Tue, 06 Oct 202612:40 PM
Tue, Oct 6, 2026Updated 12:40 PM IST
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मुजफ्फरपुर पुलिस वेतन घोटाला: 7 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में महिला सिपाही बेबी कुमारी दोषी करार, विशेष निगरानी कोर्ट ने भेजा न्यायिक अभिरक्षा में

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सामने आए सात करोड़ रुपये के बहुचर्चित पुलिस वेतन घोटाले में विशेष निगरानी कोर्ट-2 ने अपना अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में आरोपी महिला सिपाही बेबी कुमारी को दोषी करार दिया है। विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने आय से अधिक संपत्ति और सरकारी राशि में हेरफेर से जुड़े इस गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद अदालत ने बेबी कुमारी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का निर्देश दिया। अब अदालत द्वारा इस मामले में सजा की अवधि तय की जाएगी, जिसको लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर पुलिस विभाग में हुए वेतन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें लगभग सात करोड़ रुपये के सरकारी फंड में बड़े पैमाने पर गबन और हेरफेर की बात सामने आई थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ कि इस घोटाले को अंजाम देने में विभाग के एक अकाउंटेंट की मुख्य भूमिका रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकाउंटेंट ने सरकारी खजाने की इस भारी रकम को सीधे तौर पर अपने या किसी एक खाते में ट्रांसफर करने के बजाय एक सोची-समझी साजिश के तहत कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजा था। इन खातों में अकाउंटेंट की अपनी पत्नी का बैंक खाता भी शामिल था। इसके अलावा, विभाग में कार्यरत दो अन्य सिपाहियों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल इस काले धन को ठिकाने लगाने और सरकारी राशि की हेराफेरी को छिपाने के लिए किया गया।

जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि सात करोड़ रुपये की यह विशाल राशि इन खातों में पहुंचने के बाद एक ही एटीएम मशीन से निकाली जाती थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि रोजाना एक ही एटीएम से लाखों रुपये की निकासी की जा रही थी, लेकिन लंबे समय तक इस संदिग्ध गतिविधि की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। एक ही एटीएम से लगातार और रोजाना लाखों रुपये निकलने का यह क्रम इस बात का पुख्ता सबूत बना कि कैसे व्यवस्थित तरीके से सरकारी वेतन मद की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा था। इस तरह से रोजमर्रा की भारी निकासी ने जांचकर्ताओं को घोटाले की असली तस्वीर समझने में महत्वपूर्ण सुराग दिए।

विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि बेबी कुमारी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है। इसके साथ ही, सरकारी राशि में की गई हेरफेर के आरोप भी उन पर साबित हुए हैं। यही कारण है कि न्यायाधीश ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी राशि में हेरफेर करने के आरोपों में दोषी करार देते हुए तत्काल प्रभाव से न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का सख्त आदेश दिया।

बता दें कि पुलिस विभाग जैसे अनुशासित बल में वेतन वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल माध्यमों से होती है। ऐसे में अकाउंटेंट के स्तर पर बैठे व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी और सहकर्मियों के खातों का उपयोग करके सात करोड़ रुपये की सरकारी राशि को इधर-उधर करना विभागीय निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घोटाला न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार के पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना रहा था।

अब जबकि अदालत ने महिला सिपाही बेबी कुमारी को दोषी करार दे दिया है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत उन्हें कितनी कड़ी सजा सुनाती है। सजा की अवधि तय करने के लिए अदालत में आगामी सुनवाई होगी, जिसमें बचाव और अभियोजन पक्ष सजा के बिंदुओं पर अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले से सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और वेतन घोटालों पर लगाम लगाने की दिशा में एक सख्त संदेश गया है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी आगे आ सकती है, क्योंकि अकाउंटेंट और अन्य दो सिपाहियों के खातों में रकम भेजे जाने का जिक्र इस पूरे षड्यंत्र की गहराई को दर्शाता है।