जबलपुर में बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ युवा कांग्रेस और नागरिकों ने किया कोतवाली थाने का घेराव, उखरी चौकी वापस लाने की मांग

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में लगातार बिगड़ती जा रही कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के खिलाफ सोमवार को युवा कांग्रेस और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर करीब चार बजे सैकड़ों की संख्या में जुटे लोगों ने कोतवाली थाने का घेराव कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने थाना परिसर में पहुंचकर अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें शहर के विभिन्न इलाकों में हो रही गैरकानूनी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से उखरी चौकी को वापस उसी स्थान पर स्थापित करने की पुरजोर मांग उठाई, जिसे पूर्व में हटा लिया गया था।
प्रदर्शन में शामिल लोगों और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बताया कि चेरीताल, दीक्षितपुरा, सराफा बाजार और उखरी जैसे संवेदनशील इलाकों में पिछले कुछ समय से आपराधिक घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। इन क्षेत्रों में चाकूबाजी, चेन स्नेचिंग, चोरी और अवैध सट्टेबाजी जैसी गंभीर वारदातें आम हो गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन लगातार हो रही घटनाओं के कारण पूरे इलाके में दहशत और भय का माहौल व्याप्त है। लोग अपने घरों से निकलने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खास तौर पर शाम ढलने के बाद महिलाओं, बुजुर्गों और कारोबारियों के लिए इन बाजारों और गलियों से गुजरना अत्यंत जोखिम भरा हो गया है।
ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उखरी चौकी को हटाए जाने के बाद से इस क्षेत्र में अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं। पुलिस चौकी न होने के कारण बदमाशों को खुलेआम गैरकानूनी गतिविधियां चलाने की छूट मिल गई है। अवैध सट्टेबाजी का धंधा दिन-दोगुनी और रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के युवाओं पर पड़ रहा है। सट्टेबाजी के लेनदेन को लेकर आए दिन विवाद होते हैं, जो कई बार चाकूबाजी और मारपीट जैसी हिंसक घटनाओं का रूप ले लेते हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि उखरी चौकी को पुनः शुरू नहीं किया गया, तो स्थिति और अधिक नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
कोतवाली थाने के घेराव के दौरान युवा कांग्रेस के नेताओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बढ़ते अपराधों के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। चेरीताल और दीक्षितपुरा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में चेन स्नेचिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी या अपराधों पर अंकुश लगाने में पुलिस विफल साबित हो रही है। सराफा बाजार जैसे व्यापारिक केंद्र में चोरी की वारदातों ने व्यापारी वर्ग को भी चिंता में डाल दिया है। व्यापारियों और आम जनता दोनों ही पुलिस से बेहतर पेट्रोलिंग और सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ-साथ चेरीताल, दीक्षितपुरा, सराफा बाजार और उखरी क्षेत्र के बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, व्यापारी और समाजसेवी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में यह मांग रखी कि पुलिस प्रशासन को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत रूप से इन क्षेत्रों का दौरा करें और जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का जायजा लें।
प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद कोतवाली थाने के पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन स्वीकार किया। पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाई गई सभी मांगों और शिकायतों को उच्चाधिकारियों तक तत्काल प्रेषित किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, उखरी चौकी को वापस लाने की मांग पर पुलिस अधिकारियों ने कोई तत्काल लिखित आश्वासन देने से परहेज किया, लेकिन उन्होंने मामले को प्रशासनिक स्तर पर उठाने की बात कही।
जबलपुर शहर मध्य प्रदेश का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शहर है, जहां व्यापारिक गतिविधियां बहुत तेजी से होती हैं। सराफा बाजार, चेरीताल और दीक्षितपुरा जैसे क्षेत्र शहर के सबसे पुराने और व्यस्ततम इलाकों में गिने जाते हैं। इन इलाकों में हर दिन हजारों की तादाद में लोग खरीदारी और अन्य कामों के लिए आते हैं। ऐसे में यदि इन संवेदनशील क्षेत्रों में कानून व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहती है, तो इसका सीधा प्रभाव शहर की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ता है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया और अपराधों की श्रृंखला नहीं रुकी, तो वे भविष्य में और भी बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, कोतवाली थाने पर हुए इस घेराव के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में कितना सुधार होता है।

