जबलपुर: आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बाद भी निजी अस्पताल ने मांगे 40 हजार रुपये, कैंसर मरीज की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा, FIR और लाइसेंस रद्द करने की मांग

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में एक निजी अस्पताल में कैंसर पीड़ित मरीज की मौत के बाद गंभीर विवाद सामने आया है। मृतक के परिजनों और मित्रों ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं में धोखाधड़ी करने और ऑपरेशन के बाद भी 40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग करने का आरोप लगाया है। इस घटना को लेकर परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के साथ-साथ अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई है। यह पूरा मामला जबलपुर के हैदराबाद स्थित ओमेगा हॉस्पिटल का है, जहां सालीवाड़ा निवासी उमेश झरिया नामक मरीज का इलाज चल रहा था।
मिली जानकारी के अनुसार, सालीवाड़ा क्षेत्र में रहने वाले उमेश झरिया कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उनके इलाज के लिए उन्हें 23 सितंबर को जबलपुर के हैदराबाद इलाके में स्थित ओमेगा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मृतक के मित्र सुनील चौधरी और रामेश्वर साहू ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उमेश झरिया का ऑपरेशन किया गया था। उनका कहना है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत होना था, जिसमें पात्र मरीजों का इलाज निशुल्क या निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। परिजनों और मित्रों का दावा है कि उन्होंने अस्पताल में भर्ती के समय ही आयुष्मान योजना से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी अस्पताल प्रबंधन को उपलब्ध करा दी थी, ताकि मरीज को योजना का पूरा लाभ मिल सके।
हालांकि, सुनील चौधरी और रामेश्वर साहू ने बताया कि ऑपरेशन संपन्न होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अचानक अपना रुख बदल लिया। उनका आरोप है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उनसे 40 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की। मित्रों का कहना है कि जब उन्होंने इस मांग का विरोध किया और आयुष्मान योजना के नियमों का हवाला दिया, तो अस्पताल की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी बीच, अस्पताल में भर्ती उमेश झरिया की मौत हो गई। मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
मृतक के मित्र सुनील चौधरी और रामेश्वर साहू ने इस मामले में अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक बोझ से मुक्त करने के लिए बनाई गई है, लेकिन ओमेगा हॉस्पिटल जैसे निजी अस्पताल इस योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं और मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर अस्पताल प्रबंधन ने समय पर और सही तरीके से इलाज किया होता तथा योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं में कोई बाधा नहीं डाली होती, तो शायद मरीज की जान बच सकती थी।
परिजनों और मित्रों ने इस पूरे मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है। उन्होंने मांग की है कि ओमेगा हॉस्पिटल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से अपील की है कि ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए, जो सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी करते हैं और मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। उनका कहना है कि यदि इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया, तो भविष्य में भी अन्य गरीब मरीजों के साथ इसी प्रकार की धोखाधड़ी और लापरवाही होती रहेगी।
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जिसमें गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर के इलाज और सर्जरी भी शामिल होती हैं। ऐसे में, यदि किसी सूचीबद्ध अस्पताल द्वारा योजना के तहत भर्ती मरीज से अतिरिक्त शुल्क की मांग की जाती है, तो यह योजना के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन माना जाता है। जबलपुर में हुई यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि निजी अस्पतालों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को और अधिक सख्त किए जाने की आवश्यकता है।
वहीं, इस पूरे मामले में ओमेगा हॉस्पिटल प्रबंधन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अस्पताल प्रशासन इन आरोपों का क्या जवाब देता है या 40 हजार रुपये की मांग किस आधार पर की गई थी। फिलहाल, परिजनों द्वारा की गई FIR दर्ज करने और अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग को लेकर जबलपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से किसी औपचारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हो पाई है। जांच एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, यह देखना होगा।
यह घटना जबलपुर शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आम जनता और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों में इस तरह की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। मृतक उमेश झरिया के परिजनों को न्याय दिलाने और दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।

