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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
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कोरबा: हरदी बाजार में आतंक मचाने वाले उत्पाती बंदर को वन विभाग और नोवा नेचर ने किया रेस्क्यू, 5 दिन में 4 लोग हुए थे घायल

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल अंतर्गत हरदी बाजार क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एक जंगली बंदर के लगातार हमलों और उत्पात से स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ था। इस खतरनाक बंदर ने बीते चार से पांच दिनों के भीतर कम से कम चार लोगों को काटकर घायल कर दिया था, जिसके बाद वन विभाग और पशु कल्याण संगठन नोवा नेचर की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और बंदर को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया है। यह कार्रवाई स्थानीय लोगों की शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए की गई, ताकि क्षेत्र में आम जनजीवन को सामान्य किया जा सके और किसी प्रकार की अनहोनी को रोका जा सके।

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह बंदर अत्यधिक आक्रामक स्वभाव का था और उसका व्यवहार सामान्य वन्यजीवों से भिन्न था। वह बिना किसी स्पष्ट कारण या उकसावे के राह चलते लोगों पर हमला कर देता था। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को इस बंदर ने अपना निशाना बनाया था। वह सड़कों और गलियों में अचानक प्रकट होकर लोगों को दौड़ाता था और उन्हें काटने का प्रयास करता था। इस डर के कारण हरदी बाजार क्षेत्र में लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी असुरक्षा महसूस कर रहे थे। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल या खुले स्थानों पर भेजने से कतरा रहे थे, क्योंकि बंदर के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। पांच दिनों की अवधि में चार व्यक्तियों के घायल होने की पुष्टि हुई है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय निवासियों ने इस मामले की सूचना वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को दी। ग्रामीणों का कहना था कि बंदर का आतंक इतना बढ़ गया था कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता थी। यदि समय रहते इसे नहीं रोका जाता, तो बड़े पैमाने पर जनहानि या गंभीर चोटों की संभावना बनी हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए त्वरित प्रतिक्रिया दी। हालांकि, आक्रामक और फुर्तीले बंदर को पकड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसके लिए विशेषज्ञता और उचित उपकरणों की आवश्यकता थी। ऐसे में वन विभाग ने पशु कल्याण और वन्यजीव रेस्क्यू में अनुभव रखने वाले संगठन ‘नोवा नेचर’ से सहयोग लिया।

वन विभाग और नोवा नेचर की संयुक्त टीम ने हरदी बाजार क्षेत्र में पहुंचकर बंदर की गतिविधियों और उसके ठिकानों का सर्वेक्षण किया। टीम ने स्थानीय लोगों से मिली जानकारी और अपने अवलोकन के आधार पर रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति तैयार की। यह सुनिश्चित किया गया कि रेस्क्यू के दौरान न तो बंदर को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास के लोगों या टीम के सदस्यों को कोई खतरा हो। तकनीकी कौशल और सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध तरीके से टीम ने बंदर को ट्रैक किया और उसे सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया गया। इस संयुक्त अभियान की सफलता ने क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत प्रदान की है, जो पिछले कई दिनों से भय के साये में जी रहे थे।

रेस्क्यू किए गए बंदर को अब वन विभाग के निर्देशानुसार उचित स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। वन्यजीव अधिनियम और मानवीय सुरक्षा मानकों के तहत ऐसे जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास या सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि वे पुनः मानवीय बस्तियों में संघर्ष की स्थिति न उत्पन्न करें। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना हो या कोई वन्यजीव बस्ती क्षेत्र में प्रवेश करे, तो वे स्वयं उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या विशेषज्ञ संगठनों को सूचित करें। इससे दोनों पक्षों—मनुष्यों और वन्यजीवों—की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

हरदी बाजार में हुई यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों की ओर भी इशारा करती है। वन क्षेत्रों के समीप बसी आबादियों में ऐसे टकराव की संभावनाएं बनी रहती हैं, विशेषकर जब वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है या वे भोजन की तलाश में बस्तियों की ओर रुख करते हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान और निवारक उपायों पर जोर दिया जाता रहा है। नोवा नेचर जैसे संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी ऐसे संकटों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्तमान रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता ने यह सिद्ध किया है कि समन्वित प्रयासों और पेशेवर दृष्टिकोण से जटिल वन्यजीव समस्याओं का समाधान संभव है। हरदी बाजार के निवासी अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सामान्य जनजीवन बहाल होने की उम्मीद है।