दिव्यांग कोटे से सिलेक्ट सत्यम रजक के खिलाफ शिकायत हुई है। रजक के सर्टिफिकेट के मुताबिक वह ठीक तरह से देख नहीं सकता।
एक दृष्टिबाधित यानी वह शख्स जिसे पूरी तरह दिखाई नहीं देता, फर्राटे से बाइक और कार चला रहा है। ऐसे लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस बन ही नहीं सकता, मगर उसका लाइसेंस बना हुआ है। सबसे खास बात कि ये दृष्टिबाधित युवक मध्यप्रदेश सरकार में दिव्यांग कोटे से एक्सा
.
दरअसल, इसी साल 18 जनवरी को MPPSC 2022 का रिजल्ट जारी हुआ। उसमें सागर के रहने वाले सत्यम रजक का दिव्यांग कोटे से आबकारी सब इंस्पेक्टर के तौर पर चयन हुआ है। उज्जैन के रहने वाले प्रिंस यादव ने सत्यम रजक के सिलेक्शन पर सवाल उठाए हैं। यादव का कहना है कि या तो सत्यम का ड्राइविंग लाइसेंस गलत है या फिर एग्जाम के लिए दिया दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट।
मामले को लेकर दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट्स और सत्यम रजक समेत सर्टिफिकेट जारी करने वाले सिविल सर्जन से भी बात की, पढ़िए रिपोर्ट…
अब जानिए, सत्यम रजक को लेकर क्या शिकायत हुई है उज्जैन के रहने वाले प्रिंस यादव ने ये शिकायत की है। इसमें सत्यम रजक की आबकारी विभाग के सब इंस्पेक्टर के तौर पर हुई नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं। प्रिंस यादव ने शिकायत में 3 अहम पॉइंट्स का जिक्र किया है…
1. सत्यम रजक ने पीएससी की परीक्षा में स्क्राइब यानी पेपर लिखने में किसी अन्य व्यक्ति की मदद नहीं ली।
2. पीएससी से पहले सत्यम रजक कर्मचारी चयन मंडल की जिन परीक्षाओं में शामिल हुआ, उसमें खुद को दृष्टिबाधित नहीं बताया था।
3. रजक के दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट की जांच के साथ उसकी आंखों की भी जांच कराई जाए।

प्रिंस यादव की तरफ से 26 मार्च को ये शिकायत दी गई है।
सत्यम के दृष्टिबाधित होने पर उठ रहे सवालों को 3 पॉइंट्स में समझिए
1. आवेदन की आखिरी तारीख 9 फरवरी 2023, सर्टिफिकेट बना 4 फरवरी को पीएससी 2022 के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 9 फरवरी 2023 थी। सत्यम रजक का दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट 4 फरवरी को जारी हुआ है। यही सबसे अहम सवाल है कि यदि उम्मीदवार दृष्टिबाधित था तो सर्टिफिकेट पहले क्यों नहीं बनवाया था?
2. ड्राइविंग लाइसेंस 2017 में जारी हुआ, 2024 में ड्राइविंग करते फोटो, फिर आंखें कब खराब हुईं? सत्यम के सोशल मीडिया अकाउंट में ही अप्रैल 2024 में उसकी ड्राइविंग के फोटो मिले हैं। उसका ड्राइविंग लाइसेंस 2017 में जारी हुआ है। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आंखों का टेस्ट होता है। इसका मतलब ये है कि 2017 में जब लाइसेंस बना, तब आंखें सही थी। तभी उसे लाइसेंस जारी किया गया था।

सत्यम का ड्राइविंग लाइसेंस 2017 में बना जबकि 40% दृष्टिहीन को यह जारी नहीं किया जाता है।
3. कॉन्स्टेबल और वनरक्षक जैसी परीक्षाओं में शामिल कैसे हुआ शिकायत के मुताबिक सत्यम रजक इससे पहले कर्मचारी चयन मंडल की कॉन्स्टेबल और फॉरेस्ट गॉर्ड भर्ती परीक्षाओं में भी शामिल हुआ था। इन परीक्षाओं में दृष्टिबाधित कैटेगरी के उम्मीदवार पात्र नहीं है। इसके कुछ दिन बाद फिर पीएससी में वही उम्मीदवार दृष्टिबाधित कैटेगरी में कैसे शामिल हो गया?

इन सवालों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट
विभाग सर्टिफिकेट की जांच करवा सकता है मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो. एसपी गौतम कहते हैं कि जिस विभाग के लिए कैंडिडेट का चयन हुआ है, वह विभाग उसके दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच करा सकता है। इसमें ये वेरिफाई हो जाएगा कि वह व्यक्ति दिव्यांग कैटेगरी से भर्ती के लिए पात्र है या नहीं? यदि फर्जी सर्टिफिकेट लगाया है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।
दृष्टिबाधित व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन सकता पूर्व परिवहन आयुक्त डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति दृष्टिबाधित दिव्यांग है तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन सकता। लाइसेंस के लिए उसका टेस्ट होता है। यदि कोई व्यक्ति नेत्रहीन है तो वह गाड़ी कैसे चला पाएगा? हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि लाइसेंस 2017 में बना था। उसके बाद उसकी आंखें कैसे कमजोर हुई, ये जांच का विषय है।

सिविल सर्जन बोले- जिसे आपत्ति है, वह मुझसे मिले सत्यम रजक ने दिव्यांगता सर्टिफिकेट सागर के जिला अस्पताल से बनवाया है। दिव्यांगता सर्टिफिकेट जारी करने के लिए एक पूरा पैनल होता है। रजक का सर्टिफिकेट सिविल सर्जन ने जारी किया है। सागर के सिविल सर्जन एसएस जयंत कहते हैं-

दिव्यांग सर्टिफिकेट जारी करने की पूरी गाइडलाइन है। सिविल सर्जन के उसमें सिर्फ दस्तखत होते हैं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर होते हैं, वो कैंडिडेट का पूरा एक्जामिनेशन करते हैं। यदि फिर भी कहीं किसी को आपत्ति है, तो वह मुझसे आकर मिल सकते हैं।
अब बात करते हैं उस कथित दिव्यांग की, जिस पर आरोप हैं सत्यम रजक सागर जिले में रहते हैं। उनके ड्राइविंग लाइसेंस में उनका पता एमआईजी- 37, दीनदयाल नगर, गंभीरिया, सागर लिखा हुआ है। भास्कर संवाददाता ने उनके मोबाइल नंबर 7470654545 पर 29 मार्च को संपर्क किया। उन्होंने फोन पर कोई रिप्लाई नहीं किया। वॉट्सऐप मैसेज करके जब हमने उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि घर में कोई गमी हो गई है। बाद में जवाब दूंगा।
इसके थोड़ी देर बाद उन्होंने वॉट्सऐप चैट को यह कहकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया कि भास्कर संवाददाता उन्हें पैसों के लिए ब्लैकमेल कर रहा है। उनकी यह करतूत भी इस बात का साफ संकेत है कि वो जवाब देने से बच रहे हैं।

पहले भी दिव्यांग कोटे से सिलेक्शन पर उठे सवाल दरअसल, ये पहला मामला नहीं है। 18 जनवरी को जब पीएससी 2022 का रिजल्ट जारी हुआ था, तब दिव्यांग कोटे से सिलेक्ट एक अस्थिबाधित युवती का डांस करते, तो श्रवणबाधित युवक का कोचिंग में पढ़ाते हुए वीडियो वायरल हुआ था।
हालांकि, भास्कर ने दिव्यांग कोटे से सिलेक्ट हुईं अस्थिबाधित प्रियंका कदम से बात की तो उन्होंने बताया था कि दोनों पैरों की टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई है। उसके बाद डॉक्टर ने बहुत सारे रिस्ट्रिक्शन बताए। दस-पंद्रह मिनट तो अच्छे से चल लेती हैं, उसके बाद पैरों में सूजन आ जाती है। पैर दर्द होने लगता है। पेनकिलर खानी पड़ती है।
प्रियंका ने कहा था-

लोगों को दिखती हूं कि नॉर्मल हूं। दर्द सहने की आदत पड़ गई है। ज्यादा दर्द होता है तो पेनकिलर खा लेती हूं। डॉक्टर ने डांस करने के लिए मना किया है। पेनकिलर खाकर डांस कर सकती हूं। एंजॉयमेंट के लिए थोड़ा बहुत 5-10 मिनट डांस कर लेती हूं।

प्रियंका का डांस करते वीडियो सामने आने के बाद उनके सिलेक्शन पर सवाल उठे थे।
श्रवणबाधित श्रेणी में सिलेक्ट, इंटरव्यू में कम नंबर श्रवणबाधित कैटेगरी के बाबूलाल मंसूरिया के सिलेक्शन पर भी सवाल उठे थे। इसे लेकर मंसूरिया ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें दिसंबर 2019 में एक माइनर अटैक आया था। इसके बाद दूसरा अटैक कोविड के दौरान आया। इसमें ब्लैक फंगल इन्फेक्शन की स्थिति बनी थी। ये चेहरे से कान की तरफ नर्व को डैमेज करता है।
उन्होंने कहा- इसी फंगल इन्फेक्शन की वजह से पहली बार ऐसा लगा कि मुझे सुनने में दिक्कत हो रही है। मैं खुद पीएससी की परीक्षा दे रहा था। एक परिचित आए। उन्होंने कहा कि अगर आपका सिलेक्शन हो जाता है तो भी मेडिकल ग्राउंड पर आप रिजेक्ट हो जाओगे। जांच करवाया तो कन्फर्म हुआ कि मुझे सुनने में दिक्कत है।
मैं श्रवणबाधित हूं। मुझे इंटरव्यू में 140 नंबर की उम्मीद थी। इंटरव्यू में 51 नंबर आए हैं। मेंस में 582 नंबर आए हैं। ये भी कम हैं। मैं लिखकर दे सकता हूं कि एक 30-35 साल का व्यक्ति सामान्यतः 30 परसेंट बहरा है। अगर 40 परसेंट कम सुनाई दे रहा है तो आप दिव्यांग हैं।
ये खबर भी पढ़ें…
MPPSC मुख्य परीक्षा-2025 पर हाईकोर्ट की रोक

मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 पर बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रीलिम्स परीक्षा के कैटेगरी वाइज कट ऑफ मार्क्स की रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं। बता दें कि आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस छात्रों को अनारक्षित वर्ग में न चुने जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। पढ़ें पूरी खबर…