नई दिल्ली9 मिनट पहले
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बिल बोर्ड में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और कुंभ मेले के शिवसैनिकों की तस्वीर लगाई गई थी। साथ ही इस पर लिखा गया था कि यह (कुंभ) हिंदुओं के लिए एकता का क्षण था।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के कुंभ मेले में गंगा जल की शुद्धता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह कैसा धर्म है, अगर हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं।
इस पर शिवसेना ने मंगलवार को राज ठाकरे के घर के पास एक बड़ा बिलबोर्ड लगाया था। इस बोर्ड पर लिखा था कि गंगा का जल शुद्ध है, पर क्या आपके विचार शुद्ध हैं।
बुधवार सुबह MNS कार्यकर्ता बिलबोर्ड को हटाने पहुंचे। उन्होंने बिल बोर्ड वहां से हटाकर फाड़ दिया। इस दौरान उन्होंने राज ठाकरे के पक्ष में नारेबाजी भी की।
दरअसल, ये पोस्टर शिवसेना (शिंदे गुट) के दादर से नेता सदा सरवणकर के बेटे समाधान सरवणकर की ओर से लगाया गया था।
बिल बोर्ड में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और कुंभ मेले के शिवसैनिकों की तस्वीर लगाई गई थी। साथ ही इस पर लिखा गया था कि यह (कुंभ) हिंदुओं के लिए एकता का क्षण था।

MNS ने भी बोर्ड लगाएं हैं, इसमें लिखा कि औरंगजेब, जो हम मराठों को समाप्त करने आया था, उसे हमने यहीं दफना दिया।
ठाकरे बोले थे- हमें नदियों की फिक्र नहीं, औरंगजेब की कब्र की चिंता कर रहे
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने 30 मार्च को औरंगजेब कब्र विवाद की निंदा की थी। राज ने कहा कि लोग वॉट्सऐप पर फॉरवर्ड मैसेज से इतिहास न पढ़ें, सोशल मीडिया से नहीं, विश्वसनीय जगहों से इतिहास पढ़ें।
उन्होंने कहा, “इतिहास के नाम पर लोगों को लड़ाया जा रहा है, राजनेता इन मुद्दों को हवा दे रहे हैं ताकि विवाद को बढ़ाकर फायदा उठाया जा सके। हमें नदियों और पेड़ों की चिंता नहीं है, हम औरंगजेब की कब्र की फिक्र कर रहे हैं।”

राज ठाकरे की स्पीच की 5 बातें
1. शिवाजी नाम के विचार को मारना चाहता था औरंगजेब
राज ठाकरे ने कहा, ‘औरंगजेब ने महाराष्ट्र में 27 साल बिताए और वो मराठाओं से लड़ता रहा। वह शिवाजी की विरासत को मिटाना चाहता था, लेकिन आखिरकार वो हार गया। औरंगजेब उस विचार को मारना चाहता था, जिसका नाम शिवाजी था। शिवाजी की मृत्यु के बाद भी औरंगजेब महाराष्ट्र में रहा और उनके आदर्शों को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा।’
2. फिल्म देखकर जागने वाला हिंदू किसी काम का नहीं
ठाकरे ने कहा, ‘हम मौजूदा समय के असली मुद्दों को भूल गए हैं। फिल्म देखकर जागने वाले हिंदू किसी काम के नहीं हैं। क्या आपको विक्की कौशल को देखकर संभाजी महाराज के बलिदान के बारे में और अक्षय खन्ना को देखकर औरंगजेब के बारे में पता चला? औरंगजेब का क्या मामला था किसी को पता है क्या?’

3. बच्चों को दिखाओ औरंगजेब को यहां दफनाया गया था
ठाकरे ने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और यह छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना नहीं हो सकता था। लोग उकसावे में न आएं।। शिवाजी से पहले और शिवाजी के बाद के युगों में सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग थीं। औरंगजेब की कब्र की जो सजावट की गई है, उसे हटा दो। सिर्फ कब्र को रखो, वहां पर बड़ा बोर्ड लगा दो। बोर्ड पर लिखो कि जो हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों को जो मारने आया था, उसे महाराष्ट्र की भूमि में दफनाया। छोटे-छोटे बच्चों को दिखाओ औरंगजेब को यहां दफनाया था।
4. कोई देश धर्म के आधार पर प्रगति नहीं कर सकता है
राज ठाकरे ने कहा, ‘औरंगजेब का जन्म गुजरात के दाहोद में हुआ था। जो लोग अपनी स्वार्थी राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए लोगों को भड़काते हैं, उन्हें इतिहास से कोई सरोकार नहीं है।कोई भी देश धर्म के आधार पर प्रगति नहीं कर सकता। आप तुर्किये को देखिए कि कैसे उसने खुद को सुधार लिया। धर्म आपके घर की चारदीवारी के भीतर ही रहना चाहिए। एक हिंदू की पहचान हिंदू के रूप में तभी होती है, जब मुसलमान सड़कों पर उतरते हैं या दंगों के दौरान। नहीं तो हिंदू भी जाति के आधार पर बंटे हुए हैं।’
5. धर्म के नाम पर नदियों को दूषित न करें
ठाकरे ने एक वीडियो दिखाते हुए दावा किया कि शवों को जलाकर गंगा नदी में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह कैसा धर्म है, अगर हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं। गंगा की सफाई पर 33,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और यह अभी भी जारी है। क्या हमें खुद में सुधार नहीं करना चाहिए।
महाराष्ट्र की नदियां भी बेहद प्रदूषित हैं। देश की 311 सबसे प्रदूषित नदियों में से 55 महाराष्ट्र की हैं। मुंबई में पांच नदियां हैं और उनमें से चार खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि एकमात्र जीवित मीठी नदी मरने वाली है।’

हिंसा के बाद औरंगजेब की कब्र पर सुरक्षा बढ़ी
हिंसा और तोड़फोड़ के बाद औरंगजेब की कब्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। ऐसी व्यवस्था की गई है कि वहां केवल एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सके। औरंगजेब के मकबरे का मुख्य द्वार पुलिस ने बंद कर दिया है। औरंगजेब की कब्र के पास जाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिलहाल औरंगजेब के मकबरे को बाहर से ही देख सकते हैं।
1707 में बनी थी औरंगजेब की कब्र
- मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र के खुल्दाबाद में है। इतिहासकारों के मुताबिक, 1707 में जब औरंगजेब का निधन हुआ, तो उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें खुल्दाबाद में उनके आध्यात्मिक गुरु शेख जैनुद्दीन की दरगाह के पास दफनाया गया। यह स्थान छत्रपति संभाजीनगर से करीब 25 किमी दूर है।
- औरंगजेब की कब्र एक साधारण मिट्टी की बनी हुई थी, जिसमें बाद में ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड कर्जन ने संगमरमर लगवाया था। इस स्थान को ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां लोग आज भी श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं
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