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Sun, Oct 4, 2026Updated 2:42 PM IST
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जबलपुर में डॉक्टर अपॉइंटमेंट APK फाइल के जरिए साइबर ठगी: तीन लोगों से 3.85 लाख रुपये लूटे, पुलिस ने दर्ज की FIR

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में साइबर अपराधियों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की नियुक्ति (अपॉइंटमेंट) के नाम पर नए प्रकार की ठगी को अंजाम देने का मामला प्रकाश में आया है। साइबर बदमाशों ने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने के बहाने पीड़ितों को एंड्रॉइड पैकेज किट (APK) फाइल डाउनलोड कराकर उनके बैंक खातों से अवैध तरीके से राशि ट्रांसफर कर ली। जबलपुर पुलिस के अनुसार, इस प्रकार की ठगी के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जिनमें कुल मिलाकर तीन व्यक्तियों से 3.85 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इनमें से एक मामले में तो अकेले 2.75 लाख रुपये की चपत लगाई गई है। पुलिस ने सभी मामलों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हनुमानताल थाना क्षेत्र में रहने वाले 50 वर्षीय स्वतंत्र जैन ने बीती शाम हनुमानताल पुलिस स्टेशन पहुंचकर साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। स्वतंत्र जैन ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने की आवश्यकता थी। इस दौरान उनका संपर्क संदिग्ध व्यक्तियों से हुआ, जिन्होंने खुद को स्वास्थ्य सेवा प्रदाता या संबंधित कर्मचारी बताते हुए अपॉइंटमेंट तय करने का झांसा दिया। आरोपियों ने स्वतंत्र जैन को निर्देश दिया कि वे अपने मोबाइल फोन पर एक विशेष APK फाइल डाउनलोड करें, जिसके बिना अपॉइंटमेंट की पुष्टि नहीं हो सकती है। अनजाने में और इलाज की जल्दबाजी में स्वतंत्र जैन ने उक्त फाइल डाउनलोड कर ली। जैसे ही यह फाइल उनके स्मार्टफोन में इंस्टॉल हुई, वैसे ही उनके बैंक खाते से 2.75 लाख रुपये की राशि अज्ञात खातों में ट्रांसफर हो गई। जब उन्हें बैंक से एसएमएस अलर्ट प्राप्त हुए, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद वे तुरंत हनुमानताल थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्वतंत्र जैन का मामला इस गिरोह द्वारा की गई ठगी का सबसे बड़ा ताजा उदाहरण है, लेकिन यह कोई इकलौती घटना नहीं है। जबलपुर में हाल ही में इसी मोडस ऑपरेंडी का उपयोग करते हुए दो अन्य व्यक्तियों को भी निशाना बनाया गया है। इन तीनों मामलों को मिलाकर देखें तो पीड़ितों से कुल 3.85 लाख रुपये की ठगी की जा चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि तीनों ही मामलों में ठगी का तरीका समान रहा है। आरोपी पहले पीड़ितों को डॉक्टर की अपॉइंटमेंट या स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लालच देते हैं या उनकी किसी चिकित्सीय जरूरत का फायदा उठाते हैं। इसके बाद विश्वास जीतने के लिए वे पीड़ितों को एक लिंक भेजते हैं या सीधे APK फाइल साझा करते हैं, यह कहते हुए कि यह ऐप अपॉइंटमेंट बुकिंग, टोकन जनरेट करने या मेडिकल रिकॉर्ड देखने के लिए अनिवार्य है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि APK फाइल के माध्यम से की जाने वाली ठगी वर्तमान में साइबर अपराधियों का एक खतरनाक हथियार बन चुकी है। जब कोई उपयोगकर्ता प्ले स्टोर के बाहर से किसी अनजान स्रोत से APK फाइल डाउनलोड करता है, तो वह फाइल अक्सर मैलवेयर या स्पाईवेयर से ग्रस्त होती है। इसे इंस्टॉल करते ही यह फाइल मोबाइल के महत्वपूर्ण डेटा, एसएमएस, बैंकिंग ऐप्स के नोटिफिकेशन और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) तक पहुंच बना लेती है। इससे अपराधियों को बिना पीड़ित की जानकारी के बैंक खातों से लेनदेन करने की छूट मिल जाती है। जबलपुर के तीनों मामलों में भी तकनीकी विश्लेषण से यही पुष्टि हुई है कि पीड़ितों के फोन में इंस्टॉल की गई फाइल ने ही उनके वित्तीय लेनदेन को समझौताग्रस्त किया।

जबलपुर पुलिस ने तीनों मामलों में भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस टीम अब डिजिटल फोरेंसिक जांच के माध्यम से उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और आईपी एड्रेस का पता लगाने में जुटी है जिनका उपयोग इन ठगों द्वारा किया गया। पुलिस का मानना है कि ये तीनों मामले किसी संगठित साइबर अपराध गिरोह का काम हो सकते हैं जो विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। चूंकि डॉक्टर की अपॉइंटमेंट लेने वाले व्यक्ति अक्सर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण मानसिक तनाव में होते हैं, इसलिए वे सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी कर जल्दबाजी में ऐसे लिंक या फाइल डाउनलोड कर लेते हैं, जिसका फायदा ये अपराधी उठाते हैं।

पुलिस ने जबलपुर के नागरिकों से अपील की है कि वे डॉक्टर की अपॉइंटमेंट या किसी भी स्वास्थ्य सेवा के लिए केवल आधिकारिक अस्पतालों, क्लीनिकों या सत्यापित हेल्थकेयर ऐप्स का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक या APK फाइल को कभी भी डाउनलोड न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के जरिए अपॉइंटमेंट के नाम पर ऐसी फाइल डाउनलोड करने का दबाव डाले, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और संबंधित अस्पताल या क्लीनिक के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करके जानकारी की पुष्टि करें। साथ ही, यदि किसी को इस प्रकार की ठगी का अनुभव होता है, तो वे तत्काल स्थानीय साइबर सेल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और अन्य लोगों को इस तरह के अपराधों से बचाया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे इन मामलों की गहनता से जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।