कोक स्टूडियो में गूंजी थार की धुन, कुटले खान छाए:रेखा भारद्वाज संग मिलाए सुर; 18 मार्च को रिलीज हुआ नया गीत

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राजस्थान की रेतीली धोरों की महक एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संगीत जगत में अपनी चमक बिखेर रही है। जैसलमेर के बोनाड़ा गांव के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार कुटले खान का नया गीत 18 मार्च को प्रतिष्ठित संगीत मंच कोक स्टूडियो पर रिलीज हो गया है। लोक संगीत और आधुनिक धुनों के इस फ्यूजन ने आते ही संगीत प्रेमियों के बीच धूम मचा दी है। ‘द लिस्ट 2026’ एक अल्बम बनाया है जिसमें बॉलीवुड के करीब 8 से भी ज्यादा सिंगर हैं। जिसमें रेखा भारद्वाज और विशाल मिश्रा भी शामिल है। राजस्थान से इस अल्बम के लिए केवल दो सिंगर का चयन किया गया जिसमें से एक कुटले खान और दूसरे मामे खान है। कुटले खान ने ‘ए अजनबी’ गाना गाया है जो राजस्थानी लोग संगीत व फ्यूजन का मिश्रण है। लोक और आधुनिकता का ‘परफेक्ट फ्यूजन’ इस बार का गीत संगीत प्रेमियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। 18 मार्च को रिलीज हुए इस ट्रैक में कुटले खान ने बॉलीवुड की दिग्गज गायिका रेखा भारद्वाज के साथ सुर मिलाए हैं। इसके साथ ही आज की पीढ़ी के लोकप्रिय गायक आदित्य रिखारी, फहीम अब्दुल्ला, मधुर शर्मा और अशोक मस्कीन ने भी अपनी आवाज़ दी है। रवतार म्यूजिक के निर्देशन में तैयार यह गीत पारंपरिक लोक गायकी और कंटेंपरेरी पॉप का एक ऐसा ‘म्यूजिकल कोलाज’ है, जिसे युवा और बुजुर्ग दोनों ही समान रूप से पसंद कर रहे हैं। कुटले खान बताते हैं- “यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक लोक गायकी की शैली और आज के पॉप-म्यूजिक का एक अनोखा संगम है।” 2015 से 2026 तक संघर्ष और सफलता की कहानी कुटले खान का कोक स्टूडियो से पुराना नाता है। उन्होंने पहली बार वर्ष 2015 में मशहूर संगीतकार अमित त्रिवेदी के साथ अपनी जादुई प्रस्तुति दी थी। उस समय उनके गीतों ने दुनियाभर के संगीत प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। करीब 11 साल बाद, एक बार फिर इस प्रतिष्ठित मंच पर लौटना न केवल कुटले खान के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह राजस्थान के समस्त लोक कलाकारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। IIFA से लेकर GIMA तक- कुटले खान जैसलमेर कुटले खान जैसलमेर के एक ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी कला से कई मिथक तोड़े हैं: सांस्कृतिक दूत बना ‘बोनाड़ा’ का लाल कुटले खान की इस सफलता से न केवल जैसलमेर, बल्कि पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। जानकारों का मानना है कि कोक स्टूडियो जैसे बड़े मंच पर लोक संगीत की वापसी से नई पीढ़ी के कलाकारों को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।



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