Wed, 07 Oct 20261:55 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 1:55 PM IST
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कोरबा: दीपका कोयला खदान में कलिंगा कंपनी के डंपर में भीषण आग, दो करोड़ का वाहन जलकर खाक; चालक ने कूदकर बचाई जान

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका कोयला खदान में बुधवार को एक बड़ी दुर्घटना टल गई। खदान क्षेत्र में कार्यरत कलिंगा कंपनी के एक भारी डंपर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि कुछ ही मिनटों में लगभग दो करोड़ रुपये कीमत का यह वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गया। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, क्योंकि डंपर चालक ने तत्परता दिखाते हुए समय रहते वाहन से कूदकर अपनी जान बचा ली। यह घटना खदान क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंधों और भारी मशीनरी की देखभाल को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा बुधवार को दिनदहाड़े दीपका कोयला खदान के कार्यक्षेत्र में हुआ। कलिंगा कंपनी का यह डंपर खदान में नियमित रूप से ओवरबर्डन और कोयले के परिवहन कार्य में लगा हुआ था। चालक द्वारा वाहन को संचालित किए जाने के दौरान ही इंजन या मैकेनिकल हिस्से से धुआं उठने की सूचना मिली, जिसके बाद आग ने तेजी से पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। खदान क्षेत्र में मौजूद अन्य कर्मियों और अधिकारियों ने जब तक आग पर काबू पाने की कोशिश की, तब तक डंपर का अधिकांश हिस्सा आग की लपटों में समाहित हो चुका था। अत्यधिक तापमान और आग की तीव्रता के कारण वाहन का ढांचा पिघलने लगा और अंततः वह पूरी तरह नष्ट हो गया।

इस घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि चालक की सूझबूझ ने एक बड़े जानी नुकसान को टाल दिया। आग लगने का एहसास होते ही चालक ने बिना समय गंवाए चलते वाहन से छलांग लगा दी। यदि वह कुछ पल भी देर करता, तो आग की लपटों के बीच फंस सकता था। चालक के सुरक्षित बाहर निकलने की पुष्टि हुई है, लेकिन दो करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान कंपनी और खदान प्रबंधन के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। खदान क्षेत्र में इतनी महंगी मशीनरी का जलना न केवल उत्पादन कार्य को प्रभावित करता है, बल्कि बीमा दावों और प्रतिस्थापन लागत को लेकर भी जटिलताएं पैदा करता है।

दीपका कोयला खदान SECL की महत्वपूर्ण खदानों में से एक है, जहां बड़े पैमाने पर यांत्रिक उपकरणों का उपयोग होता है। कलिंगा कंपनी जैसे ठेकेदार यहां परिवहन और खुदाई कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में, भारी वाहनों में आग लगने की घटनाएं खदान सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की मांग करती हैं। अक्सर ऐसे हादसों के पीछे पुरानी मशीनरी, अपर्याप्त रखरखाव, ओवरलोडिंग या ऑपरेटर की थकान जैसे कारण सामने आते हैं। हालांकि, इस विशिष्ट घटना में आग लगने का सटीक तकनीकी कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। खदान प्रबंधन और कलिंगा कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि क्या यह हादसा मैकेनिकल खराबी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य मानवीय/प्रक्रियागत चूक का परिणाम था।

कोरबा क्षेत्र को देश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, और यहां की खदानों में सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। फिर भी, भारी वाहनों में आग लगने की आवर्ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। अतीत में भी SECL की विभिन्न खदानों और ठेकेदार कंपनियों के वाहनों में इसी प्रकार की दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं से बचने के लिए नियमित अंतराल पर फायर सेफ्टी ऑडिट, वाहनों की अनिवार्य तकनीकी जांच और चालकों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया जाता रहा है। बुधवार की यह घटना इस बात का अनुस्मारक है कि सुरक्षा उपायों में किसी भी प्रकार की शिथिलता भारी पड़ सकती है।

वहीं, दो करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा केवल वित्तीय हानि तक सीमित नहीं है। एक डंपर के नष्ट होने से खदान के दैनिक उत्पादन लक्ष्यों पर भी असर पड़ता है, क्योंकि ओवरबर्डन हटाने की क्षमता कम हो जाती है। कलिंगा कंपनी को अब इस वाहन के प्रतिस्थापन या मरम्मत (यदि संभव हो) की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिसका सीधा असर खदान की कार्यकुशलता पर पड़ेगा। साथ ही, ऐसी घटनाओं के बाद खदान निरीक्षालय और सुरक्षा अधिकारी अक्सर अतिरिक्त जांच-पड़ताल करते हैं, जिससे अस्थायी रूप से कार्यों की गति धीमी हो सकती है।

फिलहाल, घटनास्थल पर सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। जले हुए डंपर के अवशेषों को हटाने और क्षेत्र को साफ करने का कार्य किया जा रहा है ताकि खदान संचालन सुचारू रूप से जारी रखा जा सके। SECL और कलिंगा कंपनी के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है, लेकिन आग लगने के कारणों पर आधिकारिक बयान जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जारी किया जाएगा। इस बीच, खदान प्रबंधन ने अन्य सभी भारी वाहनों की तत्काल सुरक्षा जांच कराने और चालकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। यह घटना कोरबा के औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की अनिवार्यता को रेखांकित करती है।