कांकेर: बाढ़ में बही पुलिया, 6 किमी घूमकर स्कूल जा रहे बच्चे; ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 300 मीटर लंबे पुल की मांग

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में भारी बारिश और तेज बाढ़ के कारण एक पुलिया के ढह जाने से ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नरहरपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवडोंगर में यह घटना हुई है, जिसके बाद गांव के अन्य हिस्सों और आसपास के इलाकों से संपर्क लगभग टूट गया है। इस समस्या से निजात पाने और स्थायी समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का रुख किया है तथा कांकेर कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर 300 मीटर लंबे नए पुल के निर्माण की मांग की है।
ग्राम देवडोंगर में आई तेज बाढ़ ने पहले से मौजूद पुलिया को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। यह पुलिया ग्रामीणों के दैनिक आवागमन का एकमात्र सहारा थी। इसके ढह जाने से गांव के लोगों को अपने ही क्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों की समस्या सबसे अधिक बढ़ गई है। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने और बह जाने के कारण अब बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर या फिर लगभग 6 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। इतनी लंबी दूरी तय करने से बच्चों का समय बर्बाद हो रहा है और उनकी पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा चिंता का माहौल बना हुआ है।
बच्चों के अलावा गांव के किसानों, मजदूरों और बुजुर्गों को भी इस टूटी हुई पुलिया की वजह से रोजमर्रा के कामकाज में अत्यधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों तक पहुंचने, बाजार में सब्जी या अन्य उपज ले जाने और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के लिए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध हो गया है। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहनों का गांव तक पहुंचना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना व्याप्त है। बारिश के दिनों में नदी या नाले में पानी का बहाव तेज रहता है, ऐसे में बिना पुलिया के पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
इन सभी समस्याओं से परेशान होकर ग्राम देवडोंगर और आसपास के गांवों के लोगों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल कांकेर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और उन्होंने कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में ग्रामीणों ने विस्तार से अपनी व्यथा बताई है और स्पष्ट शब्दों में 300 मीटर लंबे एक नए पुल के निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी पुलिया छोटी और कमजोर थी, जो तेज बाढ़ के दबाव को झेल नहीं सकी और बह गई। इसलिए अब ऐसी स्थिति से बचने के लिए एक मजबूत और पर्याप्त लंबाई वाले पुल का निर्माण किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में बाढ़ आने पर भी आवागमन बाधित न हो।
ज्ञापन सौंपते समय ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित कराया कि यदि शीघ्र ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था या स्थायी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की आजीविका दोनों गंभीर रूप से प्रभावित होंगी। 6 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना न केवल शारीरिक रूप से थका देने वाला है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बोझिल है। किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने में देरी हो रही है, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
नरहरपुर क्षेत्र के देवडोंगर गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, विशेषकर सड़क और पुल-पुलियों की मजबूती और उनके रखरखाव की जरूरत को रेखांकित किया है। मानसून के दौरान छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भारी बारिश होती है और नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं। ऐसे में कमजोर पुलियाएं अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वे इस मांग को गंभीरता से लें और संबंधित विभाग को जल्द से जल्द सर्वेक्षण कर निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दें।
वहीं, ज्ञापन प्राप्त होने के बाद जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या ठोस कदम उठाया जाएगा, इसे लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, ग्रामीणों को उम्मीद है कि कलेक्टर कार्यालय में दी गई उनकी इस लिखित शिकायत और मांग पर जल्द ही संज्ञान लिया जाएगा। फिलहाल, देवडोंगर गांव के लोग उसी प्रकार 6 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय कर अपने दैनिक कार्यों और स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य हो सकते हैं। प्रशासन से अब यही अपेक्षा की जा रही है कि वह बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए 300 मीटर लंबे पुल के निर्माण की प्रक्रिया को शीघ्रता से आगे बढ़ाएगा।

