सुकृति फूड्स प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया; तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी की आपूर्ति का मामला उजागर

एजेंसी ने शुक्रवार देर शाम तिरुपति मंदिर के प्रसाद लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी में कथित मिलावट के मामले में सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि असली घी के नाम पर कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति की गई थी। मंगला […]
ED ने सुकृति फूड्स प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया; तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी की आपूर्ति का मामला उजागर
शेयर करेंFacebookX

एजेंसी ने शुक्रवार देर शाम तिरुपति मंदिर के प्रसाद लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी में कथित मिलावट के मामले में सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि असली घी के नाम पर कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति की गई थी। मंगला को 17 सितंबर को हैदराबाद स्थित एजेंसी के कार्यालय से गिरफ्तार किया गया और इसके बाद उसे विशाखापट्टनम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

ED के मुताबिक, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को 2019 से 2024 के बीच लगभग ₹230 करोड़ का घी आपूर्ति की गई थी, जिसमें से करीब ₹96 करोड़ का मिलावटी घी तैयार किया गया था। इस मिलावटी घी में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल्स का उपयोग किया गया था। ED ने दावा किया कि मंगला ने मिलावट वाली सामग्री जुटाने और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी तैयार करने में सहयोग किया।

मंगला ने विभिन्न कंपनियों के माध्यम से मिलावटी घी की आपूर्ति में मदद की, जिसमें वैष्णवी डेयरी स्पेशियलिटीज, मल्गंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और ए.आर. डेयरी फूड्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। एजेंसी ने कहा कि उसने घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड भी बनाए, ताकि मिलावटी सामग्री के उपयोग को छिपाया जा सके और इसे असली गाय के घी जैसा दिखाया जा सके। इससे पहले इसी मामले में ED ने भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क के प्रमोटर और डायरेक्टर विपिन जैन को भी गिरफ्तार किया था।

तिरुपति लड्डू की इतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो, मंदिर में रोज़ाना 4.08 लाख से अधिक भक्तों को लड्डू प्रसाद वितरित किया जाता है। यह परंपरा 1715 से चली आ रही है, यानी 300 से अधिक वर्षों से अधिक समय से जारी है। लड्डू को पोट्टु नामक रसोई में तैयार किया जाता है, जहाँ पारंपरिक कारीगर पीढ़ियों से इसे बनाने की कला को आगे बढ़ाते आ रहे हैं। लड्डू बनाने की प्रक्रिया को दित्तम कहा जाता है, जिसमें सामग्री की मात्रा और प्रक्रिया को बहुत सख्ती से नियंत्रित किया जाता है। इस लंबे समय के दौरान लड्डू की रेसिपी में केवल छह बार ही बदलाव किए गए हैं। प्रारम्भ में बेसन और गुड़ की चाशनी से बना लड्डू अधिक समय तक टिकता था, बाद में इसमें बादाम, काजू और किशमिश मिलाकर स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाई गई।

उपरोक्त जानकारी के साथ ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने भी तिरुपति लड्डू में मिलावट के मामले में नया खुलासा प्रस्तुत किया है। SIT ने बताया कि TTD ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन बीआर नायडू ने कबूल किया है कि 2019 से 2024 के बीच लगभग 48.76 करोड़ लड्डू बनाए गए, जिसमें से 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से तैयार किए गए थे। इस अवधि में लगभग 68 लाख किलो घी का उपयोग किया गया था, जिसमें 5 साल में 68 लाख किलो घी शामिल है।

राजनीतिक dimension भी इस मामले में जुड़ी हुई है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश की वर्तमान सरकार, जिसका नेतृत्व चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP द्वारा नेतृत्व किया जाता है, ने तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू प्रसाद में जानवरों की चर्बी वाला घी और मछली तेल मिलाया है। TDP ने 18 सितंबर 2025 को यह आरोप लगाया था और अगले दिन एक लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने दावों की पुष्टि का प्रयास किया।

ED की जांच में मंगला की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि तिरुपति लड्डू के प्रसाद में उपयोग होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ED ने कहा कि इस मामले की जांच जारी है और आगे के Ermittlungen में और भी जानकारी सामने आने की संभावना है। इस बीच, TTD ने अभी तक आधिकारिक रूप से इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया है, जबकि SIT की जांच जारी रहने की उम्मीद है।

सारांश में, ED की कार्रवाई ने तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी की आपूर्ति के आरोपों को उजागर किया है, जिससे मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि जांच प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है। तिरुपति लड्डू की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, इस घटना का समाधान शीघ्र ही आवश्यक है ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।

Advertisement

आपके लिए और खबरें