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Tue, Oct 6, 2026Updated 7:41 AM IST
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ग्वालियर: कालिका धाम साध्वी से छेड़छाड़ मामले में योगेश गुप्ता पर पहली FIR दर्ज, जान से मारने की धमकी और रास्ता रोकने का आरोप

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित प्रसिद्ध कालिका धाम की पीठाधीश्वर साध्वी के साथ हुई कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार के मामले में पुलिस ने आरोपी योगेश गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह इस मामले में आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई पहली एफआईआर है। विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने साध्वी की शिकायत पर छेड़छाड़, रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी देने सहित भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में घटना का विस्तृत ब्योरा देते हुए आरोपी द्वारा किए गए आपत्तिजनक व्यवहार और धमकियों का स्पष्ट उल्लेख किया है।

पुलिस सूत्रों और शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार, यह पूरा मामला 10 अगस्त 2026 की दोपहर का है। कालिका धाम की 28 वर्षीय पीठाधीश्वर साध्वी ने विश्वविद्यालय थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया है कि उस दिन दोपहर लगभग 3 बजे जब वे हुरावली चौराहे पर मौजूद थीं, तभी आरोपी योगेश गुप्ता वहां आया और उसने बिना किसी पूर्व परिचय या औचित्य के उनका हाथ पकड़ लिया। साध्वी ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उनका हाथ पकड़कर कहा, ‘मैं तुम्हें पसंद करता हूं, मुझसे दोस्ती कर लो।’ पीड़िता के अनुसार, यह कृत्य न केवल अशोभनीय था, बल्कि इसमें जबरदस्ती और अनुचित स्पर्श भी शामिल था, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।

साध्वी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी योगेश गुप्ता ने उन्हें रास्ता रोककर रोका और जब उन्होंने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार किया तथा विरोध जताया, तो आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता का कहना है कि आरोपी का व्यवहार अत्यंत उग्र और धमकी भरा था, जिसके कारण उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हुई। इस घटना के बाद से ही वे भय के साये में जी रही थीं, जिसके चलते उन्होंने अंततः कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि साध्वी की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

इस मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि पीड़िता एक धार्मिक स्थल की पीठाधीश्वर हैं और समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती हैं। कालिका धाम ग्वालियर का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में वहां की पीठाधीश्वर के साथ सरेआम इस प्रकार का दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ की घटना ने स्थानीय स्तर पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी या उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि मामले में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

उल्लेखनीय है कि स्रोत सामग्री में आरोपी योगेश गुप्ता को महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के रूप में भी संदर्भित किया गया है, जो इस मामले की पृष्ठभूमि में एक अतिरिक्त और गंभीर आयाम जोड़ता है। हालांकि, वर्तमान एफआईआर मुख्य रूप से साध्वी द्वारा दर्ज कराई गई छेड़छाड़, रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी की शिकायत पर आधारित है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी के खिलाफ अन्य समान अपराधों या डिजिटल उत्पीड़न से संबंधित पूर्व शिकायतें मौजूद हैं। यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें भी मामले में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल, कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी के खिलाफ दर्ज यह पहली एफआईआर है, और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

पीड़िता ने पुलिस से अनुरोध किया है कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आरोपी द्वारा किया गया व्यवहार केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का हनन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ जांच की जा रही है। पुलिस टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है और संभावित गवाहों तथा सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकें।

यह मामला ग्वालियर में महिला सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की गरिमा के मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में लाया है। प्रशासन और पुलिस विभाग के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, क्योंकि पीड़िता की सामाजिक और धार्मिक हैसियत को देखते हुए मामले की पारदर्शी और शीघ्र जांच अत्यंत आवश्यक है। फिलहाल, पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों और साध्वी के बयान के आधार पर ही आगे बढ़ रही है। किसी भी प्रकार की अटकलबाजी या असत्यापित जानकारी से बचा जा रहा है। आगामी दिनों में जांच की प्रगति और आरोपी के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई के बारे में अधिक स्पष्टता होने की संभावना है।