चुनाव के तुरंत बाद लालू परिवार में भूचाल: जीवनदान देने वाली बेटी रोहिणी ने छोड़ा परिवार और पार्टी, तेजप्रताप के बाद नई टूट की आहट

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पटना–:बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में टूट की स्थिति पैदा हो गई है। लालू यादव को 2022 में किडनी दान देकर जीवनदान देने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी—दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी देकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।

तीन महीने से चल रहा पावर क्लैश खुलकर सामने आया–:लालू परिवार में बीते तीन महीनों से ‘पावर क्लैश’ की चर्चा जोरों पर थी।शुरुआत तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के बीच विवाद से हुई।इसके बाद मीसा भारती और रोहिणी की तेजस्वी से नाराज़गी को लेकर खबरें चर्चा में रहीं।

हालाँकि चुनाव प्रचार के दौरान लालू यादव के हस्तक्षेप से मामला ठंडा पड़ गया था। लेकिन चुनाव ख़त्म होते ही पारिवारिक कलह फिर सतह पर आ गई।

तेजप्रताप के बाद अब रोहिणी भी तेजस्वी के खिलाफ खुलकर मुखर–:रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में संकेत दिए हैं कि परिवार के भीतर उनकी बात को महत्व नहीं दिया जा रहा था। पहले से ही भाई तेजप्रताप तेजस्वी के नेतृत्व से असहमत रहे हैं। अब रोहिणी के परिवार छोड़ने से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि—

क्या तेजस्वी की बढ़ती ताकत से बिखर रहा है लालू का कुनबा?अंदरखाने से यह भी चर्चा है कि मीसा भारती भी जल्द कोई बड़ा निर्णय ले सकती हैं।लालू परिवार में कुल 12 सदस्य हैं, जिनमें से 8 सीधे राजनीति में सक्रिय हैं।

लालू यादव दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं–:राबड़ी देवी तीन बार सीएम रहींतेजस्वी दो बार डिप्टी सीएम रहेतेजप्रताप दो बार मंत्री रहेमीसा भारती राज्यसभा और अब लोकसभा सांसद हैंऐसे में कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तेजस्वी यादव के हाथों में लगातार अधिक शक्ति के केंद्रीकरण से परिवार के अन्य सदस्यों में असंतोष बढ़ रहा है।

राजनीतिक प्रभाव बड़ा, संकेत खतरनाक–:रोहिणी का इस्तीफा न सिर्फ पारिवारिक टूट है, बल्कि RJD के लिए भी बड़ा संदेश है।क्योंकि रोहिणी वह बेटी हैं जिन्होंने लालू को जीवनदान देकर परिवार में सबसे ज्यादा भावनात्मक महत्व अर्जित किया था।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो लालू परिवार की यह टूट RJD की राजनीति और संगठन दोनों पर गंभीर असर डाल सकती है।

आगे क्या होता है—अब सबकी निगाहें खुद लालू यादव के फैसले पर टिकी हैं।

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