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Tue, Oct 6, 2026Updated 12:38 PM IST
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कौशांबी: चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकने पर सपा जिलाध्यक्ष समेत 10 पर FIR, दारोगा की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

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कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतला दहन और प्रदर्शन करने के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया है। इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उप निरीक्षक (दारोगा) की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इस मुकदमे में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष दयाशंकर यादव सहित कुल नौ नामजद आरोपियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भी संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया है। यह कार्रवाई जिले में राजनीतिक गतिविधियों और कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस की सक्रियता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला सोमवार को हुई एक घटना से जुड़ा है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना तीव्र विरोध प्रकट करने के लिए पुतला दहन कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की और अपनी मांगों तथा असंतोष को व्यक्त करने हेतु प्रदर्शन किया। राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग या प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध ऐसे प्रदर्शन आम तौर पर देखे जाते रहे हैं, लेकिन कौशांबी में इस विशिष्ट घटना को लेकर पुलिस ने जिस प्रकार से संज्ञान लिया है, वह प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुतला दहन और प्रदर्शन के दौरान यदि शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका होती है या सार्वजनिक स्थान पर अवैध तरीके से जमावड़ा लगाया जाता है, तो पुलिस ऐसे मामलों में वैधानिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होती है।

इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की पहल स्थानीय थाने के उप निरीक्षक ने की है। दारोगा द्वारा प्रस्तुत तहरीर में यह उल्लेख किया गया है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बिना उचित अनुमति के या फिर निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए सार्वजनिक स्थान पर पुतला फूंका और प्रदर्शन किया, जिससे क्षेत्र में अशांति फैलने की संभावना बनी हुई थी। पुलिस की तहरीर और उसके बाद दर्ज हुई एफआईआर यह दर्शाती है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की चुनौती को लेकर पूरी तरह सतर्क है। नामजद आरोपियों में सबसे प्रमुख नाम सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का है, जो पार्टी के जिला स्तरीय संगठन का नेतृत्व करते हैं। उनके अलावा जिन अन्य आठ लोगों को नामजद किया गया है, वे पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता या पदाधिकारी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने इस प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

पुलिस ने जिन अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है, उसका तात्पर्य यह है कि प्रदर्शन में शामिल अन्य उन व्यक्तियों की भी पहचान की जाएगी जिनकी भूमिका संदिग्ध हो सकती है या जिन्होंने उग्र प्रदर्शन में हिस्सा लिया हो। ऐसी स्थिति में पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग या स्थानीय मुखबिरों की सूचना के आधार पर अन्य आरोपियों की शिनाख्त कर सकती है। कौशांबी पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। चुनाव आयुक्त के पुतले का दहन एक प्रतीकात्मक विरोध होता है, लेकिन जब यह सार्वजनिक शांति और सुरक्षा के मानकों से टकराता है, तो प्रशासनिक मशीनरी इसे गंभीरता से लेती है।

समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस एफआईआर पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पुलिस कार्रवाई से पार्टी और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ सकता है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का पक्ष यह है कि कानून का पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता हो, यदि वह नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई अपरिहार्य है। उप निरीक्षक की तहरीर पर आधारित यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है और आगे की विवेचना संबंधित थाने द्वारा की जाएगी।

कौशांबी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का मौलिक अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूर्णतः शांतिपूर्ण और वैधानिक दायरे में रहकर ही उपयोग किया जाना चाहिए। पुतला दहन जैसे कृत्यों के दौरान यदि आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या यातायात बाधित करने जैसे अपराध होते हैं, तो उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्तमान में दर्ज हुई यह एफआईआर इसी नीति का परिणाम है। मामले की जांच जारी है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगी। इस घटनाक्रम ने जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने में पुलिस की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और क्या विकास होते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।