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Tue, Oct 6, 2026Updated 10:38 AM IST
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हरिद्वार खाक चौक आश्रम विवाद: श्रीमहंत बृजमोहन दास ने कहा- कुछ लोग मंदिर के भंडार कक्ष पर कब्जा करना चाहते हैं, आरोपों को बताया बेबुनियाद

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हरिद्वार। उत्तराखंड के पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार में स्थित प्रसिद्ध श्रीपंच तेरह भाई त्यागी आश्रम खाक चौक की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है। आश्रम के एक भवन के स्वामित्व और अवैध कब्जे को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच आश्रम के श्रीमहंत बृजमोहन दास मंगलवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए और उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इन सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है। श्रीमहंत बृजमोहन दास ने साफ तौर पर कहा कि वे पिछले कुछ दिनों से शहर से बाहर गए हुए थे, जिसके कारण वे इस पूरे मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाए थे।

हरिद्वार लौटने के बाद श्रीमहंत बृजमोहन दास ने मीडिया और समाज के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ विशेष लोग जानबूझकर मंदिर के भंडार कक्ष पर कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या ऐसी स्थिति को होने देना किसी भी लिहाज से ठीक है? श्रीमहंत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ और आश्रम के प्रबंधन के खिलाफ जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका कोई आधार नहीं है और ये सभी दावे पूरी तरह से निराधार व बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे किसी भी कीमत पर आश्रम की संपत्ति पर अवैध कब्जा नहीं होने देंगे।

गौरतलब है कि श्रीपंच तेरह भाई त्यागी आश्रम खाक चौक हरिद्वार के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित आश्रमों में से एक माना जाता है। यह आश्रम अपने धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए सदियों से जाना जाता रहा है। अखाड़ा परिषद और संत समाज में इस आश्रम का एक विशिष्ट और सम्मानजनक स्थान है। ऐसे में जब इस आश्रम की संपत्ति और उसके भवनों के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आता है, तो स्वाभाविक रूप से यह मामला पूरे संत समाज और स्थानीय लोगों के बीच चिंता का विषय बन जाता है। खाक चौक क्षेत्र हरिद्वार के हृदय में स्थित है और यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत आते रहते हैं।

आश्रम के एक भवन के स्वामित्व को लेकर यह विवाद पिछले कुछ समय से सुर्खियों में बना हुआ था। इस दौरान अवैध कब्जे के आरोप भी सामने आए थे, जिन्होंने मामले को और अधिक जटिल बना दिया था। चूंकि श्रीमहंत बृजमोहन दास उस समय हरिद्वार में मौजूद नहीं थे और वे किसी अन्य कार्यवश बाहर गए हुए थे, इसलिए उनके समर्थकों और आश्रम से जुड़े लोगों में इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि आखिरकार इस विवाद का वास्तविक सच क्या है। मंगलवार को उनके लौटने और सीधे तौर पर बयान देने के बाद अब इस मामले में आश्रम प्रबंधन का आधिकारिक रुख स्पष्ट हो गया है।

श्रीमहंत बृजमोहन दास ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि मंदिर का भंडार कक्ष एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। भंडार कक्ष में मंदिर और आश्रम से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं, धार्मिक ग्रंथ और व्यवस्था से संबंधित सामग्रियां सुरक्षित रखी जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इसी भंडार कक्ष पर अपना अवैध कब्जा जमाने की नीयत से काम कर रहे हैं, जो कि आश्रम की परंपराओं और नियमों के पूर्णतः विपरीत है। श्रीमहंत ने कहा कि वे इस षड्यंत्र को सफल नहीं होने देंगे और आश्रम की संपत्ति की रक्षा के लिए हर संभव वैध कदम उठाए जाएंगे।

इस विवाद ने हरिद्वार के संत समाज और स्थानीय निवासियों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। श्रीपंच तेरह भाई त्यागी आश्रम जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के केंद्रों में इस प्रकार के संपत्ति विवाद अक्सर प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियां पैदा करते हैं। हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अवैध कब्जे के आरोप लगाने वाले पक्ष की ओर से श्रीमहंत के इस ताजा बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी जाएगी। फिलहाल, दोनों ही पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और मामले की सच्चाई को लेकर स्थिति में अनिश्चितता बनी हुई है।

श्रीमहंत बृजमोहन दास ने संत समाज और आम श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बिना पूरी जानकारी के किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आश्रम की व्यवस्था पूरी तरह से सुचारू है और परंपराओं के अनुसार ही सभी कार्य संपन्न किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की जमीन और भवनों पर केवल उन्हीं का अधिकार है जिन्हें परंपरा और नियमों के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अब देखना यह होगा कि इस संपत्ति विवाद का अंतिम निपटारा किस दिशा में होता है। क्या यह मामला आपसी सहमति और संत समाज के हस्तक्षेप से सुलझ पाएगा, या फिर इसे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर ले जाया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस विवाद से जुड़ी कोई नई और पुख्ता जानकारी सामने आएगी, उसे तत्काल प्रसारित किया जाएगा। फिलहाल, श्रीमहंत बृजमोहन दास के इस बयान के बाद खाक चौक आश्रम विवाद में एक नया मोड़ आ गया है और सभी की निगाहें अब विरोधी पक्ष की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।