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Thu, Oct 8, 2026Updated 7:44 AM IST
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मधुबनी के डॉ. कुणाल कौशल को गुवाहाटी में ई-रक्तकोश प्रशिक्षण के लिए मिला सम्मान, बिहार से केवल दो चिकित्सकों का हुआ था चयन

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मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले के सदर अस्पताल स्थित रक्त केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुणाल कौशल को असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान ‘ई-रक्तकोश’ (E-Raktkosh) डिजिटल ब्लड रिकॉर्ड सिस्टम से संबंधित राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सफलतापूर्वक भाग लेने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रदान किया गया है। इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पूरे बिहार राज्य से केवल दो चिकित्सकों का ही चयन किया गया था, जिसमें डॉ. कुणाल कौशल का नाम शामिल होना मधुबनी जिले और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

गुवाहाटी में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य देश भर में रक्त बैंकों और रक्त केंद्रों के संचालन को आधुनिक बनाना और रक्त से जुड़े सभी अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखना है। डॉ. कुणाल कौशल ने इस दौरान ई-रक्तकोश पोर्टल के तकनीकी पहलुओं, डेटा प्रबंधन और डिजिटल रिकॉर्डिंग की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण इसलिए भी अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रक्त केंद्रों में खून की उपलब्धता, उसका स्टॉक, दाताओं का विवरण और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ई-रक्तकोश एक अनिवार्य और सशक्त डिजिटल ढांचा है।

सदर अस्पताल मधुबनी के रक्त केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में डॉ. कुणाल कौशल की भूमिका अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण रही है। रक्त केंद्र में प्रतिदिन सैकड़ों यूनिट खून का संग्रहण, परीक्षण और वितरण होता है। ऐसे में कागजी कार्रवाई या मैनुअल रिकॉर्डिंग में त्रुटियों की संभावना बनी रहती है, जिससे गंभीर स्थिति में समय की बर्बादी या रक्त की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ई-रक्तकोश सिस्टम के पूर्ण प्रशिक्षण के बाद अब मधुबनी सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में डिजिटल रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ एवं त्रुटिहीन बनाया जा सकेगा। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रक्त प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रक्त की उपलब्धता का वास्तविक समय में आकलन करने में भी मदद मिलेगी।

बिहार जैसे राज्य में जहां स्वास्थ्य अवसंरचना को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वहां किसी स्थानीय चिकित्सक का राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होना और सम्मानित किया जाना समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। पूरे बिहार से मात्र दो डॉक्टरों का चयन यह दर्शाता है कि यह प्रशिक्षण अत्यंत विशिष्ट और उच्च मानकों पर आधारित था। डॉ. कौशल का चयन उनकी व्यक्तिगत योग्यता और मधुबनी रक्त केंद्र के कार्यों की गुणवत्ता का प्रमाण है। इस सम्मान से जहां डॉ. कौशल का मनोबल बढ़ा है, वहीं जिले के अन्य स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों के लिए भी यह एक प्रेरणादायी उदाहरण स्थापित हुआ है कि निष्ठा और तकनीकी दक्षता से कार्य करने पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।

ई-रक्तकोश प्रणाली का लाभ सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों को मिलेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से रक्त दाताओं का डेटाबेस हमेशा अपडेट रहेगा, जिससे इमरजेंसी में जरूरतमंद मरीजों को तुरंत रक्त उपलब्ध कराने में देरी नहीं होगी। साथ ही, रक्त की बर्बादी को रोकने और एक्सपायरी डेट का सटीक प्रबंधन करने में भी यह सिस्टम कारगर साबित होगा। डॉ. कुणाल कौशल द्वारा प्राप्त किए गए इस प्रशिक्षण का व्यावहारिक क्रियान्वयन आने वाले दिनों में मधुबनी सदर अस्पताल की रक्त संचार सेवाओं की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार के रूप में दिखाई देगा।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ई-रक्तकोश को पूरी तरह से लागू करने की समय सीमा और लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता इस लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी है। डॉ. कौशल अब इस ज्ञान को अपने सहयोगियों और अधीनस्थ स्टाफ के साथ साझा करेंगे, जिससे पूरा रक्त केंद्र डिजिटल प्रणाली से पूरी तरह परिचित और सक्षम हो सके। गुवाहाटी में मिले इस सम्मान ने मधुबनी के स्वास्थ्य क्षेत्र की छवि को राष्ट्रीय पटल पर भी रेखांकित किया है और यह पुष्टि की है कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे चिकित्सक तकनीकी नवाचारों को अपनाने में सक्षम हैं।