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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
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गुजरात में अमित शाह ने देश की पहली LNG ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, 1542 करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ

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गांधीनगर/नई दिल्ली। वंदे भारत न्यूज़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात में भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए देश की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने गुजरात में 1,542 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न रेल परियोजनाओं का भी शुभारंभ और लोकार्पण किया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ और किफायती ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण भारत की पहली एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) संचालित ट्रेन रही। रेलवे के इंजीनियरों और विशेषज्ञों द्वारा विकसित यह ट्रेन अपने आप में एक तकनीकी चमत्कार है। जानकारी के अनुसार, इस ट्रेन के इंजन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह एलएनजी और डीजल दोनों ईंधनों के बीच आसानी से स्विच कर सकता है। यानी जब ट्रेन उन मार्गों पर होगी जहां एलएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित है, तो वह गैस पर चलेगी, और यदि किसी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहां एलएनजी रिफिलिंग की सुविधा नहीं है, तो इंजन स्वचालित रूप से या मैनुअल तरीके से डीजल मोड पर शिफ्ट हो जाएगा। यह दोहरी ईंधन क्षमता (Dual Fuel Capability) ट्रेन की निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस ट्रेन की रेंज को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद प्रभावशाली हैं। बताया गया है कि जब इस ट्रेन का एलएनजी टैंक पूरी तरह से फुल होगा, तो यह बिना रुके लगभग 2,200 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम होगी। यह दूरी भारतीय रेलवे के कई प्रमुख मालभाड़ा और यात्री मार्गों को कवर करने के लिए पर्याप्त है। 2,200 किलोमीटर की यह रेंज इस बात का संकेत देती है कि एलएनजी को रेलवे के दीर्घकालिक ईंधन विकल्प के रूप में गंभीरता से देखा जा रहा है।

लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी का उपयोग रेलवे में इसलिए भी क्रांतिकारी माना जा रहा है क्योंकि यह पारंपरिक डीजल की तुलना में पर्यावरण के अनुकूल है। एलएनजी के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक उत्सर्जन में काफी कमी आती है। ऐसे में, यह ट्रेन न केवल रेलवे के परिचालन खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकती है, बल्कि भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में भी एक बड़ा योगदान देगी। रेल मंत्रालय लगातार अपने नेटवर्क को हरित ऊर्जा की ओर ले जाने के प्रयास कर रहा है, और पहले से ही विद्युतीकरण के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। अब एलएनजी ट्रेन की शुरुआत इस दिशा में एक और ठोस कदम है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर गुजरात राज्य में 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया। इन परियोजनाओं में रेलवे ट्रैकों के दोहरीकरण, विद्युतीकरण, स्टेशनों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं में वृद्धि से जुड़े कार्य शामिल होने की संभावना है। गुजरात, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य भी है, हमेशा से बुनियादी ढांचे के विकास में अग्रणी रहा है। रेलवे के क्षेत्र में किए जा रहे ये भारी निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेंगे तथा उद्योगों और व्यापारियों को माल ढुलाई में तेजी और सुविधा प्रदान करेंगे।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, एलएनजी ट्रेन के सफल संचालन के बाद भविष्य में इस तकनीक का विस्तार अन्य मार्गों और ट्रेनों पर भी किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह अपनी प्रारंभिक अवस्था में है और इसके वाणिज्यिक संचालन के परिणामों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। टैंक फुल होने पर 2200 किलोमीटर की दूरी तय करने की क्षमता और डीजल-एलएनजी के बीच स्विच करने की सुविधा इसे भारतीय रेलवे के लिए एक व्यवहार्य और भरोसेमंद विकल्प बनाती है।

उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों ट्रेनें लाखों यात्रियों और लाखों टन माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती हैं। ऐसे विशाल नेटवर्क में ईंधन का खर्च रेलवे के कुल परिचालन व्यय का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है। डीजल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर रेलवे के बजट पर पड़ता है। ऐसे में, एलएनजी जैसे वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सस्ते ईंधन का उपयोग रेलवे की वित्तीय सेहत सुधारने में भी मददगार सिद्ध हो सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिखाई गई यह हरी झंडी केवल एक ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारतीय रेलवे के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है। 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के शुभारंभ के साथ गुजरात में रेलवे का ढांचागत विकास एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एलएनजी संचालित ट्रेनों का बेड़ा किस तरह देश भर में फैलता है और भारतीय रेलवे को एक हरित, स्वच्छ और आधुनिक परिवहन प्रणाली बनाने में यह तकनीक कितनी कारगर साबित होती है।