जहानाबाद: यमुना-दरधा संगम घाट पर विधि-विधान से हुई गंगा आरती, स्वच्छता अभियान के तहत बनारस की विशेष टीम ने कराया आयोजन

जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले में सोमवार को एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिले के यमुना-दरधा रिवर फ्रंट स्थित ऐतिहासिक संगम घाट पर गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया। यह पूरा कार्यक्रम ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत आयोजित किया गया था। इस विशेष अवसर पर बनारस (वाराणसी) से पहुंची एक विशेष टीम ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गंगा आरती संपन्न कराई। इस आयोजन में जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए, जिससे इस कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ गया।
सोमवार का दिन वैसे भी हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, ऐसे में पवित्र नदियों के संगम स्थल पर गंगा आरती का आयोजन होने से पूरे वातावरण में भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। यमुना और दरधा नदी के संगम पर स्थित इस घाट को लेकर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। बनारस से आई विशेष टीम ने ठीक उसी प्रकार की वैदिक विधियों और मंत्रोच्चारण के साथ आरती संपन्न कराई, जैसा कि काशी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन शाम को होता है। दीपों की रोशनी, धूप-अगरबत्ती की सुगंध और मंत्रों के उद्घोष ने संगम घाट को एक दिव्य रूप दे दिया।
‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के अंतर्गत इस आयोजन को जोड़ने का मुख्य उद्देश्य जनमानस में नदियों की स्वच्छता और उनके संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना था। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का लक्ष्य समाज के हर वर्ग को स्वच्छता से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि जब धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के संदेश के साथ जोड़ा जाता है, तो लोगों पर इसका अधिक सकारात्मक और स्थायी प्रभाव पड़ता है। गंगा आरती के माध्यम से न केवल आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराया गया, बल्कि यह संदेश भी दिया गया कि हमारी पवित्र नदियां स्वच्छ रहेंगी, तभी इनका धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व बना रहेगा।
इस अवसर पर जिले के विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान को लेकर पूरी तरह से सक्रिय और प्रतिबद्ध है। अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल एक दिवसीय अभियान नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने नदी के किनारे कचरा न फेंकने और जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर बल दिया।
बनारस से आई टीम के सदस्यों ने बताया कि वे देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर गंगा आरती के माध्यम से नदियों की स्वच्छता का संदेश देते हैं। जहानाबाद के यमुना-दरधा संगम घाट पर उन्हें आरती कराने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने एक सार्थक पहल बताया। टीम ने आरती की सभी विधियों, जैसे शंख नाद, घंटा ध्वनि और पारंपरिक भजनों का बखूबी निर्वाहन किया। उनकी इस प्रस्तुति ने स्थानीय लोगों को बनारस की गंगा आरती की झलक अपने ही जिले में देखने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया।
इस आयोजन में स्थानीय ग्रामीणों, धर्मगुरुओं और समाजसेवियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संगम घाट पर लोगों की भीड़ यह दर्शा रही थी कि जिले के लोग अपनी नदियों और धार्मिक परंपराओं से कितने गहराई से जुड़े हुए हैं। कई लोगों ने हाथों में दीप लेकर आरती में भाग लिया और नदी की स्वच्छता तथा क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यमुना-दरधा रिवर फ्रंट पर इस तरह के नियमित आयोजन होने चाहिए, जिससे यहां की धार्मिक महत्ता बनी रहे और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके।
ज्ञात हो कि यमुना और दरधा नदी का यह संगम स्थल जहानाबाद जिले की एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और धार्मिक पहचान है। ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत इस रिवर फ्रंट को चुना जाना इस बात का प्रतीक है कि अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों की नदियों पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पहले यह अभियान मुख्य रूप से बड़ी नदियों तक सीमित दिखाई देता था, लेकिन अब स्थानीय नदियों के संगम स्थलों पर भी ऐसे आयोजन हो रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिलाकर, सोमवार को जहानाबाद के यमुना-दरधा संगम घाट पर आयोजित यह गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रही, बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी। बनारस की विशेष टीम के मार्गदर्शन, जिला प्रशासन के सहयोग और स्थानीय जनता की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को पूर्ण रूप से सफल बनाया। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों से जिले के अन्य नदी तटों पर भी स्वच्छता अभियान को और अधिक गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

