Mon, 05 Oct 20268:46 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
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जोबट सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट: 250 से अधिक मरीज घंटों लाइन में खड़े, एक-दो डॉक्टरों के भरोसे चल रही ओपीडी

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मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के जोबट स्थित अमर शहीद छीतू किराड़ सिविल अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति सामने आई। खांसी, सर्दी, बुखार और अन्य विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 250 से अधिक मरीज इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें घंटों तक पंजीकरण काउंटर और ओपीडी के बाहर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। अस्पताल में मरीजों की इस भारी भीड़ के बीच केवल एक या दो डॉक्टरों पर पूरे ओपीडी का संचालन निर्भर रहा, जिसके कारण उपचार में भारी देरी हुई और मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोमवार का दिन अस्पताल में आए मरीजों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हुआ। मौसम में बदलाव के कारण क्षेत्र में खांसी, सर्दी और बुखार जैसे रोगों का प्रकोप बढ़ा हुआ है। ऐसे में बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग अपना इलाज करवाने के लिए जोबट के इस मुख्य सिविल अस्पताल पर निर्भर हैं। सुबह से ही अस्पताल परिसर में मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। दोपहर होते-होते यह संख्या 250 से अधिक हो गई। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को देखने और उनका उचित परीक्षण करने के लिए अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं थी। जानकारी के अनुसार, पूरे ओपीडी का कार्यभार मात्र एक या दो डॉक्टरों के कंधों पर था, जिसके चलते हर मरीज को अपनी बारी आने का लंबा इंतजार करना पड़ा।

अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर भी अव्यवस्था का माहौल दिखाई दिया। बीमार और कमजोर मरीज, जिनमें कई बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे, उन्हें घंटों तक लाइन में खड़े रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। सर्दी और बुखार से ठिठुरते हुए मरीज काउंटर पर अपने पंजीकरण की बारी का इंतजार करते रहे। जो मरीज पहले से ही बीमारी के कारण शारीरिक रूप से कमजोर थे, लंबी कतार में खड़े रहने से उनकी परेशानी और अधिक बढ़ गई। कई मरीजों को तो बैठने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं मिल पाई, जिससे वे फर्श पर ही बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

अमर शहीद छीतू किराड़ सिविल अस्पताल, जोबट क्षेत्र का एक प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहाँ आसपास के कई गाँवों और दूरदराज के इलाकों से लोग इलाज के लिए आते हैं। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क या बहुत कम खर्च में इलाज की सुविधा होने के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद यही अस्पताल होता है। हालांकि, सोमवार को जो स्थिति देखने को मिली, उसने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और जनशक्ति की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, तो अस्पताल प्रबंधन के पास उसे संभालने की कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आती।

एक या दो डॉक्टरों के भरोसे 250 से अधिक मरीजों का इलाज करना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है। इस स्थिति में डॉक्टरों पर भी काम का अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे वे प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। जल्दबाजी में किए गए परीक्षण से सही निदान में भी चूक होने की संभावना बनी रहती है। दूसरी ओर, मरीजों को घंटों इंतजार करने के बाद भी संतोषजनक उपचार नहीं मिल पाता, जिससे उनके मन में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति निराशा पैदा होती है।

जोबट और उसके आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की मांगें लगातार उठती रही हैं। बदलते मौसम में जब संक्रामक और मौसमी बीमारियां तेजी से फैलती हैं, तब अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की अतिरिक्त तैनाती की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। सोमवार को अस्पताल में देखी गई भीड़ और अव्यवस्था यह स्पष्ट करती है कि मौजूदा चिकित्सा स्टाफ मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुपात में पूरी तरह अपर्याप्त है। पंजीकरण काउंटर से लेकर डॉक्टर के कक्ष तक हर जगह मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं, जो स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ रहे अत्यधिक बोझ का प्रत्यक्ष प्रमाण थीं।

इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन या जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे या अस्पताल में अतिरिक्त चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। फिलहाल, जोबट के अमर शहीद छीतू किराड़ सिविल अस्पताल में सोमवार को हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता को सामने ला दिया है। मरीजों को उचित और समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।