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Tue, Oct 6, 2026Updated 7:42 AM IST
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मोहाली: पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने वाले हार्डकोर गैंगस्टर गौरव कपिला की जमानत याचिका खारिज, अदालत ने आपराधिक रिकॉर्ड को बताया गंभीर

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वंदे भारत न्यूज़, चंडीगढ़/मोहाली। पंजाब के मोहाली जिले में पुलिस पार्टी पर जानलेवा फायरिंग करने के संगीन मामलों में नामजद आरोपी और हार्डकोर गैंगस्टर गौरव कपिला को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। मोहाली की स्थानीय अदालत ने मंगलवार को गौरव कपिला द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी के लंबे आपराधिक रिकॉर्ड और उस पर दर्ज अपराधों की अत्यंत गंभीर प्रकृति को आधार बनाया। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से ट्रायल शुरू न होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यानी पुलिस ने आरोपी को एक हार्डकोर गैंगस्टर बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

पुलिस पार्टी पर फायरिंग का गंभीर मामला

मामले की विस्तृत जानकारी के अनुसार, गौरव कपिला पर मोहाली पुलिस की टीम पर सीधे तौर पर फायरिंग करने के आरोप हैं। यह घटना तब सामने आई जब पुलिस की एक विशेष पार्टी अपने नियमित अभियान या किसी कार्रवाई के सिलसिले में मौके पर मौजूद थी। पुलिस कर्मियों पर हुई इस फायरिंग को कानून व्यवस्था के खिलाफ एक खुली चुनौती और अत्यंत गंभीर अपराध माना जा रहा है। पुलिस पर हमला करना भारतीय दंड संहिता और संबंधित कानूनों के तहत एक जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में मोहाली पुलिस ने आरोपी गौरव कपिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे नामजद किया था। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी की संलिप्तता इस मामले में स्पष्ट है और वह समाज तथा कानून व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

बचाव पक्ष की दलीलें और ट्रायल का मुद्दा

अदालत में सुनवाई के दौरान गौरव कपिला के वकील ने नियमित जमानत की मांग करते हुए कई कानूनी बिंदुओं को अदालत के समक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से मुख्य रूप से यह दलील दी गई कि इस मामले में अभी तक ट्रायल (मुकदमे की कार्यवाही) शुरू नहीं हो पाई है। वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया कि जब तक मुकदमे की प्रक्रिया शुरू नहीं होती और गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जाते, तब तक आरोपी को अनिश्चित काल के लिए जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों के अनुकूल नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि यदि अदालत चाहे तो आरोपी को सख्त शर्तों के साथ जमानत दे सकती है, ताकि वह जांच या ट्रायल की प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न न करे। उनके अनुसार, चूंकि आरोपी पहले से ही हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत देने से न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पुलिस का कड़ा रुख – ‘आरोपी हार्डकोर गैंगस्टर’

इसके जवाब में मोहाली पुलिस की ओर से अदालत में बेहद सख्त रुख अपनाया गया। पुलिस ने बचाव पक्ष की सभी दलीलों का पुरजोर विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि गौरव कपिला कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह एक हार्डकोर गैंगस्टर है। पुलिस ने अदालत के समक्ष आरोपी का विस्तृत आपराधिक रिकॉर्ड पेश किया। पुलिस का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है।

पुलिस ने अदालत को यह भी चेतावनी दी कि यदि ऐसे हार्डकोर गैंगस्टर को जमानत पर रिहा किया गया, तो इसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी के बाहर आने से न केवल गवाहों को डराने-धमकाने या उन्हें प्रभावित करने का खतरा बढ़ जाएगा, बल्कि वह भविष्य में भी इसी तरह की हिंसक और आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकता है। पुलिस ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जिस व्यक्ति ने सीधे वर्दी पर फायरिंग की हो, उसे जमानत देना पुलिस बल का मनोबल गिराने और समाज में गलत संदेश देने के समान होगा।

अदालत का फैसला – आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता आधार

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले से जुड़े सभी तथ्यों एवं दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद मोहाली की अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा और फिर इसे खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी गौरव कपिला का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और गंभीर है। न्यायाधीश ने माना कि बचाव पक्ष का यह तर्क कि ट्रायल शुरू नहीं हुआ है, इस मामले में जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बन सकता, क्योंकि अपराध की गंभीरता बहुत अधिक है।

अदालत ने अपने आदेश में लिखा कि पुलिस पार्टी पर फायरिंग करना राज्य की संप्रभुता और कानून के शासन पर सीधा हमला है। ऐसे में, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे नियमित जमानत का लाभ देना उचित नहीं होगा। अदालत ने पुलिस के इस दावे को भी महत्व दिया कि आरोपी एक हार्डकोर गैंगस्टर है और उसका समाज में रहना जनहित के विरुद्ध है।

पंजाब में गैंगस्टरों के खिलाफ सख्ती जारी

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब सरकार और राज्य पुलिस गैंगस्टरों और आपराधिक तत्वों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और अधिक तेज कर रही है। पंजाब में पिछले कुछ समय से गैंगस्टर कल्चर को जड़ से खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस पर हमले जैसे मामलों में अदालतों द्वारा दिखाई जा रही इस सख्ती से कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मनोबल बढ़ा है। मोहाली अदालत के इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि जो भी व्यक्ति पुलिस या कानून व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसे न्यायिक प्रक्रिया में कोई ढील नहीं मिलेगी। फिलहाल, गौरव कपिला को न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा और उसे आगामी मुकदमे की कार्यवाही का जेल में रहकर ही सामना करना पड़ेगा।