विश्व आर्थिक मंच पर झारखण्ड की बेटियों की आत्मनिर्भरता का संदेश, महिला नेतृत्व और समावेशी विकास पर बोलेंगी कल्पना सोरेन

editor
3 Min Read

रांची–:विश्व आर्थिक सम्मेलन 2026 में पहली बार झारखण्ड की प्रभावी उपस्थिति दर्ज होने जा रही है। यह उपस्थिति केवल औद्योगिक संभावनाओं और निवेश अवसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर यह संदेश भी देगी कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होती हैं और विकास अधिक समावेशी व टिकाऊ बनता है।

झारखण्ड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष सह विधायक कल्पना सोरेन दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक और यूनाइटेड किंगडम की अपनी यात्रा के दौरान महिला नेतृत्व, लैंगिक समानता और समावेशी विकास से जुड़े उच्च स्तरीय मंचों पर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी। वे आदिवासी, ग्रामीण और आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाओं की वास्तविकताओं और आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए झारखण्ड की आधी आबादी की आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को दुनिया के सामने रखेंगी।

महिला सशक्तिकरण पर वैश्विक संवाद

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को कल्पना सोरेन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा करेंगी। वे ब्रिक्स महिला सशक्तिकरण पैनल, ईटी महिला सशक्तिकरण संवाद, एलायंस फॉर ग्लोबल गुड के ‘वी लीड’ मंच तथा भारत पवेलियन के आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी। इन मंचों पर वे स्पष्ट करेंगी कि झारखण्ड में महिला विकास केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण और संस्थागत भागीदारी पर आधारित है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं महिलाएं

दावोस में यह भी बताया जाएगा कि झारखण्ड राज्य आजीविका संवर्धन समिति (JSLPS) के माध्यम से 35 लाख से अधिक महिलाएं 2.80 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ₹5000 करोड़ से अधिक का ऋण स्वीकृत किया गया है। लखपति दीदी, पलाश, जोहार, झिमडी, अदिवा और आजीविका कैफे जैसी योजनाओं ने हजारों महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाया है। पलाश ब्रांड के उत्पाद अब राष्ट्रीय के साथ वैश्विक बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

इसके साथ ही मंईयाँ सम्मान योजना के तहत हर वर्ष लगभग ₹17,000 करोड़ की सहायता राशि महिलाओं को मिल रही है, जिससे वे परिवार और समाज दोनों स्तरों पर सशक्त भूमिका निभा रही हैं।

यूके में शिक्षा और कौशल विकास पर फोकस

दावोस के बाद कल्पना सोरेन यूनाइटेड किंगडम में शिक्षा, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े राउंड टेबल संवादों में भाग लेंगी। वे यूके सरकार के अधिकारियों और प्रवासी भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगी। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के साथ मरांग गोमके स्कॉलरशिप के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे झारखण्ड के विद्यार्थियों से भी मुलाकात प्रस्तावित है।यह अंतरराष्ट्रीय दौरा झारखण्ड को वैश्विक मंच पर एक सशक्त, समावेशी और महिला नेतृत्व आधारित विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Comment