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7 अप्रैल की रात। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐलान किया- आज रात ईरान की पूरी सभ्यता तबाह हो जाएगी, जो फिर कभी वापस नहीं आ सकेगी। दुनिया सांस रोककर बैठी थी। इस दौरान इस्लामाबाद के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल थी। दो शख्स लगातार फोन पर लगे थे- पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर। कुछ घंटे बाद 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे ट्रम्प ने लिखा- सीजफायर। ईरान भी इसके लिए राजी हो गया। सीजफायर के लिए कैसे राजी हुए ट्रम्प-खामेनेई, क्या 14 दिन बाद फिर शुरू होगी जंग और इस सबका भारत पर क्या असर पड़ेगा; भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कब हुआ, इसकी शर्तें क्या हैं? जवाब: 40 दिन से जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग में 14 दिन की रोक लग गई है… सीजफायर के बाद ट्रम्प ने बयान दिया, ‘ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्रस्ताव भेजा। यह काफी नहीं है, लेकिन उन्होंने बहुत अहम कदम उठाया है। देखते हैं, आगे क्या होता है।’ वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का दावा है कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। काउंसिल इसे जीत बता रही है। अमेरिका को भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में 10 शर्तें हैं… सवाल-2: क्या इजराइल भी सीजफायर के लिए राजी है? जवाब: ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा से ठीक पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की थी। घोषणा के बाद इजराइल ने भी इस सीजफायर का समर्थन किया है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान में कहा कि यह सीजफायर तभी संभव होगा जब… हालांकि, बयान में यह भी साफ किया गया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। जबकि इस सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी पोस्ट में साफ कहा था कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है। सवाल-3: आखिर कैसे हुआ सीजफायर, इसमें पाकिस्तान ने क्या किया? जवाब: सीजफायर की बैक स्टोरी समझिए… पाकिस्तान ने क्यों दखल दिया? सवाल-4: अगर 14 दिन बाद बात नहीं बनी, तो क्या फिर हमले होंगे? जवाब: सीजफायर और डिप्लोमैटिक बातचीत को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में एक हाई लेवल मीटिंग की तैयारी हो रही है, जिसमें अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी शामिल हो सकते हैं। यहीं से कोशिश की जाएगी कि सीजफायर के बाद समझौता हो सके और क्षेत्र में शांति बने। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि अगर वे (ईरान) समझौता नहीं करते हैं, तो उनके पास न तो पुल होंगे और न ही पावर प्लांट। जबकि ईरान ने भी साफ किया है कि युद्ध खत्म नहीं हुआ, ये सिर्फ विराम है। इजराइल की बात करें तो सीजफायर में वो ज्यादा दिलचस्प नहीं दिख रहा। क्योंकि पाक पीएम शरीफ की सीजफायर पोस्ट में लेबनान में भी हमले रोकने की बात लिखी थी, लेकिन इजराइली पीएम नेतन्याहू की पोस्ट में बताया गया है कि लेबनान इससे बाहर है। ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो इजराइल पहले से और ज्यादा आक्रामक हो सकता है। वहीं अगर बातचीत में ठीक-ठाक प्रोग्रेस हुई तो सीजफायर आगे के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। सवाल-5: भारत को इस सीजफायर से क्या नफा-नुकसान? जवाब: भारत ने खुद को इस युद्ध में तटस्थ रखा। पीएम मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं से बात की और शांति की अपील की, लेकिन ईरान या अमेरिका-इजराइल का नाम लेकर कोई सीधी आलोचना नहीं की। इस सीजफायर से भारत पर मिले-जुले असर पड़ेंगे। पहले पॉजिटिव असर की बात…
अब भारत के लिए चिंता की बात… हालांकि ट्रम्प जैसे लेनदेन वाले नेता के दरबार में ‘पसंदीदा मध्यस्थ’ और ‘बेकार मोहरे’ के बीच का फासला बेहद कम होता है। अगर यह मध्यस्थता नाकाम हुई, तो मुनीर और शरीफ ही खलनायक कहलाएंगे। —————- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ: पापा के कहने पर ‘किलर’ बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; अब ईरान को बास्टर्ड कहा अक्सर डोनाल्ड ट्रम्प अपनी हरकतों और बयानों से दुनिया को चौंका देते हैं। वे खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…
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सीजफायर के लिए कैसे राजी हुए ट्रम्प-खामेनेई:क्या 14 दिन बाद फिर शुरू होगी जंग; अमेरिका-ईरान समझौते की कहानी
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