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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:45 PM IST
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महाराष्ट्र सीएम की पत्नी अमृता फडणवीस का बड़ा बयान- मुस्लिमों का गरबा देखना गलत नहीं, मंत्री नितिन राणे ने किया था विरोध

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मुंबई। वंदे भारत न्यूज़। महाराष्ट्र में नवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों को लेकर एक बार फिर सार्वजनिक बहस छिड़ गई है। इस बहस के केंद्र में राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर मुस्लिम भाई भी गरबा देखने आते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है, खासकर तब जब राज्य सरकार के ही एक वरिष्ठ मंत्री नितिन राणे इस मामले में पहले ही विरोध जता चुके हैं।

अमृता फडणवीस ने अपने स्पष्ट शब्दों में कहा कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने वाले होने चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी धर्म या समुदाय के लोगों द्वारा त्योहार का शांतिपूर्वक आनंद लेने में कोई बुराई नहीं है। उनका मानना है कि गरबा जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में समावेशिता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय के लोग इन आयोजनों में शामिल होते हैं या केवल गरबा देखने के लिए आते हैं, तो इसे किसी भी दृष्टिकोण से अनुचित नहीं माना जाना चाहिए। उनका यह रुख त्योहारों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, अमृता फडणवीस के इस बयान से ठीक पहले राज्य सरकार में मंत्री नितिन राणे ने गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री का खुलकर विरोध किया था। मंत्री राणे की टिप्पणी ने इस मुद्दे को पहले ही सुर्खियों में ला दिया था। राणे ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया जैसे विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अन्य समुदाय के लोगों का प्रवेश क्यों होना चाहिए। उनका तर्क धार्मिक परंपराओं और आयोजनों की शुद्धता को बनाए रखने के इर्द-गिर्द केंद्रित था। मंत्री राणे के इस रुख का कुछ हिंदू संगठनों और वर्गों ने समर्थन भी किया था, जिससे यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में एक संवेदनशील विषय बन गया था।

ऐसे में, जब मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने मंत्री राणे के रुख से बिल्कुल विपरीत और समावेशी बयान दिया, तो राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। स्रोत के अनुसार उपलब्ध जानकारी तक, अमृता फडणवीस ने सीधे तौर पर किसी मंत्री का नाम लेकर उन पर निशाना नहीं साधा, लेकिन उनके बयान का संदर्भ और समय-सीमा स्पष्ट रूप से मंत्री नितिन राणे द्वारा उठाए गए विवाद से जुड़ी हुई है। एक ही सरकार और राजनीतिक खेमे से जुड़े दो प्रमुख चेहरों के बीच इस वैचारिक मतभेद ने विपक्षी दलों को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है।

नवरात्रि का पर्व महाराष्ट्र सहित पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गरबा और डांडिया इस पर्व की सबसे प्रमुख सांस्कृतिक पहचान हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्थानों पर इन आयोजनों को लेकर विवाद सामने आए हैं, जहां कुछ संगठनों ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर कई सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी त्योहारों को सर्वधर्म समभाव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानते हुए सभी समुदायों की भागीदारी का समर्थन करते रहे हैं। अमृता फडणवीस का बयान इसी व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब अमृता फडणवीस ने सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। वे अक्सर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विषयों पर अपने विचार सार्वजनिक रूप से व्यक्त करती रही हैं। हालांकि, नवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजन को लेकर दिया गया उनका यह बयान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह राज्य की सत्ताधारी व्यवस्था के भीतर ही मौजूद विरोधाभास को उजागर करता है।

फिलहाल, स्रोत सामग्री में इस बात की पुष्टि नहीं है कि मुख्यमंत्री कार्यालय या स्वयं मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी के इस बयान या मंत्री राणे के विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में गरबा आयोजनों को लेकर राज्य सरकार कोई औपचारिक दिशा-निर्देश जारी करेगी या नहीं। लेकिन इतना तय है कि अमृता फडणवीस के इस बयान ने महाराष्ट्र में त्योहारों, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक समावेशिता को लेकर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दे दिया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकती है।