गोपालगंज में राजस्व अमीनों का एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन: सेवा संपुष्टि और पदनाम बदलने की मांग को लेकर सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में राजस्व विभाग के अमीनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बिहार राजस्व अमीन संघ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। जिले के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचे राजस्व अमीनों ने अंबेडकर भवन परिसर में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी आवाज बुलंद की। अमीनों की प्रमुख मांगों में सेवा संपुष्टि और उनके पदनाम को बदलने का मुद्दा शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार द्वारा जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे अपना आंदोलन और अधिक तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
बिहार राजस्व अमीन संघ के बैनर तले आयोजित इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में गोपालगंज जिले के सभी अंचलों से राजस्व अमीन शामिल हुए। सुबह से ही अमीन अंबेडकर भवन परिसर में जुटना शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, प्रदर्शनकारियों की भीड़ बढ़ती गई और पूरा परिसर नारों से गूंज उठा। अमीनों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर उनकी मांगें लिखी हुई थीं। उन्होंने सरकार और राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान अमीनों ने अपने साथ हो रहे अन्याय का आरोप लगाते हुए कहा कि वे वर्षों से राजस्व विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें उनका उचित अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
अमीनों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांगों में से एक उनकी सेवा संपुष्टि है। राजस्व अमीन संघ का कहना है कि अमीन विभाग की रीढ़ की हड्डी होते हैं। जमीन की मापी, लगान वसूली, भूमि संबंधी विवादों में मौके का निरीक्षण और अन्य राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर होती है। इसके बावजूद उनकी सेवाओं को नियमित या संपुष्ट नहीं किया जा रहा है। अमीनों का तर्क है कि जब वे सरकारी कार्यों में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी भूमिका निभा रहे हैं, तो उनकी सेवा संपुष्टि में देरी क्यों की जा रही है। सेवा संपुष्टि नहीं होने के कारण उन्हें कई प्रकार की व्यावसायिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सेवा संपुष्टि के अलावा अमीनों की दूसरी बड़ी मांग उनके पदनाम को बदलने से संबंधित है। बिहार राजस्व अमीन संघ से जुड़े पदाधिकारियों और प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि ‘अमीन’ पदनाम को बदलकर उन्हें एक बेहतर और सम्मानजनक पदनाम दिया जाए। उनका मानना है कि वर्तमान पदनाम उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य की गरिमा और महत्व को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता है। अमीनों का कहना है कि वे राजस्व विभाग में अत्यंत तकनीकी और जिम्मेदारी वाले कार्य करते हैं, इसलिए उनके पदनाम में बदलाव कर इसे ‘राजस्व कर्मचारी’ या अन्य कोई उपयुक्त नाम दिया जाना चाहिए, जिससे समाज और विभाग में उनका सम्मान बढ़ सके।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अमीनों ने राज्य सरकार को सीधी चेतावनी भी दी। संघ के प्रतिनिधियों ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि यह एक दिवसीय धरना केवल शुरुआत है। यदि बिहार सरकार और राजस्व विभाग के आला अधिकारियों ने उनकी इन जायज मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया और जल्द से जल्द समाधान नहीं निकाला, तो अमीन अपना आंदोलन और तेज करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी समय में वे बड़े स्तर पर हड़ताल या अनिश्चितकालीन धरना देने जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। अमीनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आंदोलन तेज होता है, तो राजस्व विभाग के दैनिक कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जमीन की मापी, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व संबंधी कामकाज ठप हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
गोपालगंज के अंबेडकर भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न अंचलों से आए अमीनों ने एकजुटता का परिचय दिया। सभी अंचलों के अमीनों ने एक स्वर में अपनी मांगों का समर्थन किया और संघ के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास जताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनकी शांति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। बिहार राजस्व अमीन संघ ने सरकार से मांग की है कि वह अमीनों की समस्याओं को समझे और उनके साथ न्याय करे।
बता दें कि बिहार में राजस्व अमीनों की सेवा संपुष्टि और पदनाम परिवर्तन का मुद्दा कोई नया नहीं है। पिछले काफी समय से राज्य के विभिन्न जिलों में अमीन अपनी मांगों को लेकर समय-समय पर प्रदर्शन करते रहे हैं। हालांकि, अब तक उनकी मांगों का पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका है। गोपालगंज में हुए इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन ने एक बार फिर इस मुद्दे को प्रशासन और सरकार के संज्ञान में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि बिहार सरकार और राजस्व विभाग के उच्चाधिकारी अमीनों की इन मांगों और उनके आंदोलन को तेज करने की चेतावनी पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल, अमीनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

