Wed, 07 Oct 20269:25 AM
Wed, Oct 7, 2026Updated 9:25 AM IST
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मुजफ्फरपुर: जिलास्तरीय खेल प्रतियोगिता के क्रिकेट ट्रायल में धांधली का आरोप, AIDSO ने डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आयोजित जिलास्तरीय खेल प्रतियोगिता के क्रिकेट ट्रायल को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने इस चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी (डीएम) से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि सरकारी स्तर पर आयोजित किए गए इस क्रिकेट ट्रायल में हितों का टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) साफ तौर पर देखा गया, जिसमें निजी क्रिकेट एकेडमी से जुड़े लोगों को चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

संगठन ने अपने आरोपों में स्पष्ट किया है कि सरकारी स्तर पर आयोजित क्रिकेट ट्रायल में निजी क्रिकेट एकेडमी से जुड़े व्यक्तियों को चयन प्रक्रिया में अहम भूमिका दी गई थी। मामला यहीं नहीं रुकता, बल्कि उसी निजी एकेडमी के खिलाड़ी भी इस ट्रायल में हिस्सा लेने पहुंचे थे। ऐसे में यह स्वाभाविक सवाल उठता है कि जो लोग खुद किसी निजी एकेडमी से जुड़े हैं या जिनके मार्गदर्शन में वहां के खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, वे कैसे एक निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित कर सकते हैं। AIDSO ने इस पूरी व्यवस्था पर संदेह जताते हुए कहा है कि इससे उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ अन्याय हुआ है, जो किसी निजी एकेडमी का हिस्सा नहीं हैं लेकिन सरकारी ट्रायल के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते थे।

इस पूरे मामले को लेकर AIDSO ने जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। संगठन का कहना है कि जिलास्तरीय खेल प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने का एक महत्वपूर्ण मंच होती हैं। यदि इस स्तर पर ही चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जाएगी और निजी संस्थानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी, तो इसका सीधा असर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के उन मेधावी खिलाड़ियों पर पड़ेगा जिनके पास निजी एकेडमियों में महंगी फीस देकर प्रशिक्षण लेने की आर्थिक क्षमता नहीं है। संगठन ने मांग की है कि डीएम इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

ज्ञात हो कि राज्य सरकार द्वारा जिलास्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन इसलिए किया जाता है ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद खेल प्रतिभाओं को पहचाना जा सके और उन्हें आगे राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान किया जा सके। क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में जब ट्रायल होते हैं, तो बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ी अपना भाग्य आजमाने पहुंचते हैं। ऐसे में चयन समिति की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। लेकिन मुजफ्फरपुर में सामने आए इस विवाद ने खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निजी एकेडमी से जुड़े चयनकर्ताओं की भूमिका पर संदेह इसलिए भी गहराया क्योंकि उनके अपने एकेडमी के खिलाड़ी भी ट्रायल मैदान पर मौजूद थे।

AIDSO ने यह भी रेखांकित किया है कि सरकारी आयोजनों में इस तरह की लापरवाही या मिलीभगत की आशंका से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल टूटता है, बल्कि सरकारी खेल नीतियों की विश्वसनीयता भी दांव पर लग जाती है। संगठन ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए चयन समिति के गठन में कड़े दिशा-निर्देश लागू किए जाने चाहिए। किसी भी निजी एकेडमी के कोच या संचालक को उस ट्रायल में चयनकर्ता नहीं बनाया जाना चाहिए, जिसमें उनकी एकेडमी के खिलाड़ी भाग ले रहे हों। यह खेल नैतिकता का बुनियादी सिद्धांत है, जिसका पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

फिलहाल, इस संबंध में जिला प्रशासन या जिला खेल कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जिलाधिकारी ने AIDSO के इस ज्ञापन या मांग पर क्या संज्ञान लिया है। हालांकि, छात्र संगठन द्वारा उठाए गए इन सवालों के बाद मुजफ्फरपुर के खेल जगत में हलचल तेज हो गई है। कई खिलाड़ियों और अभिभावकों ने भी इस चयन प्रक्रिया पर अपनी चिंता व्यक्त की है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि क्या वे इस विवाद की गहराई तक जाकर जांच करेंगे या इसे महज एक औपचारिकता मानकर छोड़ देंगे।

उल्लेखनीय है कि बिहार में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कमियों या हितों के टकराव के कारण कई बार योग्य खिलाड़ी पीछे रह जाते हैं। मुजफ्फरपुर का यह मामला इसी व्यवस्थागत चुनौती को उजागर करता है। AIDSO ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में समयबद्ध तरीके से निष्पक्ष जांच नहीं कराई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो संगठन खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को बाध्य होगा। कुल मिलाकर, जिलास्तरीय खेल प्रतियोगिता के क्रिकेट ट्रायल में उठा यह विवाद अब केवल एक खेल का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह पारदर्शिता, समान अवसर और सरकारी प्रणाली की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।