![]()
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक 105 दिन बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा का पर्चा भर दिया। मतलब वे सीएम नहीं रहेंगे। अब बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम बन सकता है। बीजेपी अबतक गठबंधन के सहारे सत्ता में आकर 3 राज्यों पर कब्जा कर चुकी है। 2-3 राज्यों में ऐसी कोशिशें अभी चल रही हैं। वहीं 3 राज्यों में ऐसी कोशिशें नाकाम भी हुई हैं। दोस्त पार्टियों के बूते पहले ताकत हासिल करना फिर पूरी तरह सत्ता पर काबिज होना, क्या यह बीजेपी का पैटर्न है? कई एक्सपर्ट बिहार के घटनाक्रम को ‘ऑपरेशन लोटस’ का क्लोन कह रहे हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे बीजेपी की राजनीति के इस खास पैटर्न की पूरी कहानी… सवाल-1: क्या बिहार में नीतीश कुमार की जगह बीजेपी का सीएम बनना तय? जवाब: 89 सीट के साथ बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए पूरी संभावना है कि बिहार सरकार का अगला सीएम BJP से होगा। BJP के राष्ट्रीय स्तर के एक नेता ने भास्कर को बताया कि वे अब किसी भी सूरत में कोई दूसरा नीतीश कुमार नहीं बनाना चाहते हैं। दरअसल, 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 67 सीटें मिली थीं और नीतीश की अगुवाई वाली समता पार्टी को 34 सीटें मिली थीं। इसके बाद भी अटल बिहार वाजपेयी की अगुवाई वाली बीजेपी ने नीतीश को अपना नेता चुना था और वह पहली बार बिहार के CM बने थे। हालांकि, तब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान लालू यादव ने नीतीश को पटखनी दे दी थी। और 7 दिन ही सरकार चली थी, लेकिन BJP के लिए नेता नीतीश ही रह गए और BJP उनकी पिछलग्गू बनी रह गई। कहा जा रहा है कि BJP में खास तौर पर गृह मंत्री अमित शाह नहीं चाहते थे कि 20 नवंबर 2025 को गांधी मैदान में नीतीश कुमार CM पद की शपथ लें। BJP की तरफ से ऑफर दिया गया कि नीतीश कुमार अपनी पसंद के किसी नेता का नाम बता दें। वे जिसे अपनी पसंद बता देंगे, BJP उसे CM स्वीकार कर लेगी। नीतीश कुमार ने तब ये प्रपोजल स्वीकार नहीं किया। न ही उनके रणनीतिकार इस पर राजी थे। JDU की तरफ से कहा गया कि मैंडेट नीतीश कुमार के नाम पर मिला है, तो CM भी वही बनेंगे। इसके बाद उन्होंने CM पद की शपथ ली। हालांकि चुनाव के दौरान ही नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर लगातार सवाल उठने लगे थे। ऐसे में JDU नेताओं की तरफ से मांग की जा रही है कि नीतीश कुमार की पसंद के नेता को CM बना दिया जाए।
सवाल-2: इससे पहले किन राज्यों में सहयोगी दलों को कमजोर करके बीजेपी सत्ता में आई? जवाब: बीजेपी ने बीते कुछ सालों में एक खास रणनीति के तहत कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करके सत्ता में हिस्सेदारी ली। उसके बाद अपना कैडर और वोट बेस तैयार किया। सहयोगी दलों की पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को भी शामिल किया। दूसरे दलों में फूट डालने के आरोप भी लगे। इसके बाद बीजेपी खुद राज्य में नंबर एक पार्टी बन गई, जबकि सहयोगी दल कमजोर पड़ते गए… महाराष्ट्र में ‘छोटे भाई’ से ‘बड़े भाई’ का सफर ओडिशा में BJD की सहयोगी पार्टी से नंबर 1 का सफर गोवा में छोटे दलों के साथ बिना बहुमत के सरकार बनाई सवाल-3: केंद्र में बीजेपी ने किन पार्टियों के सहारे सत्ता हासिल की? जवाब: बीजेपी की पुरानी पार्टी यानी जनसंघ की नींव 1951 में ही रख दी गई थी, लेकिन सत्ता तक पहुंचने में उसे 26 साल लग गए। बात 1974-75 की है। केंद्र की इंदिरा सरकार के खिलाफ बिहार के जय प्रकाश नारायण यानी जेपी ने मोर्चा संभाल रखा था। उन्होंने विपक्षी दलों को अपनी विचारधारा छोड़कर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान कर दिया। तब भारतीय लोकदल, कांग्रेस (O) और सोशलिस्ट पार्टी के साथ भारतीय जनसंघ भी जेपी के साथ हो गई। जेपी के सहारे पहली बार मिली सत्ता
शांतनु गुप्ता अपनी किताब भारतीय जनता पार्टी की गौरव गाथा में लिखते हैं- ‘जेपी जनसंघ पर निर्भर थे, क्योंकि जनसंघ और ABVP के पास एक अनुशासित और शक्तिशाली कैडर था। जेपी ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर जनसंघ फासीवादी है, तो मैं भी फासीवादी हूं।’ नवंबर 1974 में दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक हुई। इंदिरा सरकार के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन का ऐलान हुआ। इसके लिए 6 मार्च 1975 की तारीख तय की गई। जेपी ने कहा कि इस प्रदर्शन में पार्टियां अपने-अपने झंडे या बैनर लेकर न आएं। प्रदर्शन किसी एक ही बैनर तले होना चाहिए। जनसंघ ने इस मौके को लपक लिया। जनवरी 1975 में जनसंघ ने प्रस्ताव पास कर दिया कि एक सीट पर विपक्ष का एक ही उम्मीदवार मैदान में उतरना चाहिए। और हुआ भी वहीं। इमरजेंसी के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल जनता पार्टी के बैनर तले जेपी की अगुवाई में लड़े। 542 में से 295 सीटें जनता पार्टी को मिली और कांग्रेस 154 पर सिमट गई। जनता पार्टी के मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। जनसंघ से कुल 5 लोग केंद्र में मंत्री बने। अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने और लाल कृष्ण आडवाणी सूचना एवं प्रसारण मंत्री। इस तरह पहली बार जनसंघ ने सत्ता का स्वाद चखा। जनता पार्टी छोड़ बीजेपी नाम से नई पार्टी बनाई
1979 आते-आते जनता पार्टी के भीतर जनसंघ को लेकर दोहरी सदस्यता का विवाद छिड़ गया। जनसंघ के लोगों से RSS की सदस्यता छोड़ने की मांग उठने लगी। अटल, आडवाणी जैसे नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई। 6 अप्रैल 1980 को जनसंघ के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी यानी BJP नाम से नई पार्टी का ऐलान कर दिया। बीजेपी को अपने पहले चुनाव यानी 1984 में सिर्फ 2 सीटें मिलीं। वीपी सिंह को समर्थन देकर गैर-कांग्रेसी सरकार बनवाई, फिर गिरा दी
1987-88 में कांग्रेस सरकार में रक्षा मंत्री रहे वीपी सिंह ने बगावत करके ‘जनता दल’ बना लिया। 1989 के चुनाव में जनता दल को 143 सीटें मिलीं। 85 सीटें लाने वाली बीजेपी ने बाहर से समर्थन देकर जनता दल की सरकार बनवा दी। यानी कांग्रेस एक बार फिर से सत्ता से बाहर हो गई। अक्टूबर 1990 में राम रथ यात्रा के दौरान जनता दल के लालू यादव ने बिहार में आडवाणी का रथ रोक दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेकर वीपी सिंह की सरकार गिरा दी। 1991 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की और नरसिम्हा राव पीएम बने। उसके बाद 1996 के चुनाव में बीजेपी 161 सीटें जीतकर फिर से सबसे बड़ी पार्टी बनी। अटल बिहार प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से 13 दिन बाद ही उनकी सरकार गिर गई। अकेले बहुमत नहीं मिला तो 20 से ज्यादा दलों को मिलाकर सत्ता हासिल की
1998 में बीजेपी 182 सीटें जीतकर फिर से बड़ी पार्टी बनी। इसके बार उसने अलग-अलग दलों को मिलाकर नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस यानी NDA बनाया। इसमें शिवसेना, समता पार्टी, बीजू जनता दल, टीएमसी, शिरोमणि अकाली दल और जयललिता की पार्टी AIADMK जैसे दल शामिल थे। हालांकि, 13 महीने बाद जयललिता ने समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी। 1999 के चुनाव में फिर से बीजेपी को 182 सीटें मिलीं। इस बार भी बीजेपी ने 20 से ज्यादा अलग-अलग दलों को मिलाकर सरकार बना ली। ये सरकार पूरे 5 साल चली। लेकिन 2004 के चुनाव में TMC, DMK और TDP जैसी पार्टियों ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया। नतीजा ये हुआ कि बीजेपी 2004 से 2014 तक सत्ता से बाहर रही। सवाल- 4: अभी बीजेपी के निशाने पर आगे कौन से राज्य हैं? जवाब: 2026 में पांच विधानसभा चुनाव होने हैं। ये राज्य असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी हैं। असम में बीजेपी सत्ता में है। पुडुचेरी में अलायंस की स्थिति मजबूत है। वहीं पश्चिम बंगाल और केरल में छोटी-छोटी पार्टियों के साथ अलायंस करके चुनाव लड़ने की तैयारी में है। तमिलनाडु में कहानी कुछ अलग है… सवाल-5: किन राज्यों में बीजेपी की ये स्ट्रैटेजी फेल हो गई? जवाब: हालिया राजनीति को देखें तो 3 राज्य ऐसे हैं, जहां बीजेपी की ये स्ट्रैटजी नाकाम रही… 1. पश्चिम बंगाल: कई TMC नेता जुटाए, फिर भी नाकाम 2. झारखंड: ऑपरेशन लोटस के आरोप लगे 3. पंजाब: अकाली दल का साथ छोड़कर नुकसान उठाया ———————————— बिहार से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… नीतीश ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया:बोले- नई सरकार को सहयोग रहेगा; JDU ऑफिस में तोड़फोड़, तेजस्वी ने कहा- BJP ने हाईजैक किया बिहार के CM नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा कैंडिडेट के लिए नामांकन किया। CM के साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने भी नामांकन दाखिल किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। पढ़िए पूरी खबर…
Source link
बिहार में बीजेपी का सीएम बनना ही था:6 राज्यों में बीजेपी की राजनीति से समझिए, आखिर नीतीश को क्यों जाना पड़ा राज्यसभा
Leave a Comment
Leave a Comment















