रांची :पेसा कानून को लेकर झारखंड की राजनीति में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है। राजधानी रांची स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जैसे ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने शेड्यूल-5 क्षेत्रों में पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू किया, वैसे ही बीजेपी नेताओं के “पेट में दर्द” शुरू हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा कानून लागू होने से बीजेपी की कथित काली कमाई पर लगाम लगी है, इसी वजह से पार्टी बौखलाहट में बयानबाजी कर रही है।पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान पेसा कानून को लेकर “पांच पैसे का भी काम नहीं हुआ।” सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि उस समय जनजातीय उपजातियों से जुड़े निर्णय निजी स्वार्थों के तहत लिए गए।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को भी आड़े हाथों लेते हुए JMM नेता ने कहा कि वर्ष 2000 में जब बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें पेसा कानून की याद क्यों नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में आदिवासियों पर गोलियां चलाई जा रही थीं और आज वही लोग आदिवासियों की चिंता का दिखावा कर रहे हैं।सुप्रियो भट्टाचार्य ने दावा किया कि झारखंड की आदिवासी जनता बीजेपी की असलियत समझ चुकी है। वर्ष 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में जनता ने बीजेपी को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पहले बीजेपी दबाव बनाकर राज्य में माइनिंग लीज दिलवाती थी, लेकिन अब पेसा कानून के तहत ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था है और खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगा है।
अन्य राज्यों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पेसा कानून को लेकर क्या प्रावधान हैं। JMM नेता ने दावा किया कि पेसा कानून लागू होने से बीजेपी के सभी “आर्थिक खेल” बंद हो गए हैं।प्रेस वार्ता के अंत में JMM ने दोहराया कि पेसा कानून आदिवासियों के अधिकारों का सुरक्षा कवच है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा इसे लागू करना एक ऐतिहासिक कदम है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि बीजेपी चाहे जितना भी विरोध करे, झारखंड की आदिवासी जनता उनके साथ खड़ी नहीं होने वाली।















