मध्य प्रदेश में पटवारियों पर बड़ी कार्रवाई: स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री नहीं करने पर निलंबन और बर्खास्तगी, संघ ने किया काम बंद करने का ऐलान

भोपाल। मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग के पटवारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। देवास जिले में दो प्रोबेशनर पटवारियों को बर्खास्त किए जाने के बाद अब यह कार्रवाई प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैल गई है। आगर मालवा और गुना जिलों में भी पटवारियों के खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी की कड़ी कार्रवाई की गई है। यह पूरी कार्रवाई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों की रजिस्ट्री का कार्य समय पर पूरा नहीं करने को लेकर की जा रही है। प्रशासन की इस सख्ती के बाद पटवारी संघ ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई का यह सिलसिला नहीं रुका तो वे काम नहीं करेंगे।
देवास से शुरू हुई कार्रवाई का सिलसिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत देवास जिले से हुई थी। देवास में प्रशासन ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं करने पर दो प्रोबेशनर पटवारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की। प्रोबेशन अवधि में ही इतनी कड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के राजस्व अमले में हड़कंप मचा दिया। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य जिलों के कलेक्टरों ने भी अपने-अपने जिलों में पटवारियों के कार्य की समीक्षा की और लक्ष्य पूरा नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया।
आगर मालवा में तीन पटवारी बर्खास्त
देवास के बाद आगर मालवा जिले में भी प्रशासन ने वैसी ही सख्ती दिखाई है। आगर मालवा में तीन पटवारियों को बर्खास्त किए जाने की सूचना सामने आई है। इन तीनों पटवारियों पर भी आरोप है कि उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण के बाद तैयार हुए अभिलेखों के आधार पर संपत्तियों की रजिस्ट्री का कार्य ठीक से नहीं किया या फिर इसे समय पर पूरा करने में लापरवाही बरती। आगर मालवा जिला प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिससे अन्य पटवारियों में भी भय का माहौल है।
गुना में चार निलंबित, 52 को टर्मिनेशन का नोटिस
इस बीच, गुना जिले में प्रशासन ने सबसे बड़ी और व्यापक कार्रवाई की है। गुना में चार पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जिले के सभी 52 पटवारियों को टर्मिनेट करने यानी उनकी सेवाएं समाप्त करने का नोटिस थमा दिया है। यह नोटिस उन सभी 52 पटवारियों को जारी किया गया है जो स्वामित्व योजना के तहत आवंटित लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहे हैं। एक ही जिले में 52 पटवारियों को एक साथ टर्मिनेशन का नोटिस मिलना राजस्व विभाग के इतिहास में बेहद दुर्लभ और गंभीर घटनाक्रम माना जा रहा है। गुना के कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वामित्व योजना और पटवारियों की जिम्मेदारी
गौरतलब है कि स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों को उनके घरों और संपत्तियों का वैध कानूनी अधिकार (प्रॉपर्टी कार्ड) प्रदान करना है। इसके तहत ड्रोन तकनीक के माध्यम से गांवों का सटीक मैपिंग और सर्वेक्षण किया जाता है। इस सर्वेक्षण के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर रजिस्ट्री और अन्य कानूनी दस्तावेजीकरण का कार्य पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों की जिम्मेदारी होती है। जब पटवारी इस कार्य में देरी करते हैं, तो ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज समय पर नहीं मिल पाता, जिससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है। यही कारण है कि राज्य और जिला प्रशासन इस कार्य में हो रही देरी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
पटवारी संघ ने दी काम बंद करने की चेतावनी
प्रशासन की इस लगातार बढ़ती सख्ती और जगह-जगह हो रही बर्खास्तगी व निलंबन की कार्रवाई से पटवारी संघ अब आक्रामक हो गया है। पटवारी संघ ने प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जताया है। संघ ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि पटवारियों के खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी की यह कार्रवाई नहीं रुकी, तो वे सामूहिक रूप से काम नहीं करेंगे। संघ का तर्क है कि पटवारियों पर पहले से ही कई विभागों के कामों का भारी बोझ होता है। स्वामित्व योजना का कार्य भी अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर उन्हें दिया गया है, जिसमें तकनीकी और अन्य कई तरह की चुनौतियां आती हैं। ऐसे में सीधे बर्खास्तगी या निलंबन की कार्रवाई करना उचित नहीं है।
संघ ने मांग की है कि प्रशासन को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय पटवारियों की समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें कार्य पूरा करने के लिए पर्याप्त समय व सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। यदि संघ अपनी चेतावनी पर अमल करता है और पटवारी काम बंद करते हैं, तो प्रदेश भर में राजस्व विभाग से जुड़े सभी कार्य, जैसे कि खसरा-खतौनी, नामांतरण, सीमांकन और अन्य भू-अभिलेखों का काम पूरी तरह से ठप हो सकता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल पूरे प्रदेश में पटवारियों और प्रशासन के बीच चल रहे इस तनाव पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

