जालौन की गौशाला में गौवंशों की हालत पर उठे सवाल, इलाज और हरे चारे की व्यवस्था को लेकर शिकायत


जालौन ब्लॉक क्षेत्र के लौना गांव स्थित गौशाला में गौवंशों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर से सामने आई जानकारी के अनुसार गौशाला में कुछ गौवंश कमजोर और बीमार अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने गौवंशों के नियमित उपचार, हरे चारे और पौष्टिक आहार की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवश्यकता पड़ने पर गौशाला में पशु चिकित्सक के समय पर नहीं पहुंचने के कारण बीमार गौवंशों को उपचार मिलने में परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि यदि बीमार पशुओं की नियमित जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाए तो उनकी स्थिति में सुधार हो सकता है।
हरे चारे की व्यवस्था को लेकर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायत सामने आई है कि गौशाला में गौवंशों को मुख्य रूप से सूखा भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं लंबे समय से हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात कही जा रही है।
गौवंशों के लिए चोकर और अन्य पौष्टिक आहार की उपलब्धता को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गौशाला में पर्याप्त पौष्टिक आहार की व्यवस्था होने से कमजोर एवं बीमार गौवंशों को राहत मिल सकती है।
जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद अब निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौशाला में नियमित रूप से पशुओं की स्थिति की जांच और उपलब्ध सुविधाओं की निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसी भी गौवंश के उपचार या भोजन में लापरवाही न हो।
मामले में अब स्थानीय लोगों की नजर संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर है। लोगों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और यदि किसी स्तर पर कमी पाई जाती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।
जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
गौशाला में गौवंशों के उपचार, हरे चारे, भूसे और चोकर की वास्तविक उपलब्धता तथा पशु चिकित्सकीय सेवाओं की स्थिति की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बीमार गौवंशों का तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा आवश्यकता के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही गौशाला में पर्याप्त हरा चारा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग के अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर लौना गांव की गौशाला का निरीक्षण कब करते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




