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‘I sang for Shahrukh-Salman, but never met them’ | ‘शाहरुख-सलमान के लिए गाया, लेकिन कभी मिला नहीं’: सिंगर देव नेगी बोले- अमूमन म्यूजिक डायरेक्टर-गीतकार से मिलते हैं एक्टर्स, हम बस उनके लिए गाते हैं


15 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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सलमान खान की फिल्म ‘सिकंदर’ के दो गाने ‘जोहरा जबीन’ और ‘बम बम भोले’ इन दिनों यूट्यूब पर खूब ट्रेंड कर रहे हैं। इन गानों को गाने वाले सिंगर देव नेगी ने हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने फिल्म ‘सिकंदर’ के गाने और करियर समेत पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा की। सिंगर ने बताया कि फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ में शाहरुख खान के लिए भी गा चुके हैं, लेकिन अभी तक व्यक्तिगत रूप से दोनों खान के साथ उनकी मुलाकात नहीं हुई है। पेश है बातचीत के कुछ और खास अंश..

फिल्म ‘सिकंदर’ के गानों के बारे में बताएं?

यह फिल्म और इस फिल्म के गाने मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इस फिल्म के मेरे दो गाने ‘जोहरा जबीन’ और ‘बम बम भोले’ रिलीज हो चुके हैं। जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। इस फिल्म के गाने के लिए पूरा श्रेय संगीतकार प्रीतम दा को देना चाहूंगा। सलमान भाई के लिए पहले भी मैं फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ और ‘किक’ में गा चुका हूं।

फिल्म में गाने का मौका कैसे मिला?

प्रीतम दा से मेरी मुलाकात फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के दौरान हुई थी। प्रीतम दा ऐसे लड़के की तलाश कर रहे थे जो कुमाऊनी जानता हो। मेरे एक राइटर मित्र मनोज यादव ने प्रीतम दा को मेरे बारे में बताया था। मेरे यहां फूल देही का एक त्योहार होता है। उसी पर मैंने चार लाइन लिखी और उसी गाने को गाया। इस फिल्म से प्रीतम दा के कैंप में मेरी एंट्री हो गई।

प्रीतम दा के साथ मैं कुछ ना कुछ काम करता रहता हूं। ‘जब हैरी मेट सेजल’ में एक गाना ‘बटरफ्लाई’ गाया था, जो शाहरुख सर पर फिल्माया गया था। फिर उनके लिए ‘छिछोरे’ और ‘चंदू चैंपियन’ में गाया। यह सिलसिला बढ़ते-बढ़ते ‘सिकंदर’ तक आ पहुंचा। अभी आगे और भी अच्छे-अच्छे प्रोजेक्ट हैं।

सलमान खान से कभी मुलाकात हुई, अपने गानों को लेकर कभी कोई सुझाव दिया हो?

सलमान भाई से मेरी मुलाकात फिल्म ‘लव यात्री’ की म्यूजिक लॉन्च के दौरान हुई थी। उस समय फिल्म के सभी सिंगर थे। सलमान भाई म्यूजिक लॉन्च इवेंट की मेजबानी कर रहे थे। उस समय सिर्फ हाय हैलो तक बात हुई थी, लेकिन अभी तक उनसे ऐसी मुलाकात नहीं हुई, जिससे किसी गाने पर उन्होंने अपना कुछ सुझाव दिया हो। उम्मीद करते हैं कि सलमान भाई से जल्दी मुलाकात हो। उनको मिलना भी होता है तो म्यूजिक डायरेक्टर और गीतकार से मिलते हैं। हम तो यही सोचते हैं कि उनकी स्टाइल में किस तरह से गाना है।

करियर का टर्निंग पॉइंट कौन सा सॉन्ग था?

‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ का टाइटल ट्रैक सॉन्ग मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट सॉन्ग था। यह फिल्म 2017 में रिलीज हुई थी। वह साल मेरे करियर का सबसे अच्छा साल रहा है। उसी साल फिल्म ‘जुड़वां 2’ का ‘टन टना टन, ‘बरेली की बर्फी’ की का सॉन्ग ‘स्वीटी तेरा ड्रामा, ‘जब हैरी मेट सेजल’ का सॉन्ग ‘बटरफ्लाई’ रिलीज हुई थी। 2017 मेरे करियर के लिए सबसे अच्छा साल रहा है।

किसी सिंगर के पहले गाए गीत को दोबारा गाने में कितना चैलेंज रहता है?

बहुत ही चैलेंज रहता है। जुड़वां(1997) में ‘टन टना टन’ सॉन्ग को अभिजीत सर ने गाया था। जिस गाने को बचपन से सुनते आ रहे हैं। उसे अपनी आवाज में गाना बहुत बड़ा चैलेंज होता है, लेकिन हमारी कोशिश यही रहती है कि उस गाने में सिंगर की झलक ना दिखे। हालांकि यह बहुत मुश्किल काम होता है।

आपके परिवार का संगीत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं, फिर आपका संगीत की तरफ रुझान कैसे हुआ?

पिता जी आर्मी में थे। संगीत का तो दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। मेरे गांव में शिवजी का एक मंदिर है। गांव के बुजुर्ग लोग भजन-कीर्तन किया करते थे, मैं वहीं पर मंजीरा बजाया करता था। मुझे लगता है कि वहीं से म्यूजिक की तरफ मेरा झुकाव हुआ। उस समय संगीत के बारे में कोई जानकारी नहीं थीं, लेकिन मैंने ठान लिया था कि सिंगर ही बनना है।

फिर म्यूजिक आपने उत्तराखंड में ही सीखी?

नहीं, उत्तराखंड में तो म्यूजिक सीखने का कोई स्कोप नहीं था। मैंने पंजाब जालंधर के ‘एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स’ से संगीत में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद श्री विनोद वर्मा जी से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा।

मुंबई कब आए और पहला ब्रेक कैसे मिला था?

मुंबई 2010 में आ गया था। यहां किसी को नहीं जानता था। ब्रेक मिलने की बात तो दूर, लोगों तक पहुंचना ही बहुत मुश्किल था। उस समय मीरा रोड में एक मित्र के साथ रहता था। लोकल ट्रेन से ही अंधेरी आता था। लोकल ट्रेन में इतनी भीड़ होती थी कि एक दिन मेरा शर्ट ही फट गया। वहां से फिर अंधेरी शिफ्ट हो गया। स्टूडियो में रोज चक्कर लगाता था। छोटे- छोटे भजन से शुरुआत हुई। उसके बाद टीवी सीरियल के लिए आलाप, टाइटल ट्रैक गाने शुरू किए। फिल्मों में पहला ब्रेक ‘अंकुर अरोड़ा मर्डर केस’ में मिला, लेकिन इस फिल्म से कुछ खास फायदा नहीं मिला।



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