Mon, 05 Oct 20268:45 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 8:45 PM IST
होम › बिहार

मोतिहारी: अरेराज प्रखंड के पिपरा गांव की दलित बस्ती में सड़क जर्जर, मरीजों और बच्चों को भारी परेशानी

WhatsAppFacebookX

वन्दे भारत न्यूज़, मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज प्रखंड क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी का एक और मामला सामने आया है। प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पिपरा गांव स्थित वार्ड नंबर 04 की दलित बस्ती में जाने वाली सड़क आज भी बेहद बदहाल स्थिति में है। सड़क की उचित सुविधा नहीं होने के कारण इस बस्ती में रहने वाले ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से बीमार लोगों, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह जर्जर सड़क एक बड़ी चुनौती बन गई है।

स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिपरा गांव के वार्ड नंबर 04 में स्थित इस दलित बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला रास्ता पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और कई जगहों पर मिट्टी का रास्ता इतना ऊबड़-खाबड़ हो गया है कि उस पर चलना तक मुश्किल हो जाता है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और कीचड़ में तब्दील हो जाती है। ऐसे समय में बस्ती के लोगों का बाहर निकलना लगभग असंभव सा हो जाता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में भी ग्रामीणों को हर दिन इसी खराब रास्ते से गुजरकर अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए बाहर जाना पड़ता है।

इस जर्जर सड़क का सबसे अधिक असर बस्ती के मरीजों और बच्चों पर पड़ रहा है। जब किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो जाती है या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाती है, तो मरीज को समय पर अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना एक बहुत बड़ी समस्या बन जाती है। एंबुलेंस या अन्य वाहन इस खराब सड़क पर आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे मरीजों को स्ट्रेचर पर या गोद में उठाकर लंबी दूरी तक ले जाना पड़ता है। इस देरी से मरीजों की जान को खतरा बढ़ जाता है और उन्हें अनावश्यक शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में इस सड़क की बदहाली उनके लिए सबसे बड़ा संकट खड़ा कर देती है।

इसके अलावा, बस्ती के स्कूल जाने वाले बच्चों को भी प्रतिदिन इस खराब सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। गड्ढों और कीचड़ भरे रास्ते पर चलने के दौरान कई बार बच्चे गिर जाते हैं और उनकी स्कूल की यूनिफॉर्म तथा किताबें खराब हो जाती हैं। अभिभावकों को हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि उनके बच्चे सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचेंगे या नहीं। सड़क की इस दुर्दशा के कारण बच्चों की शिक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि खराब मौसम में कई बार बच्चों को स्कूल जाने से रुकना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बस्ती के लोग वर्षों से इसी बदहाल सड़क पर चलने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि विकास योजनाओं का लाभ इस बस्ती तक नहीं पहुंच पा रहा है और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। दलित बस्ती के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि उन्हें आवागमन में हो रही परेशानियों से निजात मिल सके।

अरेराज प्रखंड का पिपरा गांव जिले के उन कई इलाकों में शामिल है जहां ग्रामीण बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं। सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। सड़क के बिना न तो स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंच सकती हैं, न ही शिक्षा का उचित प्रसार हो सकता है और न ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। वार्ड नंबर 04 की इस दलित बस्ती की स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण और रखरखाव के कार्य में अभी भी कई कमियां बनी हुई हैं।

ज्ञात हो कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर सभी जरूरतमंद बस्तियों तक पहुंच रहा है या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है। पिपरा गांव की इस दलित बस्ती के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां सरकारी योजनाओं के दावों के बावजूद सड़क की वास्तविक स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

वन्दे भारत न्यूज़ की ओर से इस संबंध में अरेराज प्रखंड के संबंधित अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल प्राप्त नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस सड़क के निर्माण या मरम्मत के लिए कोई प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है या नहीं। बस्ती के ग्रामीण अब प्रशासन और सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी इस पुरानी समस्या का समाधान जल्द ही निकाला जाएगा और उन्हें एक पक्की तथा सुचारू सड़क की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मरीजों, बच्चों और आम ग्रामीणों को रोजमर्रा के जीवन में हो रही कठिनाइयों से छुटकारा मिल सके।