मार्च में गर्मी ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ा:14 शहरों में 40 डिग्री के पार क्यों पहुंचा पारा; अप्रैल-मई में कैसी गर्मी पड़ेगी

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2026 की फरवरी पिछले 125 सालों में सबसे गर्म और सूखी रही। अब मार्च में भी मौसम के वही तेवर बरकरार हैं। मार्च की गर्मी ने दिल्ली में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। आखिर इतनी जल्दी क्यों पड़ने लगी गर्मी और मार्च इतना गर्म तो अप्रैल-मई में क्या होगा; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही कहां भीषण दस्तक दी है? जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक मार्च के शुरुआती 10 दिनों में ही गर्मी ने अप्रैल-मई जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं… सवाल-2: आखिर इतनी जल्दी मौसम गर्म होने की क्या वजह है? जवाब: प्राइवेट वेदर फॉरकास्ट कंपनी स्काईमेट और जोमैटो के वेदर डिपार्टमेंट में प्रोग्राम मैनेजर नवदीप दहिया, इसके 3 मुख्य कारण बताते हैं… 1. कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव नहीं 2. पश्चिम से गर्म हवाएं आ रही हैं 3. एंटी साइक्लोन सिस्टम एक्टिव है सवाल-3: अगले कुछ दिन किन इलाकों में गर्मी और बढ़ेगी? जवाब: 14 मार्च 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना है। इससे तापमान गिरेगा। मौसम विभाग ने 10 मार्च को बताया कि… सवाल-4: अगर मार्च इतना गर्म है, तो अप्रैल-मई में क्या होगा? जवाब: इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी IMD के मुताबिक मार्च से मई 2026 के बीच भारत के ज्यादातर हिस्सों में मैक्सिमम टेम्परेचर सामान्य से ज्यादा रहेगा। इस दौरान हीट वेव भी ज्यादा चलेगी। IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय मोहपात्रा के मुताबिक… इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर: पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिण और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हीटवेव सामान्य से ज्यादा दिन चलेगी। IMD के मुताबिक, ‘गर्मी के दौरान, लू चलने की संभावना बढ़ने से पब्लिक हेल्थ, जल संसाधन, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं के लिए जोखिम पैदा हो सकते हैं। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, बाहर काम करने वाले और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। जून में अल-नीनो से मानसून भी प्रभावित होगा वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन यानी WMO ने मई से जुलाई में भारत में ‘एल-नीनो’ की स्थिति बनने की आशंका जताई है। ‘एल-नीनो’ से बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ती है। यह स्थिति भारत में मानसून को प्रभावित करती है… सवाल-5: ज्यादा गर्मी पड़ने से फसलों पर क्या असर पड़ सकता है? जवाब: मार्च में पड़ रही ज्यादा गर्मी से गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। कैथल हरियाणा में किसान कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रविंदर सिंह के मुताबिक, मार्च में बढ़ते तापमान से अनाज भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। गेहूं के दाने छोटे और हल्के होंगे, जिससे कुल उत्पादन पर असर पड़ेगा। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च’ के डायरेक्टर रतन तिवारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में बोई गई गेहूं की फसल पर मार्च की गर्मी का असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह बीज अभी इतने बड़े हो गए हैं कि गर्मी झेल लें। लेकिन जो फसल दिसंबर में बोई गई है, उन पर असर पड़ सकता है। फसल को बचाने के लिए किसान फसल की अच्छे से सिंचाई करें, जिससे उसमें नमी बनी रहे। जब तेज हवाएं चल रही हों, तब सिंचाई न करें, इससे फसल को नुकसान हो सकता है। मध्य प्रदेश और गुजरात में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। बाकी राज्यों में भी कई इलाकों में कटाई हो रही है। इसलिए अभी देश में किसानों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। ——— ये खबर भी पढ़िए… MP में ‘लू’ जैसी तपिश, उज्जैन-ग्वालियर-चंबल में चढ़ा पारा:टेम्परेचर सामान्य से 4.63 डिग्री ज्यादा; दिन में तेज धूप, रात में रहेगी ठंडक मध्य प्रदेश में इन दिनों दो तरह का मौसम है। दिन इतने गर्म है कि पारा 39 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात और सुबह ठंडक है। एक्सपर्ट के मुताबिक, ये मौसम लोगों की सेहत भी बिगाड़ रहा है। अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, एलर्जी के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…



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