Thu, 08 Oct 20267:44 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 7:44 AM IST
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मुंगेर: पति के बाद पत्नी की मौत से दो मासूम हुए अनाथ, सीएम की पत्नी ममता चौधरी ने रामपुर जाकर परिवार को दी सांत्वना

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मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले के संग्रामपुर प्रखंड स्थित रामपुर गांव में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। इस गांव में रहने वाली आस्था कुमारी का जमुई सदर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। कुछ समय पहले ही उनके पति की भी मृत्यु हुई थी, और अब पत्नी के चले जाने से उनके दो छोटे बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं। इस हृदयविदारक स्थिति में बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी स्वयं पीड़ित परिवार से मिलने रामपुर गांव पहुंचीं। उन्होंने न केवल शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी, बल्कि बच्चों की देखभाल और उनके भविष्य को लेकर गहरी चिंता भी व्यक्त की।

आस्था कुमारी की मृत्यु की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली, वहां मातम का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल है। सबसे अधिक दयनीय स्थिति उन दो मासूम बच्चों की है, जिन्होंने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद अब उनके लालन-पालन, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर परिवार एवं समाज के समक्ष गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की पत्नी ममता चौधरी का व्यक्तिगत रूप से गांव पहुंचना और परिवार के दुख में शामिल होना प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रामपुर गांव पहुंचने पर ममता चौधरी ने दिवंगत आस्था कुमारी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकग्रस्त परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली और यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उनकी उपस्थिति से पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिली है, क्योंकि उन्हें लगा है कि सरकार उनके दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है। हालांकि, भावनात्मक सांत्वना के साथ-साथ परिवार ने अपनी व्यावहारिक चिंताएं भी स्पष्ट रूप से रखी हैं।

परिवार के सदस्यों ने ममता चौधरी के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा कि बच्चों के बालिग होने तक सरकार को उनके खर्च की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। परिजनों का कहना है कि चूंकि बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और उनके पास कोई अभिभावक नहीं बचा है, इसलिए उनके भरण-पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जानी चाहिए। परिवार ने स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि जब तक ये बच्चे स्वयं अपने पैरों पर खड़े होने योग्य नहीं हो जाते, तब तक सरकारी सहायता निरंतर जारी रहे ताकि इनके भविष्य पर अंधकार न छाए। यह मांग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा की गारंटी भी शामिल है।

इस घटना ने बाल संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान आकर्षित किया है। जब किसी परिवार में दोनों अभिभावकों की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे बच्चों को ‘अनाथ’ या ‘देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे’ की श्रेणी में रखा जाता है। बिहार सरकार की मौजूदा नीतियों के तहत ऐसे बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति और आवासीय सुविधाएं शामिल हैं। परिजनों की मांग इसी दिशा में है कि इन योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी या जटिल प्रक्रिया के इन बच्चों को मिले। ममता चौधरी की यात्रा को इस संदर्भ में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में तेजी आने की उम्मीद है।

स्थानीय स्तर पर भी इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था कुमारी और उनके पति की असामयिक मृत्यु ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। समुदाय के लोग यथासंभव परिवार की मदद कर रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक सहयोग के लिए सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य है। जिला प्रशासन और बाल संरक्षण इकाई से अपेक्षा की जा रही है कि वे तत्काल प्रभाव से बच्चों की स्थिति का आकलन करें और आवश्यक कानूनी तथा वित्तीय प्रक्रियाएं शुरू करें।

मुख्यमंत्री की पत्नी की इस यात्रा ने जहां परिवार को भावनात्मक संबल दिया है, वहीं यह भी संदेश गया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन की सक्रियता जरूरी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परिजनों की मांग पर कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से अमल होता है। दो मासूम बच्चों का भविष्य अब राज्य की सामाजिक प्रतिबद्धता और प्रशासनिक दक्षता पर निर्भर करता है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों या दुर्घटनाओं से उत्पन्न होने वाली ऐसी त्रासदियों में सरकारी तंत्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है और समयबद्ध कार्रवाई कैसे किसी जीवन को बचा सकती है।