Mon, 05 Oct 20268:46 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

जबलपुर: बरेला में अचानक रुका मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय और निशुल्क कोचिंग दे रहे युवा का किया सम्मान

WhatsAppFacebookX

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को जबलपुर दौरे के दौरान एक ऐसा कदम उठाया जिसने स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुख्यमंत्री का सरकारी काफिला जबलपुर की ओर सड़क मार्ग से आ रहा था, तभी बरेला क्षेत्र में उनका काफिला अचानक रुक गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने वाहन से उतरे और सीधे सड़क किनारे स्थित एक साधारण चाय की दुकान पर पहुंच गए। यह घटनाक्रम इतना सहज और अप्रत्याशित था कि वहां मौजूद लोग कुछ पलों के लिए आश्चर्यचकित रह गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बरेला में शारदा माता मंदिर के ठीक सामने सड़क किनारे लगी ‘अग्रवाल होटल’ नामक चाय की दुकान पर रुके। उन्होंने यहीं बैठकर आम नागरिकों की तरह चाय पी और कुछ समय बिताया। मुख्यमंत्री के इस अचानक रुकने और एक साधारण ढाबे पर चाय पीने के फैसले ने उनकी जनता से जुड़ाव की छवि को और भी प्रबल कर दिया। इस दौरान उन्होंने दुकानदार और आसपास मौजूद लोगों से संक्षिप्त बातचीत भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सड़क मार्ग से जबलपुर आने की सूचना पहले से ही स्थानीय स्तर पर मिल गई थी। जैसे ही यह खबर बरेला और आसपास के क्षेत्रों में फैली, बड़ी संख्या में स्थानीय जनता उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उतर आई। विशेष रूप से बरेला में शारदा माता मंदिर के सामने भारी तादाद में लोग एकत्र हो गए थे। जनता अपने मुख्यमंत्री की एक झलक पाने और उनका अभिवादन करने के लिए उत्साहित थी। मुख्यमंत्री ने भी लोगों के इस स्नेह और उत्साह का हाथ हिलाकर जवाब दिया और उनका अभिवादन स्वीकार किया।

इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे एक युवा का विशेष रूप से सम्मान भी किया। यह युवा जबलपुर क्षेत्र में गरीब और जरूरतमंद छात्रों को निशुल्क कोचिंग (फ्री कोचिंग) देने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस युवा की पहल की सराहना करते हुए उसे सम्मानित किया। निशुल्क कोचिंग दे रहे इस युवा का सम्मान किए जाने से स्थानीय स्तर पर शिक्षा के प्रति समर्पित लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शिक्षा के महत्व और समाज में इसके योगदान पर जोर दिया।

बरेला में शारदा माता मंदिर के पास मुख्यमंत्री के काफिले के रुकने से कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के आसपास उचित घेरा बनाए रखा, हालांकि डॉ. मोहन यादव ने अपना पूरा समय बेहद सहज और आम लोगों के बीच बिताया। अग्रवाल होटल पर चाय पीने के बाद उन्होंने युवा का सम्मान किया और फिर अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। एक तरफ जहां उन्होंने सड़क किनारे के एक छोटे से ढाबे पर रुककर चाय पी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने निशुल्क शिक्षा प्रदान करने वाले युवा को सम्मानित कर समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का इस तरह अचानक किसी स्थानीय जगह पर रुकना और आम जनता के बीच जाना उनके प्रशासनिक और जनसंपर्क के तरीके को दर्शाता है।

जबलपुर के बरेला क्षेत्र में हुई इस पूरी घटना ने स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। अग्रवाल होटल के संचालक और वहां मौजूद अन्य लोगों के लिए यह एक यादगार अनुभव रहा। मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के बाद भी शारदा माता मंदिर के पास लोगों की भीड़ काफी देर तक मौजूद रही। लोग आपस में मुख्यमंत्री की सादगी और उनके द्वारा दिए गए सम्मान की चर्चा करते नजर आए। निशुल्क कोचिंग दे रहे युवा के सम्मान ने अन्य युवाओं को भी समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे हैं और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। जबलपुर आगमन के दौरान बरेला में हुए इस अनपेक्षित पड़ाव ने उनके दौरे को एक अलग ही रंग दे दिया। स्थानीय प्रशासन ने भी मुख्यमंत्री के दौरे को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई। हालांकि, काफिले के अचानक रुकने का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में शामिल नहीं होना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री ने यह निर्णय स्वयं और सहजता से लिया।

कुल मिलाकर, सोमवार को जबलपुर के बरेला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शारदा माता मंदिर के सामने अग्रवाल होटल पर रुकना, चाय पीना और निशुल्क कोचिंग संचालित करने वाले युवा का सम्मान करना दिन भर की सबसे प्रमुख खबरों में शामिल रहा। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने वाले जनप्रतिनिधि जब जमीनी स्तर पर आम लोगों के बीच पहुंचते हैं, तो उसका प्रभाव समाज पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।