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title: "कोरबा: रोजगार की मांग को लेकर कल कुसमुंडा खदान और कोल परिवहन ठप करेगी किसान सभा, प्रबंधन पर लगाया रोजगार बेचने का आरोप"
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updated: "2026-11-04T02:58:54+00:00"
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# कोरबा: रोजगार की मांग को लेकर कल कुसमुंडा खदान और कोल परिवहन ठप करेगी किसान सभा, प्रबंधन पर लगाया रोजगार बेचने का आरोप

एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मांगों पर कोई सकारात्मक पहल न होने के कारण किसान सभा ने 4 नवंबर (कल) को कुसमुंडा खदान बंद करने और कोल परिवहन को पूर्ण रूप से ठप करने (चक्काजाम) की बड़ी घोषणा की है।

​30% कोरे वादों के नाम पर छीना जा रहा अधिकार: प्रशांत झा

​छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने एसईसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हजारों भू-विस्थापित रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि प्रबंधन आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ मिलकर रोजगार का सौदा कर रहा है। कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्रों में होने वाले कार्यों में विस्थापितों की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिसके खिलाफ कल से उग्र आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। इस दौरान कुसमुंडा क्षेत्र से गुजरने वाले तमाम कोयला परिवहन वाहनों को पूरी तरह रोक दिया जाएगा।

​विकास के नाम पर बदतर हुई विस्थापितों की जिंदगी

​किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और सचिव दीपक साहू ने कहा कि खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की उपजाऊ जमीनें तो पूरी तरह अधिग्रहित कर ली जाती हैं, लेकिन रोजगार के नाम पर 100% हक देने के बजाय महज 30% का हवाला देकर बाहरी लोगों को भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर अपने ही गांवों और जमीनों से बेदखल किए गए परिवारों का जीवनस्तर सुधरने के बजाय और अधिक बदतर हो गया है। हजारों छोटे किसानों को खेती से वंचित कर बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया गया है, जिसके चलते अब प्रभावितों के पास संघर्ष के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

​भू-विस्थापित नेताओं दामोदर श्याम और रेशम यादव ने भी आरोप लगाया कि जिनकी जमीनें गई हैं, उन्हें न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही आउटसोर्सिंग कंपनियों में प्राथमिकता दी जा रही है। नेताओं ने प्रभावित परिवारों से इस उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है।

​किसान सभा की प्रमुख मांगें:

​100% वैकल्पिक रोजगार: खदान विस्तार के लिए पूर्व एवं वर्तमान में जिन गांवों की जमीनें अधिग्रहित हुई हैं, उन गांवों के बेरोजगारों को पहली प्राथमिकता के साथ आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार दिया जाए।

​स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: खनन प्रभावित क्षेत्र और जिले के ही स्थानीय बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में नौकरी पर रखा जाए।

​रोजगार की निरंतरता: आउटसोर्सिंग कंपनियों का अनुबंध समाप्त होने पर नई आने वाली कंपनियों में पुराने कर्मचारियों को ही सेवा में बरकरार रखा जाए (जैसे ‘गोदावरी कंपनी’ बंद होने से सैकड़ों स्थानीय कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं, उन्हें पुनः काम पर रखा जाए)।

​70:30 के अनुपात का खेल बंद हो: कंपनियों में 70% और 30% रोजगार का अनुपात खत्म कर, जिनकी जमीनें गई हैं उन्हें प्राथमिकता देते हुए खनन प्रभावित जिले के बेरोजगारों को 100% रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
