मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में उद्धव-राज ठाकरे का संयुक्त प्रदर्शन; दिल्ली में भी आप और छात्र संगठन सड़कों पर, तीन दिन में तीसरा विरोध मार्च

मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने संयुक्त रूप से विशाल प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक एकजुटता में दोनों दलों के हजारों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए, जो मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और कथित पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। यह मार्च मुंबई के मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय तक पहुंचा, जहां नेताओं ने सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। यह पिछले तीन दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ होने वाला तीसरा बड़ा प्रदर्शन है, जिससे स्पष्ट होता है कि विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है।
मुंबई में हुए इस संयुक्त प्रदर्शन का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो लंबे समय से वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों के कारण अलग-अलग मंचों पर रहे हैं, उन्होंने चुनाव आयोग के मुद्दे पर एक साथ आने का निर्णय लिया। प्रदर्शन के दौरान दोनों नेताओं ने मंच साझा किया और आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की नींव है और यदि इसे कमजोर किया जाता है तो देश की जनता का विश्वास डगमगा जाएगा। वहीं, राज ठाकरे ने भी सीईसी ज्ञानेश कुमार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति किसी विशेष राजनीतिक दल के एजेंट की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग ने अपनी तटस्थता सुनिश्चित नहीं की तो महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरा देश सड़कों पर उतरने को बाध्य होगा।
प्रदर्शन में शामिल हजारों लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर ‘चुनाव आयोग की स्वायत्तता बचाओ’, ‘ज्ञानेश कुमार वापस जाओ’ और ‘लोकतंत्र खतरे में’ जैसे नारे लिखे थे। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और मार्च के मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। इस संयुक्त मोर्चे ने अन्य विपक्षी दलों को भी एकजुट होने का संदेश दिया है, जिससे आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों की संभावना बढ़ गई है।
मुंबई के अलावा, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी रहा। आम आदमी पार्टी (आप) और विभिन्न छात्र संगठनों ने रविवार को दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर मार्च निकाले और सीईसी के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर एकत्र हुए, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों के खिलाफ कार्रवाई करने में तेजी दिखा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर चुप्पी साधे हुए है। छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि युवा वर्ग चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता चाहता है और वर्तमान स्थिति में उन्हें अपने मतदान अधिकारों को लेकर चिंता सता रही है। आप नेताओं ने भी सीईसी पर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि पिछले तीन दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह तीसरा बड़ा प्रदर्शन है। इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी विभिन्न विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध मार्च निकाले थे। इन लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता की कमी है, जिसके कारण संस्था की छवि धूमिल हो रही है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन प्रदर्शनों और आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जो दर्शाता है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा अब पारंपरिक राजनीतिक दुश्मनी से ऊपर उठ चुका है। वहीं, दिल्ली में आप और छात्र संगठनों का सक्रिय होना यह संकेत देता है कि यह विरोध केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यदि चुनाव आयोग इन चिंताओं का समाधान नहीं करता है, तो विपक्षी एकजुटता और जन आंदोलन तेज होने की पूरी संभावना है। फिलहाल, मुंबई और दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सीईसी के खिलाफ गुस्सा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, और यह मामला अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहकर सड़कों पर उतर आया है।

