जहानाबाद: DM छिरिड़ वाई भूटिया ने मखदुमपुर के मध्य विद्यालय का किया औचक निरीक्षण, बच्चों के साथ बैठकर खाया मिड-डे मील और कम उपस्थिति पर जताई नाराजगी

जहानाबाद। वंदे भारत न्यूज़। बिहार के जहानाबाद जिले में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार सख्ती बरती जा रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को जहानाबाद की जिला पदाधिकारी छिरिड़ वाई भूटिया ने मखदुमपुर प्रखंड स्थित एक मध्य विद्यालय का अचानक औचक निरीक्षण किया। इस सरप्राइज इंस्पेक्शन के दौरान उन्होंने विद्यालय में संचालित होने वाली विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से जायजा लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिला पदाधिकारी ने विद्यालय में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) ग्रहण किया और भोजन की गुणवत्ता की खुद जांच की। इसके अलावा, उन्होंने विद्यालय में छात्र-छात्राओं की कम उपस्थिति (अटेंडेंस) पर गहरी नाराजगी भी व्यक्त की।
मंगलवार को जिला पदाधिकारी छिरिड़ वाई भूटिया का मखदुमपुर के मध्य विद्यालय में अचानक पहुंचना स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था। बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में शैक्षणिक माहौल, बच्चों की उपस्थिति और सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का वास्तविक आकलन करना था। डीएम के पहुंचते ही विद्यालय में हड़कंप मच गया और अधिकारियों तथा शिक्षकों ने उन्हें विद्यालय की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देनी शुरू की।
निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने सबसे पहले मध्याह्न भोजन योजना की जांच की। यह योजना बिहार सहित पूरे देश में सरकारी विद्यालयों के बच्चों के पोषण और नामांकन बढ़ाने के लिए चलाई जाती है। डीएम छिरिड़ वाई भूटिया ने केवल रसोईघर का मुआयना करके संतोष नहीं किया, बल्कि वे सीधे बच्चों के बीच गईं और उनके साथ बैठकर मध्याह्न भोजन खाया। उन्होंने भोजन का स्वाद और उसकी गुणवत्ता को खुद परखा। इस दौरान उन्होंने बच्चों से बातचीत कर यह भी जानने का प्रयास किया कि क्या उन्हें प्रतिदिन समय पर और अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन मिलता है या नहीं। बच्चों के साथ बैठकर खाना खाने के उनके इस कदम से विद्यालय के छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला, वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश भी गया कि मिड-डे मील की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता जांचने के बाद जिला पदाधिकारी ने विद्यालय के उपस्थिति पंजीकरण (अटेंडेंस रजिस्टर) का गहन अवलोकन किया। इस दौरान जब उन्होंने पाया कि विद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की तुलना में दैनिक उपस्थिति काफी कम है, तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कम अटेंडेंस को लेकर उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक और वहां मौजूद शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा। डीएम ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं आएंगे, तो उनकी शिक्षा प्रभावित होगी और सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उन तक ठीक से नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाएं और जो बच्चे विद्यालय आने से कतरा रहे हैं, उनके अभिभावकों से संवाद स्थापित करें।
बता दें कि जहानाबाद जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर ऐसे औचक निरीक्षण किए जाते रहे हैं। जिला पदाधिकारी छिरिड़ वाई भूटिया ने अपने कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। मखदुमपुर प्रखंड के इस मध्य विद्यालय में किए गए निरीक्षण से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन अब केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी हकीकत को स्वयं परखने में विश्वास रखता है।
इस सरप्राइज इंस्पेक्शन के दौरान डीएम ने विद्यालय के बुनियादी ढांचे, साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था और शौचालयों की स्थिति का भी जायजा लिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, लेकिन यह माना जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पाई गई होंगी, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए होंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिला पदाधिकारी के इस औचक निरीक्षण के बाद मखदुमपुर प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे जहानाबाद जिले के अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों में भी सतर्कता आ गई है। सभी विद्यालयों को यह संदेश दिया गया है कि मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति और विद्यालय की साफ-सफाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी जिला प्रशासन द्वारा इस तरह के अनपेक्षित निरीक्षण जारी रहेंगे, ताकि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें। जिला पदाधिकारी के इस कदम की स्थानीय लोगों और अभिभावकों द्वारा भी सराहना की जा रही है, क्योंकि इससे सरकारी तंत्र में जवाबदेही तय होने की उम्मीद जगी है।

